डीएचएफएल ने कहा, बिजली कर्मियों के फंड का पाई-पाई चुकाएंगे
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यूपी के बिजली कर्मियों की फंड राशि डिफॉल्टर कंपनी डीएचएफएल में निवेश करने से उठे भूचाल के बीच इस कंपनी ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा है। लिखित में जारी इस पक्ष में कहा गया है कि यूपीपीसीएल सीपीएफ ट्रस्ट और यूपी स्टेट पावर सेक्टर एम्प्लाई ट्रस्ट ने कंपनी में कुल 4132 करोड़ रुपये का मूलधन जमा किया है।
इसमें से 208 करोड़ रुपये ब्याज के साथ कुल 2072 करोड़ रुपये राशि वापस की जा चुकी है। कंपनी ने स्वीकार किया है कि बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के कारण 30 सितंबर के बाद परिपक्व हुई मय ब्याज राशि 512 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया जा सका है।
डीएचएफएल ने इसके लिए भी जल्द ही कोई न कोई रास्ता निकाल लेने का भरोसा दिलाया है। कंपनी ने कहा है कि हाईकोर्ट ने ऋणदाताओं के भुगतान पर रोक लगा रखी है। हाईकोर्ट के आदेश से पहले कंपनी ने किसी भी मैच्योर हुई एफडी (सावधि जमा) का समय से भुगतान किया है।
यूपीपीसीएल सीपीएफ ट्रस्ट और यूपी स्टेट पॉवर सेक्टर एम्प्लाई ट्रस्ट का 30 सितंबर 2019 तक का हिसाब-किताब मय ब्याज के एकदम साफ है। कंपनी ने इन दोनों ही संस्थाओं से जो राशि निवेश के तौर पर ली, वो नेशनल हाउसिंग बैंक के दिशा-निर्देशों के तहत ही ली गई थी।
न तो किसी दिशा-निर्देश का उल्लंघन किया गया और न ही कोई धोखा दिया गया। डीएचएफएल ने बताया है कि यूपीपीसीएल सीपीएफ ट्रस्ट की 216 एफडी और यूपी स्टेट पॉवर सेक्टर एम्प्लाई ट्रस्ट की 320 एफडी उसके यहां हैं। कुल राशि 4132 करोड़ रुपये है।
हर संभव प्रयास कर रही डीएचएफएल
1864 करोड़ रुपये का मूलधन और उस पर बना 208 करोड़ रुपये का ब्याज समय से वापस कर दिया गया है। 30 सितंबर को हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद 456 करोड़ रुपये की राशि परिपक्व हो चुकी है। ब्याज समेत कुल 512 करोड़ रुपये का भुगतान करना है, जोकि इस आदेश के कारण रोकना पड़ा है।
इन दोनों ही संस्थाओं की 1812 करोड़ रुपये की राशि की एफडी परिपक्व होना बाकी है। 340 करोड़ रुपये ब्याज के साथ यह 2152 करोड़ रुपये बनेगा। कंपनी ने यूपीपीसीएल सीपीएफ ट्रस्ट और यूपी स्टेट पावर सेक्टर एम्प्लाई ट्रस्ट की राशि को सावधि जमा के लिए बनाई गईं सभी नियम व शर्तों का पालन करते हुए स्वीकार की हैं।
कहा गया कि डीएचएफएल हरसंभव प्रयास कर रही है कि सावधि जमा की परिपक्व राशि वापस करने में किसी तरह की दिक्कत न आए।