हेलीकॉप्टर हादसा: मदद से पहले आ गई मौत
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बरेली से इलाहाबाद जा रहा वायुसेना के एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर 307 (ध्रुव) का पायलट एटीसी लखनऊ से मदद मांग ही रहा था कि संपर्क टूट गया।
कुछ देर बार एसपी बाराबंकी की सूचना एटीसी को मिली कि हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया है। जिस जगह ध्रुव हादसे का शिकार हुआ वह बख्शी का तालाब एयरफोर्स स्टेशन के काफी करीब है।
ध्रुव शाम करीब 4:57 बजे 4000 मीटर की ऊंचाई पर उड़ान भर रहा था।
हेलीकॉप्टर का पायलट इसी दौरान चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के एयर ट्रैफिक कंट्रोल से मदद मांग ही रहा था कि एटीसी से उसका संपर्क टूट गया। घटना की जानकारी मिलने के बाद मध्य वायु कमान मुख्यालय फौरन हरकत में आ गया।
घटनास्थल तक पहुंचने में लगे घंटों
हालांकि घटनास्थल पर राहत पहुंचाने के लिए वायु सेना को करीब एक घंटे हादसा कहां हुआ है और वहां कैसे पहुंचा जा सकता है यह पता लगाने में लग गया।
शाम करीब छह बजे के बाद बरेली से एक हेलीकॉप्टर डॉक्टर व नर्सिंग स्टॉफ को लेकर उड़ा। जबकि सूचना मिलने के बाद बख्शी का तालाब के वायु सेना अधिकारी भी वहां रवाना हो गए।
मध्य वायुकमान के जनसंपर्क अधिकारी ग्रुप कैप्टन बसंत वी पांडे का कहना है कि हादसे की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। हादसों के कारणों पर अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा।
तकनीक पर पहले भी उठे हैं सवाल
मल्टीरोल हेलीकॉप्टर ध्रुव को एचएएल ने बनाया जो कि 20 अगस्त 1992 को पहली बार उड़ान भरा था।
यह हेलीकॉप्टर 250 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से अधिकतम 5000 मीटर की ऊंचाई तक उड़ने में सक्षम है। ध्रुव में ऑटोमेटिक कंट्रोल सिस्टम है।
डॉप्लर नेवीगेशन, रेडियो अल्टोमीटर जैसी सुविधाओं के कारण खराब मौसम में भी उड़ान भरने में ध्रुव सक्षम है। हाई फ्रीक्वेंसी रेडियो कम्युनिकेशन सिस्टम से लैस होने के बावजूद एटीसी से इसका संपर्क टूटने पर सवाल उठ रहे हैं।
बहरहाल वर्ष 2011 में लाइट होने के बावजूद इसके ज्यादा वजन और रेडियो फ्रीक्वेंसी तकनीक को लेकर रक्षा मंत्रालय ने सवालिया निशान लगाए थे।
इसके बाद एचएएल ने तकनीक को सुधारने का दावा करने के बाद दोबारा इसे वायुसेना में शामिल किया गया है। अक्तूबर 2013 तक 150 ध्रुव हेलीकॉप्टर वायुसेना की एयर स्क्वाड्रन में शामिल हो चुके हैं।
उत्तराखंड त्रासदी में निभायी थी भूमिका
पिछले साल उत्तराखंड त्रासदी के समय ध्रुव हेलीकॉप्टरों ने हजारों श्रद्धालुओं की जान बचाने में मुख्य भूमिका निभाई थी। बरेली एयर स्क्वाड्रन से इन हेलीकॉप्टरों को उत्तराखंड के प्रभावित इलाकों में तैनात किया था।
इस हेलीकॉप्टर को उतरने के लिए अधिक स्थान की आवश्यकता नहीं पड़ती। सुरक्षित लैंडिंग प्रणाली और खराब मौसम से निपटने में सक्षम इस हेलीकॉप्टर का उत्तराखंड त्रासदी के बचाव व राहत अभियान में सेना ने जमकर इस्तेमाल किया था।
बरेली में होगी सैनिक सम्मान के साथ अंत्येष्टि
सीतापुर में वायुसेना के हेलीकॉप्टर हादसे में मारे गए सातों वायुसैनिकों व अफसरों के शव शनिवार को बरेली लाए जाएंगे।
सैनिक सम्मान के साथ सभी की अंत्येष्टि बरेली में ही किए जाने की तैयारी है। मरने वालों में कार्पोरल आरके सिंह और एलएसी नायडू अविवाहित थे।
सभी के परिवार वालों को सूचना दे दी गई है। मृतकों में से तीन के परिवार यहीं रहते हैं जबकि दो के परिजन दूसरे स्टेशनों पर हैं। उन्हें भी बुलाया गया है।
डीएम संजय कुमार ने हादसे को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि शनिवार को दिवंगत सैनिकों के अंतिम विदाई में जिला प्रशासन के अधिकारी भी शामिल होंगे।
गौरतलब है कि सीतापुर में दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर ने उत्तराखंड की आपदा में भी सेवाएं दी थी। हादसे का शिकार हुए दोनों पायलट भी इस अभियान में शामिल रहे थे।