महंगाई की मार से 'दो गज जमीन' भी मयस्सर नहीं
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कब्रिस्तानों में दो गज जमीन की जुगत करना मुश्किल हो रहा है। वजह है डीएम सर्किल रेट। जैसे-जैसे सर्किल रेट बढ़ रहा है, कब्र की जमीन का नजराना भी बढ़ता जा रहा है।
पहले कब्र की जो जगह पांच हजार से 60 हजार रुपये तक में मिल जाती थी, महंगाई की मार से उनके भाव दस हजार से एक लाख रुपये तक हो गए हैं।
मनमाना वसूल रहे पैसा
राजधानी के तकरीबन सभी कब्रिस्तानों में दो गज जमीन तलाशना अब मुश्किल हो गया है।
डीएम सर्किल रेट बढ़ने के कारण चौक, ऐशबाग, तालकटोरा, गोमतीनगर के कब्रिस्तानों में अब मोटा नजराना देना पड़ रहा है। डीएम सर्किल रेट बढ़ने के बाद वक्फ बोर्ड किराएदारों व मुतवल्ली से ज्यादा अंशदान ले रहा है।
इस वजह से मुतवल्ली भी कब्रिस्तानों में कब्र की जगह देने में मनमाना पैसा वसूल रहे हैं।
महंगे कब्रिस्तान
शियाः
इमामबाड़ा गुफरानमॉब कब्रिस्तान के साथ इमामबाड़ा आगा वाकर, मल्का आफाक, करबला तालकटोरा में रेट सबसे ज्यादा हैं। यहां दो गज जमीन के लिए बीस हजार रुपये से एक लाख तक खर्च करने पड़ते हैं।
सुन्नीः
ऐशबाग, कपूरथला, निशातगंज व गोमतीनगर का कब्रिस्तान सबसे महंगे हैं। इन सभी पर मुतवल्ली द्वारा डीएम सर्किल रेट के मुताबिक कब्र का नजराना वसूला जा रहा है। यहां 10 हजार से 80 हजार तक नजराना देना पड़ता है।
हयाती कब्रों ने भी बढ़ाए भाव
हयाती कब्र (जिंदा रहते खरीदी गई कब्र के लिए जमीन) ने कब्रिस्तान की जमीन के भाव बढ़ा दिए हैं।
शिया चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास नकवी बताते हैं कि कब्रिस्तानों में पहले से लोग हयाती कब्रें लेकर भाव बढ़ा रहे हैं। इस पर रोक लगे। साथ ही कब्रिस्तानों में मुतवल्ली के नजराना के नाम पर धन उगाही को रोकना चाहिए।
कब्रिस्तानों में कब्र की जगह कम होने से ऐसे मामले प्रकाश में आए हैं। इसके बावजूद गरीबों को दफन की सुविधाएं भी दी जाती हैं। उनसे कम से कम नजराना लिया जाता है।
- जुफर फारूकी, चेयरमैन, सुन्नी वक्फ बोर्ड
कुछ कब्रिस्तानों में जगह कम होने से इस तरह की समस्या आ रही है। महंगाई का असर जरूर पड़ता है, लेकिन डीएम सर्किल रेट के मुताबिक वसूली नहीं हो रही है।
- गुलाम सय्यादैन, प्रशासनिक अधिकारी, शिया वक्फ बोर्ड