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लोहिया संस्थान में होना था भर्ती, पहुंच गया निजी अस्पताल
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बेड उपलब्ध नहीं होने पर लोहिया संस्थान की इमरजेंसी से जिन मरीजों को दूसरे सरकारी अस्पतालों में रेफर किया जाता है, दलाल उन्हें निजी अस्पताल पहुंचा देते हैं। ऐसे में कई मरीजों को जान तक गंवानी पड़ती है। गुरुवार देर रात गंभीर हालत में आए बुजुर्ग को सांस लेने में तकलीफ थी। डॉक्टरों ने आईसीयू में बेड खाली न होने का हवाला देकर केजीएमयू ले जाने की सलाह दी। इमरजेंसी गेट पर मौजूद निजी अस्पताल के दलाल बेहतर इलाज का झांसा देकर मरीज को अपने अस्पताल ले गए। वहां पर इलाज दौरान मरीज ने दम तोड़ दिया।
इंदिरानगर निवासी विजय (68) को सांस लेने में तकलीफ थी। परिजन रात करीब 12 बजे उन्हें लोहिया संस्थान की इमरजेंसी में लाए। वहां मौजूद रेजीडेंट डॉक्टरों ने आईसीयू की जरूरत बताई। मगर आईसीयू में बेड खाली न होने की बात कहकर केजीएमयू ले जाने की सलाह दी। इमरजेंसी के गेट पर मौजूद निजी अस्पताल के संचालकों ने उन्हें घेर लिया। निजी अस्पताल में सभी सुविधाएं होेेने का दावा करके साथ ले गए। वहां पर मरीज को आईसीयू में शिफ्ट किया गया। मरीज ने कुछ देर बाद ही दम तोड़ दिया। परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाया है।
जूनियर डॉक्टर व निजी अस्पतालों का सिंडिकेट
लोहिया संस्थान की इमरजेंसी में कार्यरत कुछ जूनियर डॉक्टर व कर्मचारियों का निजी अस्पतालों संग सिडिकेट बना हुआ है। अस्पताल में देर रात आने वाले मरीजों को यहां पर बेड फुल बताकर उन्हें अपने परिचित अस्पताल ले जाने की सलाह दी जाती है। इस खेल में एक पुलिसकर्मी के भी शामिल होने का आरोप लगा है।
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मरीजों को निजी अस्पतालों में शिफ्ट कराने में पहले कुछ रेजीडेंट व कर्मचारियों के नाम सामने आए थे। पूरी टीम को वहां से हटाया जा चुका है। इसके बाद भी यह खेल अभी चल रहा है तो मामले की जांच कराकर सख्त कार्रवाई होगी।
- डॉ. विक्रम सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, लोहिया संस्थान
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इंदिरानगर निवासी विजय (68) को सांस लेने में तकलीफ थी। परिजन रात करीब 12 बजे उन्हें लोहिया संस्थान की इमरजेंसी में लाए। वहां मौजूद रेजीडेंट डॉक्टरों ने आईसीयू की जरूरत बताई। मगर आईसीयू में बेड खाली न होने की बात कहकर केजीएमयू ले जाने की सलाह दी। इमरजेंसी के गेट पर मौजूद निजी अस्पताल के संचालकों ने उन्हें घेर लिया। निजी अस्पताल में सभी सुविधाएं होेेने का दावा करके साथ ले गए। वहां पर मरीज को आईसीयू में शिफ्ट किया गया। मरीज ने कुछ देर बाद ही दम तोड़ दिया। परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाया है।
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जूनियर डॉक्टर व निजी अस्पतालों का सिंडिकेट
लोहिया संस्थान की इमरजेंसी में कार्यरत कुछ जूनियर डॉक्टर व कर्मचारियों का निजी अस्पतालों संग सिडिकेट बना हुआ है। अस्पताल में देर रात आने वाले मरीजों को यहां पर बेड फुल बताकर उन्हें अपने परिचित अस्पताल ले जाने की सलाह दी जाती है। इस खेल में एक पुलिसकर्मी के भी शामिल होने का आरोप लगा है।
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मरीजों को निजी अस्पतालों में शिफ्ट कराने में पहले कुछ रेजीडेंट व कर्मचारियों के नाम सामने आए थे। पूरी टीम को वहां से हटाया जा चुका है। इसके बाद भी यह खेल अभी चल रहा है तो मामले की जांच कराकर सख्त कार्रवाई होगी।
- डॉ. विक्रम सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, लोहिया संस्थान