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Lucknow News: लिवर फेल होने के मामलों में मधुमेह बढ़ाता है मौत का खतरा

Mon, 10 Nov 2025 02:23 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 10 Nov 2025 02:23 AM IST
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Diabetes increases the risk of death in cases of liver failure
लखनऊ (सचिन त्रिपाठी)। लिवर फेल होने के बाद मधुमेह रोगियों में जान का जोखिम गैर-मधुमेह रोगियों के मुकाबले डेढ़ गुना ज्यादा रहता है। केजीएमयू और पीजीआई समेत दुनिया भर के 68 चिकित्सा संस्थानों के अध्ययन में यह निष्कर्ष सामने आया है। इसे स्पि्रंगर नेचर के हेपेटोलॉजी इंटरनेशनल जर्नल में स्थान मिला है।
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यह अध्ययन एशियन पैसिफिक एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ द लिवर की ओर से किया गया। राजधानी से इसमें संजय गांधी पीजीआई के निदेशक प्रो. आरके धीमन और केजीएमयू के डॉ. अजय कुमार पटवा शामिल रहे। अध्ययन में दीर्घकालिक लिवर फेल वाले 5,612 रोगियों को शामिल किया गया। इन मरीजों पर 90 दिन की अवधि के दौरान अध्ययन किया गया। 2,096 मरीजों में बीमारी का कारण शराबजनित लिवर रोग था। इसकी वजह से उन्हें एल्कोहोलिक हेपेटाइटिस था। इनमें से 109 मरीज मधुमेह से पीड़ित थे। तुलनात्मक विश्लेषण के लिए 109 मधुमेह और 218 गैर-मधुमेह रोगियों के दो समूह बनाए गए।
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सिर्फ 32 फीसदी जीवित रहे मधुमेह वाले रोगी

अध्ययन के दौरान 90 दिनों में देखा गया कि मधुमेह वाले रोगियों में 68 फीसदी की मौत हो गई और 32 फीसदी ही जीवित रहे। वहीं गैर-मधुमेह वाले रोगियों में 43 फीसदी की मौत हुई और 57 फीसदी अगले 90 दिनों तक जीवित रहे।
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जानें, मधुमेह क्यों बढ़ाता है खतरा

केजीएमयू के डॉ. अजय कुमार पटवा ने बताया कि मधुमेह रोगियों में शरीर की सूजन, तनाव और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली होती है। इसकी वजह से उन्हें संक्रमण, खून में अमोनिया की बढ़ोतरी और मस्तिष्क की शिथिलता जैसी जटिलताएं होती हैं। इसके साथ ही इंसुलिन प्रतिरोध और आंतों में रहने वाले सूक्ष्मजीवों (जैसे बैक्टीरिया और कवक) का संतुलन बिगड़ जाता है। ये स्थितियां लिवर की कार्यक्षमता को और कम कर देती हैं।



वजन में पांच फीसदी की कमी से 58 फीसदी कम हो सकता है मधुमेह का जोखिम

जीएमयू में फिजियोलॉजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. नरसिंह वर्मा के मुताबिक मधुमेह का सबसे बड़ा कारण खराब जीवन शैली, मोटापा और खानपान है। वजन में पांच फीसदी कमी करके मधुमेह के खतरे को 58 फीसदी तक टाला जा सकता है।



मंडरा रहा है मधुमेह का खतरा

सोसाइटी फॉर स्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया के यूपी चैप्टर के सचिव डॉ. अजय तिवारी के मुताबिक प्रदेश में मधुमेह के रोगी भले ही राष्ट्रीय स्तर से कम हों, पर प्री-डायबिटीज रोगियों का औसत काफी ज्यादा है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के अध्ययन के मुताबिक राष्ट्रीय स्तर पर मधुमेह का औसत 11.4 फीसदी है। इसके मुकाबले प्रदेश में 4.8 फीसदी आबादी इससे पीड़ित हैं। इसी तरह देश में प्री-डायबिटीज का औसत 15.3 फीसदी है, लेकिन प्रदेश में यह 18 फीसदी है।
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