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थ्रीडी प्रिंटेड जबड़ा लगाकर लौटाई किशोरी की खूबसूरती, इस अस्पताल में पहली बार हुई ऐसी सर्जरी
Thu, 30 Jan 2020 03:56 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 30 Jan 2020 03:56 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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लखनऊ में केजीएमयू के दंत संकाय में थ्रीडी प्रिंटेड जबड़ा लगाकर सिर्फ एक सर्जरी से किशोरी का चेहरा सुधार दिया गया है। सर्जरी से पहले उसका मुंह पूरा नहीं खुलता था, अब समस्या दूर हो गई है। पहले इस तरह की समस्या होने पर तीन से चार बार सर्जरी करनी पड़ती थी, लेकिन अब एक ही सर्जरी से जबड़े को दुरुस्त किया जा सकेगा।
केजीएमयू में थ्रीडी प्रिंटेड जबड़ा लगाकर पहली बार सर्जरी की गई। कानपुर के रामादेवी निवासी युवती का जबड़ा नहीं खुल रहा था। उसका चेहरा भी असामान्य लगने लगा था। परिवारीजन करीब आठ साल पहले किसी संस्थान में सर्जरी कराई थी। इसके बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ।
माहभर पहले घरवाले युवती को लेकर केजीएमयू के दंत संकाय आए। यहां डॉ. दिव्या मेहरोत्रा ने एक्स-रे कराया तो पता चला कि जबड़े की हड्डी छोटी है। फिर थ्रीडी प्रिंटेड तकनीक से सर्जरी प्लान की गई। कंप्यूटर पर डिजाइन बनाने के बाद उसकी टाइटेनियम मेडल का थ्रीडी प्रिंट लिया गया। फिर सर्जरी करके उसे हूबहू फिट कर दिया गया। अब उसका पूरा मुंह खुलने लगा है। उसका चेहरा भी सामान्य हो गया है।
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केजीएमयू में थ्रीडी प्रिंटेड जबड़ा लगाकर पहली बार सर्जरी की गई। कानपुर के रामादेवी निवासी युवती का जबड़ा नहीं खुल रहा था। उसका चेहरा भी असामान्य लगने लगा था। परिवारीजन करीब आठ साल पहले किसी संस्थान में सर्जरी कराई थी। इसके बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ।
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माहभर पहले घरवाले युवती को लेकर केजीएमयू के दंत संकाय आए। यहां डॉ. दिव्या मेहरोत्रा ने एक्स-रे कराया तो पता चला कि जबड़े की हड्डी छोटी है। फिर थ्रीडी प्रिंटेड तकनीक से सर्जरी प्लान की गई। कंप्यूटर पर डिजाइन बनाने के बाद उसकी टाइटेनियम मेडल का थ्रीडी प्रिंट लिया गया। फिर सर्जरी करके उसे हूबहू फिट कर दिया गया। अब उसका पूरा मुंह खुलने लगा है। उसका चेहरा भी सामान्य हो गया है।
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जानिए, कैसे आती है ये समस्या
प्रतीकात्मक तस्वीर
डॉ. मेहरोत्रा ने बताया कि थ्रीडी प्रिंटेड जबड़ा 50 हजार रुपये में तैयार हो गया है। दोनों जबड़े एक लाख में तैयार हो गए हैं। इससे पहले इस तरह के केस में छह-छह माह के बीच तीन से चार बार सर्जरी करनी पड़ती थी और एक आर्टिफिशियल जबड़ा बनाने में खर्च भी करीब डेढ़ लाख रुपये आता था। थ्रीडी प्रिंटेड जबड़ा लगाने में सिर्फ एक सर्जरी करनी पड़ती है।
डॉ. दिव्या मेहरोत्रा ने बताया कि बचपन में गिरने पर जबड़े में समस्या आ जाती है। इस दौरान किसी ने ध्यान नहीं दिया। धीरे-धीरे हड्डी टेढ़ी हो गई, जिसकी वजह से चेहरा भी असामान्य हो गया। जहां तक इस केस में जबड़े की हड्डी छोटी होने का सवाल है तो यह गलत तरीके से ऑपरेशन करने का नतीजा भी हो सकता है।
डॉ. दिव्या मेहरोत्रा ने बताया कि बचपन में गिरने पर जबड़े में समस्या आ जाती है। इस दौरान किसी ने ध्यान नहीं दिया। धीरे-धीरे हड्डी टेढ़ी हो गई, जिसकी वजह से चेहरा भी असामान्य हो गया। जहां तक इस केस में जबड़े की हड्डी छोटी होने का सवाल है तो यह गलत तरीके से ऑपरेशन करने का नतीजा भी हो सकता है।