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Lucknow News: डॉक्टरों ने तीन माह के इलाज के बाद बच्चे को पैर पर खड़ा किया
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केजीएमयू।
लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के डॉक्टरों ने डिस्टोनिया और सेरेब्रल पाल्सी जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे 12 वर्षीय बच्चे को नई जिंदगी दी है। बच्चा अपने पैरों पर खड़ा तक नहीं हो पाता था। तीन महीने तक चले इलाज के बाद बच्चा अब बिना किसी सहारे के चलने लगा है।
लखनऊ निवासी बच्चा चलना-फिरना तो दूर, दैनिक कार्यों के लिए भी पूरी तरह परिजनों पर निर्भर था। कई न्यूरोलॉजिस्ट से इलाज के बावजूद राहत न मिलने पर परिजन पिछले साल दिसंबर में केजीएमयू के फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन विभाग पहुंचे।
डॉ. आराधना के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने बच्चे का इलाज शुरू किया। शुरुआत में गतिरोधी दवाएं दी गईं। मनोचिकित्सा विभाग के सहयोग से रीपिटिटिव ट्रांसक्रेनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन सत्र कराए गए, जिससे डिस्टोनिया (मांसपेशियों का खिंचाव) की तीव्रता कम हुई। स्थिति में सुधार होने पर फिनोल न्यूरोलिसिस और बोटॉक्स इंजेक्शन जैसी आधुनिक विधियों का सहारा लिया गया, जिससे मांसपेशियों पर नियंत्रण बेहतर हुआ।
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डॉक्टरों के अनुसार, तीन महीने की कड़ी मेहनत और फिजियोथेरेपी के बाद बच्चा अब खुद खड़ा होकर चलने लगा है। उसे फॉलोअप और आगे के उपचार के लिए मई में फिर भर्ती किया जाएगा।
जानें, डिस्टोनिया और सेरेब्रल पाल्सी क्या है
डिस्टोनिया ऐसी समस्या है, जिसमें शरीर की मांसपेशियां अपने आप सिकुड़ती हैं। इससे हाथ-पैर या गर्दन टेढ़ी हो सकती है। सेरेब्रल पाल्सी जन्म के समय या बाद में दिमाग को नुकसान होने से होती है, जिससे चलने-फिरने, संतुलन और शरीर के नियंत्रण में दिक्कत होती है।
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लखनऊ निवासी बच्चा चलना-फिरना तो दूर, दैनिक कार्यों के लिए भी पूरी तरह परिजनों पर निर्भर था। कई न्यूरोलॉजिस्ट से इलाज के बावजूद राहत न मिलने पर परिजन पिछले साल दिसंबर में केजीएमयू के फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन विभाग पहुंचे।
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डॉ. आराधना के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने बच्चे का इलाज शुरू किया। शुरुआत में गतिरोधी दवाएं दी गईं। मनोचिकित्सा विभाग के सहयोग से रीपिटिटिव ट्रांसक्रेनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन सत्र कराए गए, जिससे डिस्टोनिया (मांसपेशियों का खिंचाव) की तीव्रता कम हुई। स्थिति में सुधार होने पर फिनोल न्यूरोलिसिस और बोटॉक्स इंजेक्शन जैसी आधुनिक विधियों का सहारा लिया गया, जिससे मांसपेशियों पर नियंत्रण बेहतर हुआ।
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डॉक्टरों के अनुसार, तीन महीने की कड़ी मेहनत और फिजियोथेरेपी के बाद बच्चा अब खुद खड़ा होकर चलने लगा है। उसे फॉलोअप और आगे के उपचार के लिए मई में फिर भर्ती किया जाएगा।
जानें, डिस्टोनिया और सेरेब्रल पाल्सी क्या है
डिस्टोनिया ऐसी समस्या है, जिसमें शरीर की मांसपेशियां अपने आप सिकुड़ती हैं। इससे हाथ-पैर या गर्दन टेढ़ी हो सकती है। सेरेब्रल पाल्सी जन्म के समय या बाद में दिमाग को नुकसान होने से होती है, जिससे चलने-फिरने, संतुलन और शरीर के नियंत्रण में दिक्कत होती है।