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सड़क सुरक्षा सप्ताह: सड़क हादसों में हर रोज 51 लोग गंवा रहे हैं जान, सिर्फ बुधवार को मानते हैं कानून

Wed, 25 Apr 2018 01:35 AM IST
सैयद यासिर रजा/अमर उजाला, लखनऊ
सैयद यासिर रजा/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 25 Apr 2018 01:35 AM IST
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deaths because of accidents in uttar pradesh.

उत्तर प्रदेश में लाख कवायदों के बाद भी सड़क हादसों में होने वाली मौतों की संख्या कम नहीं हो रही है। आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2015 में जहां रोज 13 लोगों की हत्याएं हुईं वहीं, सड़क हादसों में 51 लोगों ने अपनी जान गंवाई। हालांकि सरकार की तरफ से सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत गोष्ठियां और रैली जैसे जनजागरूकता अभियान चलाएं जाते हैं पर कुछ दिन बाद सबकुछ पहले जैसा ही हो जाता है।

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राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की वेबसाइट के मुताबिक अपनी या सामने वाली की लापरवाही से हर 28वें मिनट में एक व्यक्ति की मौत हो रही है। वहीं, रंजिश से जाने वाली जान इसके मुकाबले कहीं कम हैं।
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बुधवार को ही करते नियमों की परवाह
प्रदेश में सरकार बदलने के साथ ही अधिकारियों ने अपने हिसाब से नियम कानून भी लागू किए। कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसों में कमी लाने के अधिकारियों को निर्देश दिए थे। इसके बाद सीट बेल्ट और बाइक पर पीछे वाली सवारी के लिए हेलमेट लगाना अनिवार्य करने जैसे निर्देश दिए गए थे।
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वहीं, सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत गृह विभाग और पुलिस ने मिलकर हफ्ते में एक दिन बुधवार को अभियान चलाने का निर्णय लिया। नतीजा यह हुआ कि पुलिस के डर से ट्रैफिक नियमों का पालन करने वालों ने बाकी दिनों में हेल्मेट लगाना और सीट बेल्ट बांधना छोड़ दिया।

कई विभाग नहीं निभा रहे जिम्मेदारी

deaths because of accidents in uttar pradesh.

सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत लोगों को जागरूक करने के लिए कई विभागों को जिम्मेदारी दी गई है। इसमें परिवहन विभाग, लोक निर्माण विभाग, नगर निगम और जिला पंचायत की भी जिम्मेदारियां कम नहीं हैं। हादसों के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार ओवरलोड ट्रक हैं। दूसरे नंबर पर खस्ताहाल सड़कें हैं। शहरी क्षेत्रों में डिवाइडर, कट, चौराहों पर खराब सिग्नल है। हालांकि हादसों के लिए सबसे अधिक दोष पुलिस पर ही मढ़ा जाता है।

हम आप भी हैं जिम्मेदार
जाम और ऊबड़खाबड़ रास्ते से मुक्ति के लिए लोग लखनऊ आगरा एक्सप्रेस-वे पर रेस लगाते हैं। कोई दो घंटे में आगरा तो कोई चार घंटे में दिल्ली पहुंचने का रिकॉर्ड बना रहा है। यही रफ्तार लोगों के लिए जानलेवा भी साबित हो रही है। लखनऊ से आगरा के बीच 302 किलोमीटर के एक्सप्रेस-वे पर अब तक 125 से अधिक लोगों की जानें जा चुकी हैं। एक आरटीआई के मुताबिक पिछले 6 महीने में ही इस एक्सप्रेस-वे पर 688 हादसों में 90 लोगों की जान गई।

वर्ष--हादसे--हादसे में मौत--हत्या
2012--25609--15109--4966
2013--25975--15630--5047
2014--26064--16284--5150
2015--28095--18407--4732

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