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लारी कार्डियोलॉजी सेंटर: हार्ट में ब्लॉकेज बता डाल दिया स्टेंट, फिर निकाला
Fri, 06 Dec 2019 02:52 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Fri, 06 Dec 2019 02:52 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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केजीएमयू के लारी कार्डियोलॉजी सेंटर में मंगलवार को हार्ट में दर्द की शिकायत लेकर पहुंचे मरीज को ब्लॉकेज बताकर ऑपरेशन की सलाह दी गई। इसका शुल्क भी जमा करा लिया गया। मरीज को ओटी में ले जाकर हाथ में चीरा लगाकर स्टेंट भी डाला गया।
मगर इसी दौरान कोई ब्लॉकेज न मिलने पर स्टेंट वापस निकाल लिया गया। तीमारदारों ने आपत्ति जताई तो मरीज का जमा कराया गया शुल्क वापस कर उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। आशियाना निवासी विमलेश (35) को अचानक सीने में दर्द उठा तो मंगलवार को तीमारदार उन्हें लॉरी की इमरजेंसी में लाए।
डॉक्टरों ने मरीज की ईसीजी जांच की। रिपोर्ट गड़बड़ होने पर मरीज को हार्ट में ब्लॉकेज बताया गया। हालांकि उसकी एंजियोग्राफी तक नहीं हुई। तीमारदारों को ब्लॉकेज खोलने के लिए करीब 70 हजार रुपये का खर्च बताया गया। इस दौरान मरीज को इंजेक्शन समेत अन्य दवाएं दी गई।
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मगर इसी दौरान कोई ब्लॉकेज न मिलने पर स्टेंट वापस निकाल लिया गया। तीमारदारों ने आपत्ति जताई तो मरीज का जमा कराया गया शुल्क वापस कर उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। आशियाना निवासी विमलेश (35) को अचानक सीने में दर्द उठा तो मंगलवार को तीमारदार उन्हें लॉरी की इमरजेंसी में लाए।
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डॉक्टरों ने मरीज की ईसीजी जांच की। रिपोर्ट गड़बड़ होने पर मरीज को हार्ट में ब्लॉकेज बताया गया। हालांकि उसकी एंजियोग्राफी तक नहीं हुई। तीमारदारों को ब्लॉकेज खोलने के लिए करीब 70 हजार रुपये का खर्च बताया गया। इस दौरान मरीज को इंजेक्शन समेत अन्य दवाएं दी गई।
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ब्लॉकेज का सटीक पता नहीं चलता
प्रतीकात्मक तस्वीर
तीमारदारों का आरोप है कि बिना एंजियोग्राफी जांच ही डॉक्टरों ने मरीज को ब्लॉकेज बताया, जिसे खोलने के लिए उसे ओटी में ले गए। हाथ में चीरा लगाकर स्टेंट भी डाला गया। इस दौरान डॉक्टरों को कोई ब्लॉकेज नहीं मिला तो स्टेंट निकाल लिया गया।
डॉक्टरों ने तीमारदारों से कोई ब्लॉकेज न होने की बात कही। इसके बाद डॉक्टरों ने मरीज की एंजियोग्राफी की तो रिपोर्ट नॉर्मल आई। डॉक्टरों ने जमा शुल्क करीब 65 हजार रुपये वापस कर मरीज को डिस्चार्ज कर दिया है।
कई दफा दवाओं से भी ब्लॉकेज खुल जाते हैं। एंजियोग्राफी के दस प्रतिशत मामलों में ब्लॉकेज का सटीक पता नहीं चलता है। ऐसे में मरीज को दर्द होने पर स्टेंट डालना पड़ता है। - डॉ. अक्षय प्रधान, प्रवक्ता, लारी कार्डियोलॉजी सेंटर
डॉक्टरों ने तीमारदारों से कोई ब्लॉकेज न होने की बात कही। इसके बाद डॉक्टरों ने मरीज की एंजियोग्राफी की तो रिपोर्ट नॉर्मल आई। डॉक्टरों ने जमा शुल्क करीब 65 हजार रुपये वापस कर मरीज को डिस्चार्ज कर दिया है।
कई दफा दवाओं से भी ब्लॉकेज खुल जाते हैं। एंजियोग्राफी के दस प्रतिशत मामलों में ब्लॉकेज का सटीक पता नहीं चलता है। ऐसे में मरीज को दर्द होने पर स्टेंट डालना पड़ता है। - डॉ. अक्षय प्रधान, प्रवक्ता, लारी कार्डियोलॉजी सेंटर