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डिप्टी सीएम बोले: खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति का लाभ लें प्रदेश के लोग, महिला सशक्तीकरण के लिए है वरदान
Wed, 05 Mar 2025 11:13 PM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला, सिटी रिपोर्टर, लखनऊ
अमर उजाला, सिटी रिपोर्टर, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Wed, 05 Mar 2025 11:13 PM IST
सार
Deputy CM Keshav Maurya: डिप्टी सीएम केशव मौर्या ने बताया कि इस नीति के अन्तर्गत परियोजना लागत का 35 प्रतिशत से 50 प्रतिशत (अधिकतम रू. 10 करोड़ तक) का अनुदान अनुमन्य है।
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उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि कि उप्र खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 देश की सर्वोत्तम नीति में से एक है, जिसके माध्यम से प्रत्येक क्षेत्र को आच्छादित करने की योजना है। उद्यमी उप्र खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 का अधिक से अधिक लाभ उठायें। महिला सशक्तीकरण व स्वावलंबन के लिए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति वरदान साबित होगी।
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उप मुख्यमंत्री ने सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इच्छुक उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और कृषक उत्पादक संगठन आदि को इस नीति का लाभ उठाने हेतु प्रेरित व जागरूक किया जाय उन्होने निर्देश दिए हैं कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति, व उसकी विशेषताओं, उद्यम लगाने हेतु दिये जाने वाले अनुदान और अन्य प्राविधानित सुविधाओं का व्यापक स्तर पर प्रचार प्रसार कराकर लोगों को लाभ दिलाया जाए।
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उप मुख्यमंत्री ने बताया कि इस नीति के अन्तर्गत परियोजना लागत का 35 प्रतिशत से 50 प्रतिशत (अधिकतम रू. 10 करोड़ तक) का अनुदान अनुमन्य है। महिला सशक्तिकरण हेतु ग्रामीण क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण इकाई की स्थापना में 75 केवीए तक लागत का 90 प्रतिशत सौर ऊर्जा परियोजना पर अनुदान भी उपलब्ध कराया जाता है तथा अन्य उद्यमियों के लिए 50 प्रतिशत तक अनुदान दिये जाने का प्राविधान है। प्रदेश में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन (पीएम एफएमई) योजना के अन्तर्गत परियोजना लागत का 35 प्रतिशत( अधिकतम रु. 10 लाख) तक का अनुदान उपलब्ध कराया जाता है।
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