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14 साल की बच्ची के पेट से निकला बालों का गुच्छा

Fri, 29 May 2015 01:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 29 May 2015 01:27 AM IST
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Doctors did a tough operation of a teenaged girl.

14 साल की साहिबा को डेढ़ साल से पेट दर्द की शिकायत थी। कुछ भी खाते ही उल्टी हो जाती थी। यही नहीं भूख न लगना और इन सब के कारण लगातार शरीर का वजन भी कम हो रहा था।

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साहिबा के पिता कलीमउल्ला इन दिक्कतों को लेकर डॉक्टर के पास पहुंचे तो एंडोस्कोपी जांच में पता चला कि उसके पेट में बालों का गुच्छा है। इसके बाद सर्जरी कर पेट से बालों के गुच्छे को बाहर निकाला गया।
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साहिबा के पेट से सर्जरी कर बालों का गुच्छा निकालने वाले सर्जन डॉ. मुश्ताक अली ने बताया कि बाल खाना एक मानसिक बीमारी है। इसे ‘ट्राइकोबेजोर’ कहते हैं। साहिबा भी इसी बीमारी से पीड़ित थी। लगभग ढाई साल से वो अपने बाल नोच-नोचकर खाती थी। इसकी जानकारी उसके परिवार को भी काफी दिन बाद हुई।
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सर्जरी करना भी था मुश्किल, पहले चढ़ाया गया खून

Doctors did a tough operation of a teenaged girl.

लगभग डेढ़ साल पहले साहिबा को दिक्कत शुरू हुई तो किसी चिकित्सक ने एंडोस्कोपी से उसके पेट से बाल निकाले थे। इसके बाद भी साहिबा ने बाल खाने की आदत नहीं छोड़ी। धीरे-धीरे उसकी दिक्कत बढ़ गई।

14 मई को लखीमपुर निवासी कलीमउल्ला बेटी साहिबा को लेकर लखनऊ आए। उन्होंने बताया कि वो दो साल से भूख न लगने व पेट दर्द से परेशान है।

अल्ट्रासाउंड और एंडोस्कोपी से पता चला कि उसके पेट में बालों का गुच्छा है जो पेट में फंसा हुआ था। साहिबा को सभी दिक्कतें इसी कारण हो रही थीं।

डॉ. मुश्ताक अली ने बताया कि बिना सर्जरी के इस गुच्छे को निकालना संभव नहीं था। लेकिन साहिबा काफी कमजोर थी इसलिए सर्जरी से पहले उसे खून चढ़ाया गया। खून चढ़ाने के बाद एनेस्थीसिया से क्लीयरेंस लिया गया। इसके बाद सोमवार को उसकी सर्जरी की गई।

डेढ़ घंटे चला ऑपरेशन

Doctors did a tough operation of a teenaged girl.

डॉ. मुश्ताक अली ने बताया कि पेट खोलने पर पता चला कि एक फुट लंबा और लगभग 500 ग्राम का बालों का गुच्छा उसके पेट (अमाशय) में है। लगभग डेढ़ घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद पेट से बालों के गुच्छे को निकाला जा सका।

गुच्छा निकालने के बाद पता चला कि कुछ बाल उसकी आंतों के ऊपरी हिस्से ‘ड्यूडनम’ तक पहुंच गए थे। इसके बाद उन्हें भी निकालने की प्रक्रिया शुरू की गई।

उन्होंने बताया कि पेट की मुकाबले आंतों से बाल निकालना काफी कठिन था। काफी मुश्किलों से ड्यूडनम से बालों को निकाला गया। उन्होंने बताया कि संस्थान में इस तरह की ये पहली सर्जरी थी।

मानसिक रोग है बाल खाना
डॉ. मुश्ताक अली ने बताया कि बाल खाना एक मानसिक बीमारी है। इस तरह के मरीज हजारों में एक मिलते हैं। इस बीमारी को ट्राइकोबेजोर कहा जाता है। इसमें रोगी अपने बाल नोच कर खाता है। ऐसा वो छिपकर करता है इसलिए परिवारीजनों को इस बारे में पता नहीं चलता है।

सर्जरी के बाद साहिबा ने स्वयं बाल खाने की बात स्वीकार की है। सर्जरी के बाद उसका मनोचिकित्सक से भी इलाज शुरू करा दिया गया है। उम्मीद है कि साहिबा को इस आदत से छुटकारा मिल जाएगा।

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