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बिना जमीन शहर में बस रहीं हाइटेक-इंटीग्रेटेड टाउनशिप, कागजों पर चल रहा विकास कार्य

Sat, 10 Aug 2019 01:27 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 10 Aug 2019 01:27 AM IST
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Development are running in papers
बिना जमीन शहर में बस रहीं हाइटेक-इंटीग्रेटेड टाउनशिप, कागजों पर चल रहा विकास कार्य
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बिना जमीन के ही राजधानी में तीन हाईटेक और 15 इंटीग्रेटेड आवासीय टाउनशिप बस रही हैं। खास बात यह है कि 10 साल से अधिक समय पहले इनके लाइसेंस लिए जाने के बाद भी विकास कार्य अधूरे हैं।
किसी के पास अभी तक कोई जमीन नहीं है। वहीं, किसी ने अभी तक डीपीआर ही स्वीकृत होने को नहीं दी है।
बावजूद इसके आवंटियों को बिना जमीन ही भूखंड बेच डाले गए हैं। यह हकीकत एलडीए से आवास विभाग को भेजी गई स्टेटस रिपोर्ट में सामने आई है।
डीपीआर तक नहीं की जमा
जमीन लेने में हाईटेक टाउनशिप बसाने वाली बिल्डर कंपनियां सबसे पीछे हैं। दो बार लाइसेंस का नवीनीकरण करा चुकी सहारा ने अभी तक अपनी 1784 एकड़ जमीन खरीदने की प्रक्रिया शुरू नहीं की है।
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इस वजह से 10 साल से अधिक समय बाद भी डीपीआर एलडीए में स्वीकृति के लिए जमा नहीं की जा सकी है।
इसी तरह एक और विकासकर्ता भी अभी तक आधी जमीन ही खरीद सका है। वहीं, गर्व बिल्डटेक के पास अभी एक तिहाई जमीन ही है।
इन दोनों की डीपीआर के लिए एलडीए अनुमोदन कर चुका है, जिससे विकास कार्य शुरू हो सकें। इंटीग्रेटेड टाउनशिप में 15 लाइसेंस अभी तक प्रदेश सरकार से लखनऊ के लिए दिए गए हैं।
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इनमें से 100 एकड़ के विकास के लिए अमरावती रेजीडेंसी को पुनरीक्षित लाइसेंस जारी किया जाना है।
वहीं, लोहिया डवलपर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की 45 एकड़ में टाउनशिप के लाइसेंस को निरस्त करने के लिए एलडीए आवास विभाग को रिपोर्ट भेज चुका है।
इस पर फै सला प्रदेश सरकार में होना है। उधर, तुलसियानी कंस्ट्रक्शंस, रोहतास प्रोजेक्ट्स लिमिटेड की ओर से डीपीआर नहीं दी गई है।
शिप्रा एस्टेट ने नहीं जमा की संशोधित डीपीआर
वर्ष 2015 में 372 एकड़ के लिए लाइसेंस लेनी वाली शिप्रा एस्टेट सुल्तानपुर रोड पर विकसित की जा रही है। इसके लिए अभी तक केवल 130 एकड़ जमीन ही बिल्डर कंपनी के पास है। वहीं, इंटीग्रेटेड टाउनशिप के लाइसेंस की अवधि बढ़ने के बाद भी संशोधित डीपीआर एलडीए के अनुमोदन के लिए नहीं दी जा सकी है।
नोटिफाई कर आरक्षित कराईं जमीनें
एलडीए और आवास विकास परिषद को शहर के पास जमीनें नहीं मिल रही हैं। ऐसे में इन्हें शहर से 15 किमी दूर तक भविष्य की योजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ रही है। वहीं, निजी बिल्डर कंपनियों ने शहर के पास हाईटेक और इंटीग्रेटेड टाउनशिप के नाम पर जमीनें आरक्षित कराई हुई हैं। इससे जरूरतमंदों को आशियाना बनाने के लिए भूखंड भी नहीं मिल पा रहे हैं।
एकड़ स्कीम में कागजों पर बिके भूखंड
रेरा के सामने आई शिकायतों को देखें तो इनमें से अधिकतर बिल्डरों ने बिना विकास कार्य और एलडीए से अनुमोदन डीपीआर पर लिए ही एकड़ स्कीम के नाम पर कागजों पर ही भूखंड बेच दिए। ऐसे में कई साल बाद भी खरीदार कब्जा नहीं पा सके हैं। सालों से ऐसे खरीदार बिल्डरों के फ्रॉड की वजह से रेरा और एलडीए के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

स्टेटस रिपोर्ट आवास विभाग को भेजी गई
प्रभारी हाइटेक-इंटीग्रेटेड सेल, एलडीए, भूपेंद्र बीर सिंह ने बताया कि हाईटेक और इंटीग्रेटेड टाउनशिप के विकास के लिए जमीनों की खरीद की स्टेटस रिपोर्ट आवास विभाग को भेजी गई है। इससे आवास विभाग इन बिल्डर कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए फैसला ले सकेगा।
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