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दिव्यांगजन रोजगार अभियान: नौकरी का सपना टूटा... हाथ में आई चाय की केतली, धरातल पर कड़वी है ऊंचे दावों की कहानी
Mon, 06 Oct 2025 01:03 PM IST
भूपेन्द्र सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Mon, 06 Oct 2025 01:03 PM IST
सार
दिव्यांगजन रोजगार अभियान से नौकरी मिलने वाले दिव्यांग युवाओं का सपना अधूरा रह गया। अंततः उनके हाथ में चाय की केतली आ गई। ऊंचे दावों की कहानी धरातल पर कड़वी है।
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दिव्यांगज रोजगार अभियान (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
राजधानी लखनऊ में सम्मानजनक काम और आत्मनिर्भरता का सपना लेकर रोजगार मेले में पहुंचे दिव्यांग युवा आज हताश हैं। कौशल विकास विभाग ने 172 दिव्यांगजनों को नौकरी देने का दावा तो किया, लेकिन धरातल पर कहानी कुछ और ही है।
रोजगार मेले में चयनित कई युवाओं को 'स्टॉल संचालक' बनाकर चाय और नाश्ता बेचने का काम थमा दिया गया। कहीं किराने की दुकान पर ग्राहक संभालने की ड्यूटी, तो कहीं घर का काम करने का प्रस्ताव मिला। युवाओं का आरोप है कि विभाग ने रोजगार देने के बजाय सिर्फ संख्या बढ़ाने की खानापूर्ति की।
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रोजगार मेले में चयनित कई युवाओं को 'स्टॉल संचालक' बनाकर चाय और नाश्ता बेचने का काम थमा दिया गया। कहीं किराने की दुकान पर ग्राहक संभालने की ड्यूटी, तो कहीं घर का काम करने का प्रस्ताव मिला। युवाओं का आरोप है कि विभाग ने रोजगार देने के बजाय सिर्फ संख्या बढ़ाने की खानापूर्ति की।
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जानकीपुरम निवासी श्वेता तिवारी बताती हैं कि रोजगार मेले के दौरान एचडीएफसी बैंक में मार्केटिंग का काम देने का भरोसा दिलाया गया था। कहा गया था कि एक हफ्ते के अंदर कॉल और ईमेल आएगा, पर अब तक न कोई कॉल आया, न नौकरी मिली। यही हाल एक और संस्थान के दावे का भी रहा।...पर काम मिला चाय बेचने का
गोसाईंगंज के उदल का भी चयन स्नातक योग्यता के आधार पर हुआ। उदल ने बताया कि कंपनी की ओर से फोन आया। इकाना स्टेडियम के पास की एक किराना दुकान पर नौकरी लगाई गई। सोचा था सामान संभालने का काम होगा, पर चाय बेचने को कहा गया। विरोध किया तो 10 दिन बाद निकाल दिया।
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