पुलिस मतलब डंडा लिए मोटा सा आदमी, जानें किसने कहा ये!
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बच्चों पुलिस को देखते ही तुम्हारे मन में क्या आता है? गृह सचिव मिनिस्ती एस. ने यह सवाल पूछा तो 90 प्रतिशत बच्चों के मुंह से एक ही शब्द निकला। डर। एक बच्चे ने कहा, डंडा लिए हुए मोटा सा आदमी।
मिनिस्ती ने दूसरा सवाल पुलिसवालों से किया। आप अपने बारे में एक शब्द में खुद क्या सोचते हैं? सीओ बबिता सिंह ने जवाब दिया गर्व, बहादुरी, मेहनत।
यहां मिनिस्ती ने सवाल उठाया, जब एक पुलिसकर्मी अपना काम मेहनत से करता है और खुद पर गर्व महसूस करता है तो ऐसी क्या बात है जो बच्चे पुलिस को देखते ही डर जाते हैं।
मिनिस्ती शुक्रवार दोपहर गोमतीनगर स्थित दयाल पैराडाइज में चाइल्ड फ्रेंडली पुलिस स्टेशन स्थापित करने के लिए आयोजित राज्य स्तरीय परिचर्चा में बोल रही थीं।
आईजी क्राइम आरके स्वर्णकार ने कहा कि दो तरह के बच्चे थाना आते हैं। एक जो क्राइम करते हैं और दूसरे जिन्हें सहारा चाहिए होता है। दूसरे किस्म के बच्चों में सबसे ज्यादा घर-परिवार से प्रताड़ित की होती है।
ऐसे सुधर सकते हैं पुलिस स्टेशन
इन दोनों के लिए थाना में अलग-अलग व्यवहार होना चाहिए। जामा-तलाशी की वीडियोग्राफी और पहचान के लिए डीएनए के सैंपल एकत्र करने की सुरक्षित व्यवस्था होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सभी थानों में बाल अपराध अधिनियम का पालन शुरू हो गया है। इसे पूरी तरह से सिस्टम में लाने में कुछ वक्त लग सकता है। प्रमुख सचिव गृह कमल सक्सेना ने कहा कि बच्चों के लिए पुलिस को बर्बरता और भ्रष्टाचार का प्रतिबिंब बना दिया गया है जो गलत है।
प्रमुख सचिव महिला कल्याण रेणुका कुमार ने कहा कि पुलिस और अन्य विभागों के बीच समन्वय की बात पर जोर दिया।
वरिष्ठ पत्रकार सुधीर मिश्र ने कहा कि पुलिस सिर्फ संवेदनशील हो जाए तो कम संसाधन में भी बेहतर काम कर सकती है।