फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Delhi election result to effect UP politics.

यूपी की सियासत पर असर डालेंगे दिल्ली के नतीजे!

Tue, 10 Feb 2015 11:25 AM IST
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 10 Feb 2015 11:25 AM IST
विज्ञापन
Delhi election result to effect UP politics.

दिल्ली चुनाव के बारे में सोमवार को भी हर जगह एग्जिट पोल और संभावित परिणाम को लेकर चर्चा रही। माना जा रहा है कि दिल्ली के नतीजे प्रदेश की राजनीति पर असर डालेंगे।

विज्ञापन


यदि एग्जिट पोल के अनुमान सही निकले तो ये भाजपा के लिए सबक होंगे। सपा समेत दूसरे दलों को इन नतीजों के बाद अपनी रणनीति बदलने पर विचार करना पड़ सकता है।

दिल्ली में भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है। एग्जिट पोल ‘आप’ को पूर्ण बहुमत मिलने की संभावना जता रहे हैं। केंद्र में मोदी की अगुवाई में सरकार बनने के बाद यह पहला मौका है जब भाजपा और मोदी की साख दांव पर है।
विज्ञापन


मोदी ने चुनाव प्रचार में अरविंद केजरीवाल पर खुला हमला बोला था। उन्हें लगातार अराजक कहकर संबोधित किया। ‘जो देश सोचता है, वही दिल्ली सोचती है’ जैसे उनके जुमलों ने इस चुनाव को केंद्र सरकार और मोदी की लोकप्रियता का बैरोमीटर मान लिया है। मंगलवार को नतीजे आने से पहले सवाल उठ रहे हैं कि दिल्ली के नतीजे यूपी की सियासत पर क्या असर डालेंगे?
विज्ञापन
विज्ञापन

भाजपा को समझनी होगी जमीनी हकीकत

Delhi election result to effect UP politics.

भाजपा को लोकसभा चुनाव में यूपी में 73 सीटों पर सफलता मिली थी। इसमें दो सीटें उसके सहयोगी अपना दल की हैं। इस ऐतिहासिक कामयाबी को विधानसभा चुनाव 2017 में बरकरार रखना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है।

नौ सीटों पर विधानसभा उपचुनावों और कैंट बोर्ड चुनावों में मिली हार के बाद भाजपा की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं। दिल्ली में भाजपा की संभावित हार की एक वजह ऐन वक्त पर किरण बेदी को मुख्यमंत्री पद की दावेदार के तौर पर पेश करना है। भाजपा नेतृत्व ने दिल्ली भाजपा के किसी नेता को इस काबिल नहीं माना। कमोबेश यही स्थिति यूपी में है। अभी तक प्रदेश में लीडरशिप को लेकर स्थिति साफ नहीं है।

दिल्ली के बजाय बाहरी लोगों पर ज्यादा भरोसा जताने से टीम भावना कमजोर हुई। यूपी में भी भाजपा टीम के रूप में नहीं दिख रही। वरिष्ठ नेताओं के बीच तालमेल की कमी जगजाहिर है।

यूपी से भाजपा के मंत्री, सांसद और विश्व हिंदू परिषद के कई नेता बेतुके बयान दे रहे हैं। ऐसे में यदि भाजपा को दिल्ली में झटका लगा तो संदेश जाएगा कि केवल मोदी के जादू से काम चलने वाला नहीं है। ऐसे में उप्र में भाजपा को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ेगा।

सपा के फायरब्रांड नेताओं को लेना होगा सबक

Delhi election result to effect UP politics.

मुजफ्फरनगर दंगों के बाद हुए लोकसभा चुनाव में मतदाताओं के ध्रुवीकरण के चलते सपा को करारा झटका लगा था। उसके केवल पांच प्रत्याशी ही जीत सके। भाजपा अपने इस हथियार की धार कम नहीं होने देना चाहती।

जानकार मानते हैं कि दिल्ली चुनाव के नतीजे कुछ भी आएं लेकिन दिल्ली में कुछ वक्त पहले एक-दो क्षेत्रों में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं के बावजूद  ‘आप’ ने चुनाव पर सांप्रदायिक रंग नहीं चढ़ने दिया। उसके नेताओं ने मुसलमानों से आम आदमी पार्टी को वोट देने की जामा मस्जिद के शाही इमाम अहमद बुखारी की अपील को जिस तरह अस्वीकार किया, उससे भी वोटरों में अच्छा संदेश गया।

हालांकि उन्हें मुस्लिम वोटों का बड़ा हिस्सा मिलने की उम्मीद है फिर भी वे तुष्टीकरण नीति से बचते नजर आए। मुस्लिम युवाओं ने इसे पसंद भी किया। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से इसी साल एमबीए पास करने वाले ताज कलाम कहते हैं कि ‘आप’ का स्टैंड एकदम सही था। धर्म और राजनीति अलग-अलग हैं।

धार्मिक नेताओं को राजनीति में दखलंदाजी नहीं करनी चाहिए। सवाल है कि क्या सपा के फायरब्रांड नेता इससे सबक लेंगे? यहां तो सपा नेता ही ध्रुवीकरण के फसल के लिए अपने बयानों से खाद-बीज उपलब्ध कराते हैं।

आप से सीखे सकते हैं सकारात्मक राजनीति

Delhi election result to effect UP politics.

‘आप’ ने अपने प्रचार अभियान को आक्रामक तो रखा लेकिन नकारात्मक नहीं होने दिया। दिल्ली में 49 दिन की सरकार के बाद इस्तीफा देने के लिए ‘आप’ नेताओं ने कान पकड़कर माफी मांगने में देरी नहीं लगाई। उनकी भाषा चुनौतीपूर्ण के बजाय विनम्र रही। यूपी के सियासी दल ‘आप’ के इस प्रयोग से कुछ सीख सकते हैं।

एग्जिट पोलों के अनुमानों पर भरोसा करें तो ‘आप’ को हर क्षेत्र और हर जाति-धर्म के वोट मिले। छोटा दल होने के बावजूद उनके  कार्यकर्ताओं ने जिस तरह मिशनरी भाव से काम किया, वह भी अन्य दलों के लिए उदाहरण हो सकता है। शाही इमाम का समर्थन ठुकराने में ‘आप’ नेताओं ने उनके बेटे की इमामत में प्रधानमंत्री को न्यौता न देने का तर्क देकर भी बड़प्पन दिखाया।

टीम वर्क, जनता के मुद्दे उठाने होंगे: द्विवेदी

लखनऊ विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. एसके द्विवेदी मानते हैं कि चुनाव परिणाम भाजपा के अनुकूल न रहे तो यूपी में उसे कई सबक मिलेंगे। भाजपा को नकारात्मक प्रचार, अपने नेताओं पर भरोसा, टीम वर्क और अपने मुद्दों पर टिकना होगा। दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के वादे के बजाय भाजपा केजरीवाल के मुद्दों को ही दोहराती रही।

दिल्ली में ऊपर से भाजपा नेताओं में एकता दिखती रही लेकिन निचले स्तर पर संगठन एक नहीं हो पाया। यूपी में भी भाजपा में यह मर्ज पहले से है। केवल सदस्यता अभियान चलाना काफी नहीं है। केंद्र सरकार की परफारमेंस अपेक्षा के अनुरूप न रहने से भाजपा को नुकसान उठाना पड़ा।

जाहिर है, यूपी में मोदी का नाम लेने भर से भाजपा की नैया पार नहीं होगी। भाजपा को आम लोगों की आवाज बनना होगा, उनके मुद्दे उठाने होंगे। धरातल की हकीकत को समझना होगा।

संदेश जाएगा कि मोदी का आकर्षण कम हो रहा

Delhi election result to effect UP politics.

समाजवादी नेता शतरुद्र प्रकाश कहते हैं कि चुनाव परिणाम ‘आप’ के पक्ष में आए तो  दिल्ली से सटे यूपी, हरियाणा, राजस्थान और एनसीआर सीधे प्रभावित होंगे। केजरीवाल का घर और दफ्तर गाजियाबाद जिले के कौशांबी में है। इसलिए केजरीवाल जीते तो यूपी में उसका साफ असर दिखेगा।

दिल्ली से पहला संदेश यह जाएगा कि मोदी का आकर्षण कम हो रहा है। वह लोगों की उम्मीद के मुताबिक परफार्म नहीं कर पाए। काले धन की वापसी और सुशासन को लेकर उनके वादों पर अमल नहीं हुआ।

शतरुद्र को लगता है कि लोकसभा चुनाव में जीत के बावजूद मोदी देश के फेडरल करेक्टर में पूरी तरह स्वीकार नहीं किए गए हैं। हरियाणा के अलावा भाजपा को कहीं पूर्ण बहुमत नहीं मिला। हो सकता है दिल्ली उन्हें अस्वीकार ही कर दे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed