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चन्द्रभानु गुप्त के नाम से विश्वविद्यालय बनाने की मांग

Mon, 15 Jul 2019 01:39 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 15 Jul 2019 01:39 AM IST
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demand to open university on the name of former chief minister chandrabhanu gupt
चन्द्रभानु गुप्त के नाम पर विश्वविद्यालय बनाने की मांग
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लखनऊ। पूर्व मुख्यमंत्री चन्द्रभानु गुप्त के 117वें जन्मदिवस पर रविवार को उन्हें याद किया गया। मोतीमहल स्थित उनकी समाधि स्थल पर पुष्पांजलि कर उन्हें श्रद्घांजलि दी गई। साथ ही हवन, पूजन व भजन का आयोजन हुआ। अशोक मार्ग स्थित चन्द्रभानु गुप्त स्मारक नवचेतना केन्द्र, उनके निवास सेवा कुटीर और रवींद्रालय स्थित उनकी प्रतिमा का माल्यार्पण किया गया। मोहनलालगंज स्थित मदर टेरेसा चैरिटी मिशन में भंडारे का आयोजन हुआ। वक्ताओं ने चन्द्रभानु गुप्त के नाम पर राजधानी में एक विश्वविद्यालय की स्थापना करने की मांग की।

मोती लाल मेमोरियल सोसाइटी एवं भारत सेवा संस्थान की ओर से चारबाग स्थित रवींद्रालय सभागार में आयोजित कार्यक्रम में बाल विद्या मंदिर के मेधावी छात्रों को पुरस्कार वितरित कि ए गए। मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त आईएएस पूर्व महासचिव राज्यसभा आरसी त्रिपाठी ने कहा कि 14 जुलाई 1902 को अलीगढ़ में एक साधारण परिवार में जन्मे चन्द्रभानु गुप्त 17 साल की उम्र में स्वतंत्रता आंदोलन में उतर आए। उनका व्यक्तित्व इतना विशाल और सादगी भरा था कि लोग उन्हें आम आदमी का मुख्यमंत्री मानते थे। उन्होंने कई गरीब मेधावी विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए अपने खर्च पर विदेश भेजा। कार्यक्रम में पूर्व महापौर डॉ. दाऊजी गुप्ता ने कहा कि चन्द्रभानु गुप्त ने शिक्षित समाज की परिकल्पना की थी। उनका मानना था कि शिक्षित समाज ही देश के विकास में सहयोग दे सकता है। उन्होंने कहा कि चन्द्रभानु गुप्त के नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि चंद्रावल में इसके लिए जमीन भी उपलब्ध है। अरुणाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल माता प्रसाद ने कहा कि वे मुख्यमंत्री होने के बावजूद लोगों से आसानी से मिलते थे। उन्होंने राजनीति में कभी परिवारवाद को हावी नहीं होने दिया। मोती लाल मेमोरियल सोसाइटी एवं भारत सेवा संस्थान की स्थापना की लेकिन परिवार के किसी भी सदस्य को उसमें शामिल नहीं किया। उन्होंने बगैर सरकारी मदद के नेशनल पीजी व इंटर कॉलेज, किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय का गांधी वार्ड, रवीन्द्रालय, बाल विद्या मंदिर बनवाया। विधान परिषद सदस्य अशोक बाजपेयी ने कहा कि आजादी की लड़ाई में उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा है। काकोरी कांड के शहीदों को जेल से रिहा करवाने के लिए उन्होंने क्रांतिकारियों की अदालत में पैरवी की थी। अध्यक्षता कर रहे सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति एसयू खान ने कहा कि चन्द्रभानु गुप्त मुख्यमंत्री होने के बावजूद सादगी से रहते थे। भारत सेवा संस्थान के अध्यक्ष भगवती सिंह ने भी विचार व्यक्त किये। दिन में चन्द्रभानु गुप्त की प्रतिमा के माल्यार्पण और उनके समाधि स्थल पर श्रद्घांजलि देने वालों में भारत सेवा संस्थान के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री भगवती सिंह, डॉ. अशोक बाजपेई, दाऊजी गुप्ता, एसएस चौहान आदि शामिल रहे।
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