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Lucknow News: बर्खास्त सैन्यकर्मी के मनी लॉन्ड्रिंग में लिप्त होने की आशंका
Fri, 09 Feb 2024 04:13 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Fri, 09 Feb 2024 04:13 AM IST
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लखनऊ। बर्खास्त सैन्यकर्मी प्रिंस कुमार सिंह के मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने की आशंका जताई गई है। पुलिस केस दर्ज कराने वाली लेफ्टिनेंट कर्नल मिथिलेश यादव से संपर्क कर सभी दस्तावेज लेने की तैयारी कर रही है। जांच में पता चला है कि आरोपी ने नौ फर्जी मुहर भी बनवाई थीं। उन मुहरों को उसने अलग-अलग काम के लिए प्रयोग भी किया था।
एडीसीपी पूर्वी अली अब्बास ने बताया कि प्रिंस कुमार सिंह के खिलाफ दर्ज केस की विवेचना इंस्पेक्टर फूलचंद्र को दी गई है। उन्होंने बताया कि आरोपी प्रिंस के फर्जीवाड़े से जुड़े सभी दस्तावेज हासिल करने के लिए पुलिस ने लिखापढ़ी शुरू कर दी है। विवेचक बृहस्पतिवार को शिकायतकर्ता के बयान दर्ज करने के लिए रिजर्व सप्लाई डिपो गए थे, पर उनसे मुलाकात नहीं हो सकी।
शिकायतकर्ता मिथिलेश यादव का आरोप है कि जिस तरह आरोपी के 12 बैंक खातों में 1.82 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है, उससे प्रिंस के मनी लॉन्ड्रिंग, आपराधिक और देशविरोधी गतिविधियों में लिप्त होने की आशंका भी है।
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एडीसीपी ने बताया कि अभी इस बात का पता नहीं चल सका है कि आरोपी प्रिंस मूल रूप से कहां का रहने वाला है। पुलिस इस बारे में पता लगा रही है। उन्होंने बताया कि केस की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू पर जांच की जा रही है।
पुलिस से की गई शिकायत के मुताबिक आरोपी प्रिंस ने 874 AT Bn, Stn HQ उधमपुर, मेजर आशीष सिंह, मिलिटरी पुलिस कर्नाटक, ब्रिगेडियर टीके त्रिपाठी, कमांड अस्पताल कोलकाता, लेफ्टिनेंट कर्नल चिरनजीत यादव, लेफ्टिनेंट कर्नल मिथिलेश यादव और हेडक्वार्टर इस्टर्न कमांड के नाम से फर्जी मुहर बनवा रखी थीं। इन मुहरों का प्रयोग उसने अलग-अलग काम के लिए किया था। जांच में पता चला कि आरोपी ने कमांड अस्पताल कोलकाता की मुहर लखनऊ से अपनी साली वंदना सिंह के फर्जी मेडिकल फिटनेस दस्तावेज तैयार करने के लिए बनवाई थी। लेफ्टिनेंट कर्नल चिरनजीत यादव और हेडक्वार्टर इस्टर्न कमांड की मुहर उसने नष्ट कर दी थी। पूछताछ के दौरान प्रिंस ने कुबूला कि उसने फर्जी मुहर बनवाने के लिए रिजर्व सप्लाई डिपो में तैनात हेड क्लर्क जीवन दास से मदद ली थी। इससे मामले में हेड क्लर्क की भूमिका भी संदिग्ध मिली है। दोनों के बीच तीन बार रुपये का लेनदेन भी हुआ था।
बर्खास्त सैन्यकर्मी प्रिंस कुमार सिंह के खिलाफ दर्ज एफआईआर में आरोप बेहद गंभीर हैं। सीमा के सटे इलाकों से खातों में लेनदेन व फर्जी दस्तावेजों के प्रयोग की शिकायत को देखते हुए संभावना जताई जा रही है कि एटीएस या किसी अन्य जांच एजेंसी को विवेचना सौंपी जा सकती है। डीसीपी पूर्वी प्रबल प्रताप सिंह का कहना है कि फिलहाल पुलिस ही मामले की जांच कर रही है।
सेना के रिकार्ड में आरोपी प्रिंस का कोई बैंक खाता नहीं था। सेना ने जब प्रिंस को भगोड़ा घोषित किया तो एसबीआई की कैंट ब्रांच से एक लीगल नोटिस मिला। नोटिस में इस बात का जिक्र था कि प्रिंस ने छह लाख रुपये का लोन ले रखा था। इसके बाद सिविल रिपोर्ट सामने आने पर पता चला कि आरोपी ने अलग-अलग बैंकों और मोबाइल एप के माध्यम से 29 लाख रुपये का लोन लिया था।
शातिर प्रिंस कुमार अपने ससुर शंभू सिंह से भी रकम ऐंठना चाहता था। इसके लिए उसने पत्नी को एक खत लिखा। उसमें बताया था कि उसे नेपाल में बंधक बना लिया गया है। पत्र के साथ उसने वर्दी में घायल अवस्था में एक फोटो भी तैयार कर भेजी थी। इसके पीछे ससुर से रकम ऐंठने की मंशा बताई जा रही है।
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एडीसीपी पूर्वी अली अब्बास ने बताया कि प्रिंस कुमार सिंह के खिलाफ दर्ज केस की विवेचना इंस्पेक्टर फूलचंद्र को दी गई है। उन्होंने बताया कि आरोपी प्रिंस के फर्जीवाड़े से जुड़े सभी दस्तावेज हासिल करने के लिए पुलिस ने लिखापढ़ी शुरू कर दी है। विवेचक बृहस्पतिवार को शिकायतकर्ता के बयान दर्ज करने के लिए रिजर्व सप्लाई डिपो गए थे, पर उनसे मुलाकात नहीं हो सकी।
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शिकायतकर्ता मिथिलेश यादव का आरोप है कि जिस तरह आरोपी के 12 बैंक खातों में 1.82 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है, उससे प्रिंस के मनी लॉन्ड्रिंग, आपराधिक और देशविरोधी गतिविधियों में लिप्त होने की आशंका भी है।
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एडीसीपी ने बताया कि अभी इस बात का पता नहीं चल सका है कि आरोपी प्रिंस मूल रूप से कहां का रहने वाला है। पुलिस इस बारे में पता लगा रही है। उन्होंने बताया कि केस की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू पर जांच की जा रही है।
पुलिस से की गई शिकायत के मुताबिक आरोपी प्रिंस ने 874 AT Bn, Stn HQ उधमपुर, मेजर आशीष सिंह, मिलिटरी पुलिस कर्नाटक, ब्रिगेडियर टीके त्रिपाठी, कमांड अस्पताल कोलकाता, लेफ्टिनेंट कर्नल चिरनजीत यादव, लेफ्टिनेंट कर्नल मिथिलेश यादव और हेडक्वार्टर इस्टर्न कमांड के नाम से फर्जी मुहर बनवा रखी थीं। इन मुहरों का प्रयोग उसने अलग-अलग काम के लिए किया था। जांच में पता चला कि आरोपी ने कमांड अस्पताल कोलकाता की मुहर लखनऊ से अपनी साली वंदना सिंह के फर्जी मेडिकल फिटनेस दस्तावेज तैयार करने के लिए बनवाई थी। लेफ्टिनेंट कर्नल चिरनजीत यादव और हेडक्वार्टर इस्टर्न कमांड की मुहर उसने नष्ट कर दी थी। पूछताछ के दौरान प्रिंस ने कुबूला कि उसने फर्जी मुहर बनवाने के लिए रिजर्व सप्लाई डिपो में तैनात हेड क्लर्क जीवन दास से मदद ली थी। इससे मामले में हेड क्लर्क की भूमिका भी संदिग्ध मिली है। दोनों के बीच तीन बार रुपये का लेनदेन भी हुआ था।
बर्खास्त सैन्यकर्मी प्रिंस कुमार सिंह के खिलाफ दर्ज एफआईआर में आरोप बेहद गंभीर हैं। सीमा के सटे इलाकों से खातों में लेनदेन व फर्जी दस्तावेजों के प्रयोग की शिकायत को देखते हुए संभावना जताई जा रही है कि एटीएस या किसी अन्य जांच एजेंसी को विवेचना सौंपी जा सकती है। डीसीपी पूर्वी प्रबल प्रताप सिंह का कहना है कि फिलहाल पुलिस ही मामले की जांच कर रही है।
सेना के रिकार्ड में आरोपी प्रिंस का कोई बैंक खाता नहीं था। सेना ने जब प्रिंस को भगोड़ा घोषित किया तो एसबीआई की कैंट ब्रांच से एक लीगल नोटिस मिला। नोटिस में इस बात का जिक्र था कि प्रिंस ने छह लाख रुपये का लोन ले रखा था। इसके बाद सिविल रिपोर्ट सामने आने पर पता चला कि आरोपी ने अलग-अलग बैंकों और मोबाइल एप के माध्यम से 29 लाख रुपये का लोन लिया था।
शातिर प्रिंस कुमार अपने ससुर शंभू सिंह से भी रकम ऐंठना चाहता था। इसके लिए उसने पत्नी को एक खत लिखा। उसमें बताया था कि उसे नेपाल में बंधक बना लिया गया है। पत्र के साथ उसने वर्दी में घायल अवस्था में एक फोटो भी तैयार कर भेजी थी। इसके पीछे ससुर से रकम ऐंठने की मंशा बताई जा रही है।