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Defense Dialogue : राजनाथ ने कहा- रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता अब जरूरत, कॉरिडोर के लिए हुए 109 MOU

Sun, 18 Jun 2023 06:38 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 18 Jun 2023 06:38 AM IST
सार

इसके जरिये निजी कंपनियां करीब 16000 करोड़ रुपये का निवेश रक्षा उत्पाद बनाने के लिए करेंगी। राज्य सरकार भी इस पर तेजी से कार्य कर रही है।

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Defense Minister Rajnath Singh addressed the Defense Dialogue
मध्य कमान के सूर्या ऑडिटोरियम में राजनाथ सिंह। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में डिफेंस कॉरिडोर के लिए अब तक 109 एमओयू हुए हैं। इसके जरिये निजी कंपनियां करीब 16000 करोड़ रुपये का निवेश रक्षा उत्पाद बनाने के लिए करेंगी। राज्य सरकार भी इस पर तेजी से कार्य कर रही है। डिफेंस कॉरिडोर के लिए अब तक 95 फीसदी भूमि अधिग्रहण हो चुका है। रक्षा मंत्री ने शनिवार को मध्य कमान के सूर्या ऑडिटोरियम में आयोजित डिफेंस डायलॉग कार्यक्रम में यह जानकारी दी। 
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उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता अब एक जरूरत बन गई है। भारत को दोहरे सीमा खतरे और युद्धकला के नए आयामों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में मजबूत और आत्मनिर्भर सैन्य शक्ति एक संप्रभु राष्ट्र की रीढ़ है। इसीलिए सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि सशस्त्र बल विदेशी उपकरणों पर निर्भर न रहे। सैन्य शक्ति बनने के लिए भारत को भी अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी में भी आत्मनिर्भर होना होगा। 
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वित्तीय वर्ष 2022-23 में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का रक्षा उत्पादन और लगभग 16 हजार करोड़ रुपये का निर्यात हुआ है। उन्होंने विश्वास जताया कि रक्षा निर्यात शीघ्र ही 20 हजार करोड़ रुपये के स्तर को पार कर लेगा। रक्षा मंत्री ने कहा कि यूपी में डिफेंस कॉरिडोर का काम मिशन मोड में चल रहा है। 109 एमओयू में से 36 उद्योगों के लिए करीब 600 हेक्टेयर भूमि आवंटित की जा चुकी है। अब तक कंपनियां 2,500 करोड़ रुपये का निवेश कर चुकी है। यह डिफेंस कॉरिडोर में न सिर्फ स्पेयर पार्ट्स का उत्पादन होगा बल्कि ड्रोन, विमान और ब्रह्मोस मिसाइलों आदि का निर्माण भी होगा।  
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अमेठी में बनी एके-203 सबसे ख्याति प्राप्त राइफल बनी
रूस की तकनीक पर अमेठी के कोरवा में बनी देशी राइफल एके-203 दुनिया की सबसे ख्याति प्राप्त राइफल बन चुकी है।  अब तक करीब 30 लाख  राइफल की खरीद की मांग भारतीय अर्धसैनिक बलों व दक्षिणपूर्व और अफ्रीकी देशों से हुई है। सिर्फ चार साल में इस राइफल को यह मुकाम मिला है। यह कहना है इस परियोजना के निदेशक मेजर जनरल एके सेंगर का।  उन्होंने बताया कि 1991 में बनीं एके103 राइफल से यह सटीक और अधिक मारक क्षमता वाली राइफल है। 2018 में विकसित हुई एके203 जहां सिर्फ 300मीटर तक प्रभावी थी। वहीं अब इसकी मारक क्षमता 800 मीटर है। पिस्टल ग्रिप और जरूरी एक्सेसरीज के लिए डिजाइन इसे और बेहतर बनाते हैं। सिर्फ 32 महीने में हमने इसे पूरी तरह भारतीय बनाने में सफलता पाई है। उन्होंने बता कि अब तक पांच लाख से अधिक राइफल बनाई जा चुकी है। 


सेंगर ने इस परियोजना से जुड़ने की कहानी भी साझा की। एक बड़े अधिकारी का फोन सीतापुर जाते समय मेरे पास आया और पूछा गया कि क्या इस राइफल के विकास के काम से जुड़ोगे। मैंने कहा कि मुझे कुछ समय दीजिए। मुझे कहा गया कि आपके पास 15 मिनट हैं। इन 15 मिनट में मुझे तय करना था। मैं खुश हूं कि इतने महत्वपूर्ण और देशहित के काम से जुड़ा। ब्यूरो
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