डीजीपी ने माना बिगड़े हैं हालात, बिना नाम लिए किया इशारा
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डीजीपी जगमोहन यादव ने माना कि, प्रतापगढ़ में हालात काबू में नहीं आ रहे हैं। पंचायत चुनाव के दौरान प्रतापगढ़ में सामने आई अराजकता को लेकर उन्होंने ऐसी ये बात कही।
उन्होंने कहा कि लगातार गड़बड़ियां हो रही हैं। एक अरसे से जिले में तैनात अफसर भी हालात संभालने में नाकाम रहे। जिले के बाहुबली मंत्री का नाम लिए बगैर डीजीपी बोले, सभी जानते हैं कि ऐसा क्यों हो रहा है।
कहा, मैं किसी का नाम नहीं लेना चाहता, पर असलियत किसी से छिपी नहीं है। डीजीपी मंगलवार को मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कप्तान की तैनाती होने के बाद भी वहां हालात नहीं सुधर रहे।
मैंने फोन कर कप्तान से कहा था कि मंगलाचरण तो अच्छा नहीं हुआ है। हालात संभालने के लिए सख्ती करनी पड़ेगी। सख्ती करने के बाद अगर हटाया भी जाता है, तो कम से कम सम्मान तो बना रहेगा।
उन्होंने दावा किया कि इस बार बीते पंचायत चुनाव की तुलना में कम हिंसा हुई है। कहा कि चुनाव के दौरान पर्व भी पड़े, क्रिकेट मैच भी हुआ और देश के प्रधानमंत्री के साथ जापानी पीएम का आगमन भी हुआ।
इन सबके बावजूद सुरक्षा व शांति बनाए रखना चुनौतीपूर्ण काम था, फिर भी इसे सकुशल निपटा लिया गया।
डीजीपी ने शांति से चुनाव कराने के लिए पूरी फोर्स और अफसरों को मुबारकबाद दी। कहा कि सिपाही से लेकर होमगार्ड और पीआरडी के जवान व चौकीदारों के लगातार परिश्रम का नतीजा है कि चुनाव शांतिपूर्ण निपट सके।
नए साल में जाएंगे घूमने
डीजीपी यादव का कार्यकाल 31 दिसंबर को समाप्त हो रहा है। उनसे पूछा गया कि क्या कार्यकाल बढ़ाने का कोई प्रस्ताव है, जिसका उन्होंने जवाब नहीं दिया। फिर उनसे पूछा गया कि नए साल में पुलिस बल के लिए वे क्या करने की सोच रहे हैं। इस पर वे मुस्कराए और बोले कि नए साल में देशाटन करेंगे।
डीजीपी ने वर्ष 2010 के पंचायत चुनाव और इस बार के चुनाव के दौरान हुई हिंसा के आंकड़े पेश किए। उन्होंने जो आंकड़े पेश किए उस लिहाज से इस बार पंचायत चुनाव में हत्या की कुल तीन (बलिया, एटा और गोंडा) वारदात हुई।
उन्होंने विजय जुलूस के दौरान किसी तरह की मारपीट और हिंसा नहीं होने का दावा किया। बकौल डीजीपी बूथ लूट की एक, मतपेटी लूटने की पांच और मतपत्र फाड़ने समेत कुल 17 घटनाएं हुईं।
हालांकि सूबे के कई जिलों से ऐसी घटना होने की सूचना सामने आई थी। ऐसे ही डीजीपी ने माना कि मतदान केंद्र पर मारपीट होने की सिर्फ चार वारदात हुई हैं, जबकि असलियत में इनकी संख्या दर्जनों में सामने आई है।