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पूर्व मंत्री अरविंद सिंह गोप के खिलाफ मुकदमे में फैसला 10 को
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लखनऊ। लविवि छात्रसंघ चुनाव के दौरान दो गुटों में गोलाबारी, जानलेवा हमला और बलवा करने के 26 साल पुराने मामले में आरोपी पूर्व मंत्री अरविंद सिंह गोप सहित 12 लोगों के विरुद्ध चल रही बहस पूरी हो गई। एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश पवन कुमार राय 10 नवम्बर को अपना फैसला सुनाएंगे ।
पत्रावली के अनुसार, हसनगंज के दरोगा बीएस सिंह ने 21 फरवरी 1994 को मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई थी जिसमें कहा गया था कि लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव होने वाले थे जिसमें छात्रसंघ महामंत्री ओंकार भारती बाबा और अरविंद सिंह गोप अध्यक्ष पद के लिए प्रचार कर रहे थे। इसी प्रचार की रंजिश को लेकर 21 फरवरी को दिन में ओंकार भारती और अरविंद सिंह गोप के समर्थक छात्र हथियारों से लैस होकर कैशियर ऑफिस के सामने आपस में भिड़ गए। गाली-गलौज, मारपीट करते हुए एक-दूसरे पर गोलियां और बम चलाना शुरू कर दिया।
गोली और बम की आवाज सुनकर पुलिस पहुंच गई और मौके से ओंकार भारती और मेराज को कारतूसों के साथ गिरफ्तार किया गया। वहीं अरविंद सिंह गोप को भी गिरफ्तार किया गया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान ही छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष और आरोपी ओंकार भारती की मृत्यु हो गई थी। अन्य आरोपी पूर्व मंत्री अरविंद सिंह गोप, मेराज अहमद, मनोज सिंह, प्रद्युम्न वर्मा, विवेकानंद, शैलेंद्र सिंह, विष्णुकांत पांडे, मुकेश शुक्ला, जितेंद्र मिश्र, राजीव कुमार सिंह, धीरेंद्र सिंह और रमेश सिंह के विरुद्ध मुकदमे का विचारण विशेष अदालत द्वारा किया गया।
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धोखाधड़ी मामले की रिपोर्ट मांगी
लखनऊ। मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना के तहत स्वीकृत ऋण देने की जगह अपने बैंक से अधिक ब्याज का ऋण स्वीकृत कर धोखाधड़ी करने के आरोपों को लेकर आर्यावर्त ग्रामीण बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक मनोज कक्कड़ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराए जाने की मांग वाली अर्जी पर सीजेएम रवि गुप्ता ने 20 नवंबर को रिपोर्ट मांगी है।
कोर्ट में रिपोर्ट दर्ज कराए जाने की मांग वाली अर्जी देकर मीतू रस्तोगी ने बताया कि उसने आर्यावर्त ग्रामीण बैंक की विकास नगर शाखा में मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना के अंतर्गत ऋण का आवेदन किया था। नौ लाख 50 हजार का ऋण स्वीकृत हुआ। आरोप है कि शाखा प्रबंधक मनोज कक्कड़ ने योजना के अंतर्गत ऋण न देकर अपने बैंक से अधिक ब्याज पर ऋण देकर वादिनी के साथ धोखाधड़ी की। अगली सुनवाई 20 नवंबर को होगी।
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पत्रावली के अनुसार, हसनगंज के दरोगा बीएस सिंह ने 21 फरवरी 1994 को मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई थी जिसमें कहा गया था कि लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव होने वाले थे जिसमें छात्रसंघ महामंत्री ओंकार भारती बाबा और अरविंद सिंह गोप अध्यक्ष पद के लिए प्रचार कर रहे थे। इसी प्रचार की रंजिश को लेकर 21 फरवरी को दिन में ओंकार भारती और अरविंद सिंह गोप के समर्थक छात्र हथियारों से लैस होकर कैशियर ऑफिस के सामने आपस में भिड़ गए। गाली-गलौज, मारपीट करते हुए एक-दूसरे पर गोलियां और बम चलाना शुरू कर दिया।
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गोली और बम की आवाज सुनकर पुलिस पहुंच गई और मौके से ओंकार भारती और मेराज को कारतूसों के साथ गिरफ्तार किया गया। वहीं अरविंद सिंह गोप को भी गिरफ्तार किया गया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान ही छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष और आरोपी ओंकार भारती की मृत्यु हो गई थी। अन्य आरोपी पूर्व मंत्री अरविंद सिंह गोप, मेराज अहमद, मनोज सिंह, प्रद्युम्न वर्मा, विवेकानंद, शैलेंद्र सिंह, विष्णुकांत पांडे, मुकेश शुक्ला, जितेंद्र मिश्र, राजीव कुमार सिंह, धीरेंद्र सिंह और रमेश सिंह के विरुद्ध मुकदमे का विचारण विशेष अदालत द्वारा किया गया।
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धोखाधड़ी मामले की रिपोर्ट मांगी
लखनऊ। मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना के तहत स्वीकृत ऋण देने की जगह अपने बैंक से अधिक ब्याज का ऋण स्वीकृत कर धोखाधड़ी करने के आरोपों को लेकर आर्यावर्त ग्रामीण बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक मनोज कक्कड़ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराए जाने की मांग वाली अर्जी पर सीजेएम रवि गुप्ता ने 20 नवंबर को रिपोर्ट मांगी है।
कोर्ट में रिपोर्ट दर्ज कराए जाने की मांग वाली अर्जी देकर मीतू रस्तोगी ने बताया कि उसने आर्यावर्त ग्रामीण बैंक की विकास नगर शाखा में मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना के अंतर्गत ऋण का आवेदन किया था। नौ लाख 50 हजार का ऋण स्वीकृत हुआ। आरोप है कि शाखा प्रबंधक मनोज कक्कड़ ने योजना के अंतर्गत ऋण न देकर अपने बैंक से अधिक ब्याज पर ऋण देकर वादिनी के साथ धोखाधड़ी की। अगली सुनवाई 20 नवंबर को होगी।