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केजीएमयू : दो डॉक्टरों की सेवा होगी समाप्त

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Tue, 09 Jun 2020 03:03 AM IST
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decision to dismiss two doctors taken
लखनऊ। केजीएमयू कार्य परिषद की बैठक में दो डॉक्टरों की सेवा समाप्ति का फैसला लिया गया। दोनों ने कार्य परिषद के फैसले के खिलाफ अदालत से गुहार लगाने की बात कही है। वहीं, समूह ‘ग’ की नियुक्ति में धांधली मामले पर फैसला फिर टल गया है। उधर, दो डॉक्टरों की सेवा समाप्ति के फैसले से विश्वविद्यालय में हलचल मची है। संकाय सदस्य दो खेमे में बंट गए हैं। कोई कार्य परिषद के फैसले की आलोचना कर रहा है तो कोई इसे जायज ठहरा रहा है। केजीएमयू कार्यपरिषद की 42वीं बैठक सोमवार को कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट की अध्यक्षता में हुई। इसमें सीएफआर की असिस्टेंट प्रो. डॉ. नीतू सिंह की सेवा समाप्ति का फैसला लिया गया। उन पर शोध परियोजना में अनियमितता का आरोप था। उन्हें शोध परियोजनाओं से संबंधित कार्यों में अनुचित दबाव, अनियमितताओं आदि सहित अन्य कदाचार का दोषी बताया गया है। आरोप है कि डॉ. नीतू को कार्य परिषद की ओर से जांच आख्या पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, लेकिन पर्याप्त अवसर के बाद भी उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। इसी तरह पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के प्रो. डॉ. आशीष वाखलू की भी सेवा समाप्त करने का निर्णय लिया गया। आरोप है कि उन्होंने विश्वविद्यालय में कार्य करते हुए कंपनी बनाकर निजी व्यवसाय किया। सीपीएमएस का नोडल अफसर रहते हुए कंपनी को लाखों का लाभ पहुंचाया। इस दौरान गठिया रोग विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ अनुपम बाखलू पर एक कंपनी का निदेशक बनने के लगे आरोपों की जांच को अनुशासनिक समिति बनाने का निर्णय लिया गया।। लैपटॉप खरीद मामले में दर्ज होगी रिपोर्ट केजीएमयू में वर्ष 2015 में ऑनलाइन परीक्षा के लिए लाखों के लैपटॉप खरीदे गए थे। कुछ समय बाद खरीद संबंधी दस्तावेज गायब हो गए। खरीद में धांधली की आशंका को देखते हुए कार्य परिषद ने मामले में रिपोर्ट दर्ज कराने का फैसला लिया। समूह ‘ग’ भर्ती मामला टलने से हलचल केजीएमयू में वर्ष 2004-05 में समूह ‘ग’ के तहत टेलीफोन ऑपरेटर, लिपिक, स्टोर कीपर, ड्राइवर सहित विभिन्न पदों पर नियुक्ति हुई थी। मामले में तत्कालीन कमिश्नर 2012 में दी गई रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर मनमानी की बात कही थी। यह मामला कोर्ट में है। इस दौरान कोर्ट ने केजीएमयू प्रशासन को नोटिस जारी किया था। इस पर केजीएमयू प्रशासन ने पहले चयन कमेटी के सदस्यों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण लिया। फिर इसका मूल्यांकन करने को उप समिति गठित की। इस तरह एक के बाद एक कमेटियों के जरिये मामले को लंबित रखा गया। कार्यपरिषद की बैठक के एजेंडे में यह मामला रखा गया। उप समिति ने चयन कमेटी के सदस्यों को क्लीन चिट देने जैसा मसौदा तैयार कर लिया था। सूत्र बताते हैं कि बैठक में चयन कमेटी के सदस्यों को क्लीन चिट देने की तैयारी थी, लेकिन मामले के तूल पकड़ने से कार्यपरिषद ने पुनर्मूल्यांकन की बात कहते हुए मसले को टाल दिया। कार्यपरिषद ने माना कि जांच रिपोर्ट में कई बिंदुओं पर प्रकाश नहीं डाला गया है। इसलिए इसकी तथ्यपरक आख्या प्राप्त कर पेश की जाए। यह भी हुआ फैसला तय किया गया कि विश्वविद्यालय की स्थापना से लेकर जनवरी 2020 तक लिए नीतिगत निर्णयों की किताब प्रकाशित होगी। केजीएमयू को कोराना की रोकथाम के लिए मेंटरिंग इंस्टीट्यूट घोषित और कोविड 19 टेस्टिंग के लिए किट के वेलिडेशन के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस घोषित किए जाने की सराहना की गई। ओपीडी चलाने के लिए गाइडलाइन तैयार करने का भी फैसला हुआ। क्या कहते हैं डॉक्टर मुझ पर जांच बैठाकर ब्लैकमेल करने का षड्यंत्र रचा गया था। इससे जुड़े मेरे फोन में कई मेसेज हैं। मनमानी तरीके से मेरे खिलाफ फैसला लिया गया है। इस फैसले के खिलाफ कोर्ट जाऊंगी। डॉ नीतू सिंहए सीएफ आर   जिस संस्था की शिकायत पर जांच कमेटी बनाई गई, वह फर्जी है। इसका सबूत दिया जा चुका है। पहले भी इसी मामले में केजीएमयू प्रशासन ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए कोर्ट के नियमों की अवहेलना करते हुए निलंबित किया था, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था। अब सारे नियम ताक पर रखते हुए यह कार्रवाई की गई। मुझे कोर्ट पर भरोसा है और इस फैसले के खिलाफ विधिक राय लेने के बाद अगली कार्रवाई करूंगा। डॉ. आशीष वाखलू, पीडियाट्रिक सर्जरी
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