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Lucknow News: वक्फ कानून वापस लेने और जन्नतुल बकी में रौजों के पुनर्निर्माण की मांग
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प्रदर्शन करते शिया समुदाय के लोग।
लखनऊ। सऊदी अरब के जन्नतुल बकी कब्रिस्तान में हजरत फातिमा सहित अन्य सहाबा इकराम की मजारों के विध्वंस के 100 साल पूरे होने पर शुक्रवार को जुमा की नमाज के बाद आसिफी मस्जिद के बाहर शिया समुदाय ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने मजारों के पुनर्निर्माण की मांग उठाई। इस संबंध में एक प्रस्ताव भी पारित कर संयुक्त राष्ट्र, सऊदी अरब दूतावास और भारत सरकार को ई-मेल के जरिए भेजा गया।
मजलिस-ए-उलमा-ए-हिंद की ओर से ऐतिहासिक बड़ा इमामबाड़ा स्थित आसफी मस्जिद में प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे संगठन के महासचिव मौलाना सैयद कल्बे जवाद ने कहा कि सऊदी सरकार पैगंबर-ए-इस्लाम की अपराधी है, क्योंकि उसने हजरत फातिमा जहरा, उनकी संतान और सहाबा की कब्रों को ध्वस्त किया है। उन्होंने कहा कि सऊदी सरकार ब्रिटिश और साम्राज्यवादी ताकतों की कठपुतली है। गाजा युद्ध ने सऊदी सरकार की असलियत उजागर कर दी है। ऐसे में उन्होंने मुसलमानों से एकजुट होकर आवाज उठाने का आह्वान किया।
प्रदर्शन में मौलाना फैज अब्बास मशहदी, शिया वक्फ बोर्ड के सदस्य मौलाना रजा हुसैन रिजवी, मौलाना शबाहत हुसैन, खानकाह सलाहुद्दीन के बाबर सफवी, फराज आदि ने संबोधित किया।
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वक्फ कानून वापस होने तक होगा विरोध
प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार से वक्फ संशोधन कानून वापस लेने की मांग भी जोरदार तरीके से उठाई गई। मौलाना कल्बे जवाद ने कानून को वक्फ संपत्तियों की स्वायत्तता खत्म करने के साथ ही धार्मिक स्वतंत्रता पर भी हमला करार दिया। उन्होंने कहा कि कानून बनने के बाद तमाम कर्बला और इमामबाड़ों की वक्फ हैसियत खत्म हो गई है। उन्होंने कहा कि अभी मुसलमानों को निशाना बनाया गया है, अगला नंबर दलितों और आदिवासियों का होगा। हम ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के आंदोलन के साथ हैं। जरूरत पड़ने पर जेल भरो आंदोलन भी किया जाएगा। वहीं, टीले वाली मस्जिद में जुमा की नमाज से पहले खुतबे में मस्जिद के इमाम मौलाना फजलुल मन्नान रहमानी ने वक्फ संशोधन कानून को मुसलमानों के लिए नुकसानदेह बताते हुए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की मुहिम का समर्थन करने की बात कही।
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मजलिस-ए-उलमा-ए-हिंद की ओर से ऐतिहासिक बड़ा इमामबाड़ा स्थित आसफी मस्जिद में प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे संगठन के महासचिव मौलाना सैयद कल्बे जवाद ने कहा कि सऊदी सरकार पैगंबर-ए-इस्लाम की अपराधी है, क्योंकि उसने हजरत फातिमा जहरा, उनकी संतान और सहाबा की कब्रों को ध्वस्त किया है। उन्होंने कहा कि सऊदी सरकार ब्रिटिश और साम्राज्यवादी ताकतों की कठपुतली है। गाजा युद्ध ने सऊदी सरकार की असलियत उजागर कर दी है। ऐसे में उन्होंने मुसलमानों से एकजुट होकर आवाज उठाने का आह्वान किया।
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प्रदर्शन में मौलाना फैज अब्बास मशहदी, शिया वक्फ बोर्ड के सदस्य मौलाना रजा हुसैन रिजवी, मौलाना शबाहत हुसैन, खानकाह सलाहुद्दीन के बाबर सफवी, फराज आदि ने संबोधित किया।
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वक्फ कानून वापस होने तक होगा विरोध
प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार से वक्फ संशोधन कानून वापस लेने की मांग भी जोरदार तरीके से उठाई गई। मौलाना कल्बे जवाद ने कानून को वक्फ संपत्तियों की स्वायत्तता खत्म करने के साथ ही धार्मिक स्वतंत्रता पर भी हमला करार दिया। उन्होंने कहा कि कानून बनने के बाद तमाम कर्बला और इमामबाड़ों की वक्फ हैसियत खत्म हो गई है। उन्होंने कहा कि अभी मुसलमानों को निशाना बनाया गया है, अगला नंबर दलितों और आदिवासियों का होगा। हम ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के आंदोलन के साथ हैं। जरूरत पड़ने पर जेल भरो आंदोलन भी किया जाएगा। वहीं, टीले वाली मस्जिद में जुमा की नमाज से पहले खुतबे में मस्जिद के इमाम मौलाना फजलुल मन्नान रहमानी ने वक्फ संशोधन कानून को मुसलमानों के लिए नुकसानदेह बताते हुए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की मुहिम का समर्थन करने की बात कही।