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यूपी : आपदा में अपनों को खो चुके लोग हो रहे हैं परेशान, अस्पष्ट विधान बने सरकारी सहायता में बाधा

Sat, 07 Aug 2021 06:30 AM IST
दुष्यंत शर्मा महेंद्र तिवारी, लखनऊ
महेंद्र तिवारी, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 07 Aug 2021 06:30 AM IST
सार

  • परिजनों को 4 लाख की सरकारी सहायता के लिए भटकना मजबूरी
  • डॉक्टर के इलाज पर्ची मान्य नहीं, सर्पदंश में पोस्टमार्टम व पंचनामा के प्रावधान ने भी बढ़ाई मुश्किलें

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Difficulty in helping the dependents of the deceased due to the ambiguity of the rules in up
snake bite

विस्तार

प्रदेश में विभिन्न तरह की आपदाओं से अपनों को खोने वाले तमाम परिवारों को सरकारी सहायता नहीं मिल पा रही है। शासनादेश की अस्पष्टता तथा तहसील व जिले के अफसरों द्वारा अपने विवेक का इस्तेमाल करने में संकोच से बचने की कोशिश से तमाम पीड़ित परिवार परेशान हो रहे हैं।

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प्रदेश में करीब डेढ़ दर्जन दैवी आपदाएं घोषित हैं। इनसे मृत्यु पर मृतक आश्रित को 4-4 लाख रुपये की सहायता की व्यवस्था है। लेकिन, सर्पदंश से मृत्यु, नाबालिग की मृत्यु, पोस्टमार्टम व पंचनामा के अस्पष्ट प्रावधान जैसे कारणों से तमाम पीड़ित परिवारों को सहायता नहीं मिल पा रही है। प्रदेश के करीब एक दर्जन जिलों की विभिन्न तहसीलों से जुड़े राजस्वकर्मियों से बातचीत में कई ऐसे तथ्य सामने लाए गए हैं।
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कर्मियों का कहना है कि कई बार स्थानीय लोग बताते हैं कि व्यक्ति की मृत्यु सांप काटने से हुई, लेकिन वह ऐसी रिपोर्ट नहीं दे सकते। वजह, पोस्टमार्टम में यह स्पष्ट नहीं होता है। इसी तरह, शासनादेश में स्पष्टता न होने से मृतक के परिवार से सीधे जुड़े व्यक्ति के अलावा परिवार के अन्य सदस्यों में सहायता राशि देने की संस्तुति नहीं की जा सकती। इस तरह के प्रकरण जिले व शासन को संदर्भित कर देते हैं। फिर उस पर जिस तरह मार्गदर्शन आता है, कार्यवाही की जाती है।
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बच्चों के मृतक आश्रित कौन?
आपदा राहत से संबंधित शासनादेश में ‘मृतक के आश्रित’ लिखा गया है। यदि किसी बच्चे (नाबालिग) की मृत्यु किसी आपदा से हो जाती है तो उसके आश्रित कौन हुए? यह स्पष्ट नहीं है। नाबालिग बच्चों की मृत्यु से संबंधित तमाम प्रकरण में प्रभावित परिवार को सहायता अटका दी जाती है।

अविवाहित के यदि माता-पिता नहीं तो मृत्यु पर किसे सहायता?
इसी तरह यदि मृतक अविवाहित है और उसके माता-पिता नहीं हैं तो परिवार के भाई-बहन या अन्य सदस्य को सहायता देने में अड़चन आती है। इसी तरह कई ऐसे मामले सामने आते हैं, जिसमें आपदा से मृतक व्यक्ति के माता-पिता के अलावा पत्नी व बच्चे भी नहीं हैं, तो उन सदस्यों को सहायता देने में आनकानी की जाती है, जिन पर वह व्यक्ति आश्रित था।

डॉक्टर ने इलाज में सर्पदंश लिखा, लेकिन सहायता नहीं
सर्पदंश से जुड़ी घटनाओं में सहायता में कई तरह की मुश्किलें हैं। पहला, जहां सर्पदंश के बाद इलाज हुआ वहां के डॉक्टर ने इलाज के पर्चे पर सर्पदंश लिखा लेकिन, मृत्यु के बाद पोस्टमार्टम नहीं हुआ। पोस्टमार्टम में भी सर्पदंश से मृत्यु का कारण स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। ऐसे प्रकरण भी बिना सहायता रह जा रहे हैं। डॉक्टर की पर्ची पर लिखे इलाज के  कारण को मान्य नहीं किया जाता।

पोस्टमार्टम/पंचनामा के आदेश से भी उलझन
सर्पदंश के मामले में पोस्टमार्टम में कारण स्पष्ट न होने से बिसरा जांच कराई जाती थी। बिसरा में भी कारण स्पष्ट न हो पाने से बिसरा जांच की आवश्यकता समाप्त कर दी। पर, पोस्टमार्टम को बरकरार रखते हुए पंचनामा भी जोड़ दिया। सवाल उठाया जा रहा है कि जब पीएम में भी सर्पदंश से मृत्यु का कारण स्पष्ट नहीं तो फिर उसे क्यों बरकरार रखा गया? दूसरा, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि पोस्टमार्टम के साथ पंचनामा भी जरूरी है या क्या केवल पोस्टमार्टम अथवा केवल पंचनामा के आधार पर भी मदद की जा सकती है?

विषैले जंतु के काटने से मृत्यु लेकिन, मदद नहीं
कई मामले में डॉक्टर विषैले जंतु के काटने से मृत्यु लिख देते हैं। विषैले जंतु का शासनादेश में उल्लेख न होने से प्रभावित परिवार को सहायता नहीं मिल पाती। यदि आपदा की श्रेणी में सर्पदंश के साथ विषैले जंतु को जोड़ दिया जाए तो ऐसे प्रभावित परिवारों को मदद देने में आसानी हो जाएगी।

आंधी-तूफान से मृत्यु पर भी मुआवजे में मुश्किल
आपदा में आंधी-तूफान से मृत्यु पर मुआवजे की व्यवस्था है। मगर, कई बार पोस्टमार्टम में आता है कि सिर पर चोट लगने से मौत हुई है। इससे यह स्पष्ट नहीं होता कि  मृत्यु आंधी-तूफान में पेड़ गिरने से हुई या सिर पर वार कर घायल होने के बाद हुई। ऐसे प्रकरण भी फंस जाते हैं।



आपदा से मृत्यु में आर्थिक सहायता के लिए मृत्यु का प्रमाणिक कारण आवश्यक है। ऐसे में पोस्टमार्टम आवश्यक है। शासन स्तर पर सहायता के लिए लंबित मामलों की समीक्षा की गई है। करीब 80 प्रतिशत मामलों का निस्तारण हो चुका है। लंबित ज्यादा मामले सर्पदंश से संबंधित हैं। जिलाधिकारियों से कहा गया है कि जहां पीएम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण स्पष्ट नहीं है वहां सीएमओ पैनल गठित करवाकर कार्यवाही करें।
 - रणवीर प्रसाद, राहत आयुक्त

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