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खीरी का प्रभात गुप्ता हत्याकांड : टेनी की जमानत निरस्त करने की अर्जी पर सुनवाई 17 अक्तूबर को
Tue, 27 Sep 2022 07:38 PM IST
ishwar ashish
विधि संवाददाता, अमर उजाला, लखनऊ
विधि संवाददाता, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Tue, 27 Sep 2022 07:38 PM IST
सार
न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रेनू अग्रवाल की खंडपीठ ने मामले में अगली तिथि 17 अक्तूबर नियत करते हुए स्पष्ट किया कि उस रोज एसएलपी के मात्र लंबित रहने के आधार पर सुनवाई को टाला नहीं जाएगा। सुनवाई के दौरान मंत्री व वादी के अधिवक्ताओं के बीच कई बार तीखी नोक-झोंक की स्थिति भी उत्पन्न हुई।
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गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा उर्फ टेनी को हत्या के एक मामले में मिली जमानत निरस्त करने की गुजारिश वाली अर्जी पर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में सुनवाई टल गई। अर्जी पर अब 17 अक्तूबर को अगली सुनवाई होगी। मंगलवार को टेनी के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि वर्तमान अपील के स्थानांतरण सम्बंधी उनकी विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुप्रीम कोर्ट में चार सप्ताह में सुनवाई हो सकती है लिहाजा मामले में आगे तारीख लगा दी जाए। मंत्री की तरफ से सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी पर सुनवाई के बाद ही राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई की गुजारिश की गई। उधर, मामले के वादी पक्ष की ओर से इसका विरोध किया गया।
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न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रेनू अग्रवाल की खंडपीठ ने मामले में अगली तिथि 17 अक्तूबर नियत करते हुए स्पष्ट किया कि उस रोज एसएलपी के मात्र लंबित रहने के आधार पर सुनवाई को टाला नहीं जाएगा। सुनवाई के दौरान मंत्री व वादी के अधिवक्ताओं के बीच कई बार तीखी नोक-झोंक की स्थिति भी उत्पन्न हुई। अर्जी में कहा गया कि अजय मिश्रा उर्फ टेनी को दोषमुक्त करने के निर्णय के खिलाफ दाखिल राज्य सरकार की अपील की सुनवाई में उनकी ओर से सहयोग नहीं किया जा रहा है। ऐसे में उनके बांड को निरस्त किया जाए।
गौरतलब है कि लखीमपुर खीरी के तिकुनिया थाना क्षेत्र में वर्ष 2000 में एक युवक प्रभात गुप्ता की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अन्य अभियुक्तों के साथ-साथ अजय मिश्रा उर्फ टेनी भी नामजद थे। मामले के विचारण के पश्चात लखीमपुर खीरी की एक सत्र अदालत ने अजय मिश्रा व अन्य को पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में वर्ष 2004 में बरी कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ वर्ष 2004 में ही राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर दी थी।