{"_id":"5e6488f18ebc3ef4087c4bd4","slug":"deepak-trivedi-becomes-the-new-president-of-up-ias-association","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"यूपी आईएएस एसोसिएशन के नए अध्यक्ष बने दीपक त्रिवेदी, कार्यकारिणी की बैठक में नाम पर लगी मुहर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपी आईएएस एसोसिएशन के नए अध्यक्ष बने दीपक त्रिवेदी, कार्यकारिणी की बैठक में नाम पर लगी मुहर
Sun, 08 Mar 2020 11:26 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 08 Mar 2020 11:26 AM IST
विज्ञापन
Deepak Trivedi
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूपी आईएएस एसोसिएशन की कार्यकारिणी की बैठक में काडर के हितों को लेकर कई मुद्दो पर चर्चा हुई। लेकिन सरकार के रुख को देखते हुए पदाधिकारियों ने फैसलों पर चुप्पी साधे ली है। इस बार सर्विस वीक का आयोजन खटाई में पड़ता नजर आ रहा है।
एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष प्रवीर कुमार के जुलाई-2019 में रिटायर होने के बाद से राजस्व परिषद के चेयरमैन दीपक त्रिवेदी एसोसिएशन के अध्यक्ष और पूर्व सचिव आलोक कुमार के सचिव मुख्यमंत्री बनने के बाद से सचिव लोक निर्माण रंजन कुमार बतौर सचिव काम कर रहे हैं।
बीते बृहस्पतिवार को आईएएस एसोसिएशन कार्यकारिणी की बैठक में इनके नाम पर औपचारिक रूप से मुहर लगा दी गई। सूत्रों ने बताया कि बैठक में सरकार द्वारा लखनऊ व नोएडा में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था लागू किए जाने, 1988 बैच के आईएएस अधिकारियों को अपर मुख्य सचिव (एसीएस) के पद पर पदोन्नति न दिए जाने और हर वित्तीय वर्ष में दिसंबर से फरवरी के बीच होने वाली सर्विस वीक के लिए मुख्यमंत्री का समय न मिल पाने पर चिंता व्यक्त की गई। इस वर्ष मार्च में भी सर्विस वीक होने की संभावना नहीं रह गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष प्रवीर कुमार के जुलाई-2019 में रिटायर होने के बाद से राजस्व परिषद के चेयरमैन दीपक त्रिवेदी एसोसिएशन के अध्यक्ष और पूर्व सचिव आलोक कुमार के सचिव मुख्यमंत्री बनने के बाद से सचिव लोक निर्माण रंजन कुमार बतौर सचिव काम कर रहे हैं।
विज्ञापन
बीते बृहस्पतिवार को आईएएस एसोसिएशन कार्यकारिणी की बैठक में इनके नाम पर औपचारिक रूप से मुहर लगा दी गई। सूत्रों ने बताया कि बैठक में सरकार द्वारा लखनऊ व नोएडा में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था लागू किए जाने, 1988 बैच के आईएएस अधिकारियों को अपर मुख्य सचिव (एसीएस) के पद पर पदोन्नति न दिए जाने और हर वित्तीय वर्ष में दिसंबर से फरवरी के बीच होने वाली सर्विस वीक के लिए मुख्यमंत्री का समय न मिल पाने पर चिंता व्यक्त की गई। इस वर्ष मार्च में भी सर्विस वीक होने की संभावना नहीं रह गई है।
विज्ञापन
जानकार बताते हैं कि पहले सीएए हिंसा, फिर बजट सत्र और अब होली की छुट्टियों व कोरोना वायरस के संक्रमण से संबंधित एहतियात के बीच वित्तीय वर्ष की समाप्ति का समय होने की वजह से पूरे मार्च आईएएस अफसरों को एक साथ राजधानी में आने की अनुमति दिए जाने की संभावना नजर नहीं आ रही है।
यदि इस बार आयोजन नहीं हुआ तो बसपा शासनकाल के बाद ऐसा पहली बार होगा। सपा शासन में बसपाराज केपांच वर्ष बाद सर्विस वीक की अनुमति दी गई थी। इस सरकार में भी दो वर्ष सर्विस वीक के आयोजन हुए।
एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने बताया कि बिना व्यापक चर्चा पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने से प्रशासनिक अधिकारियों में नाराजगी है। 1988 बैच के अफसरों को काफी पहले अपर मुख्य सचिव वेतनमान मिल जाना चाहिए।
लेकिन, अब तक नहीं दिया गया। संवर्ग की ओर से इन मुद्दों को सक्षम स्तर पर नहीं उठाया गया। सर्विस वीक होने पर आमसभा में इन सभी मुद्दों पर चर्चा होती, जो चर्चा में आ सकता था। सरकार का मुंह देखने वाले अफसर नहीं चाहते हैं कि यह आयोजन हो। ऐसे में यह आयोजन इस बार शायद ही हो पाए।
यदि इस बार आयोजन नहीं हुआ तो बसपा शासनकाल के बाद ऐसा पहली बार होगा। सपा शासन में बसपाराज केपांच वर्ष बाद सर्विस वीक की अनुमति दी गई थी। इस सरकार में भी दो वर्ष सर्विस वीक के आयोजन हुए।
एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने बताया कि बिना व्यापक चर्चा पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने से प्रशासनिक अधिकारियों में नाराजगी है। 1988 बैच के अफसरों को काफी पहले अपर मुख्य सचिव वेतनमान मिल जाना चाहिए।
लेकिन, अब तक नहीं दिया गया। संवर्ग की ओर से इन मुद्दों को सक्षम स्तर पर नहीं उठाया गया। सर्विस वीक होने पर आमसभा में इन सभी मुद्दों पर चर्चा होती, जो चर्चा में आ सकता था। सरकार का मुंह देखने वाले अफसर नहीं चाहते हैं कि यह आयोजन हो। ऐसे में यह आयोजन इस बार शायद ही हो पाए।