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अयोध्या मामले में रोज होगी सुनवाई या बातचीत का रास्ता खुला रहेगा, फैसला दो अगस्त को होगा

Fri, 19 Jul 2019 01:05 AM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला अयोध्या
न्यूज डेस्क, अमर उजाला अयोध्या Published by: Amulya Rastogi Updated Fri, 19 Jul 2019 01:05 AM IST
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daily hearing in ayodhaya case or arbitration open, decision will be taken on 2 august
अयोध्या मामला - फोटो : amar ujala
अयोध्या मामले की सुनवाई में हो रही देरी और मध्यस्थता पैनल से हल होने की उम्मीद खो चुके पक्षकार अब सुप्रीम कोर्ट से अंतिम फैसला चाहते हैं। उन्हें बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट के रुख से नियमित सुनवाई की उम्मीद बंधी है। पक्षकार व संत-धर्माचार्यों का कहना है कि हमें अब तारीख पर तारीख नहीं परिणाम चाहिए। 
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रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में रोजाना सुनवाई होगी या फिर बातचीत का रास्ता खुला रहेगा इसका फैसला अब दो अगस्त को सुप्रीम कोर्ट करेगा। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सुलह-समझौते की कोशिश में लगी मध्यस्थता कमेटी को 31 जुलाई तक फाइनल रिपोर्ट जमा करने की मोहलत दी है। 
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पक्षकारों ने कहा कि मामले को अब और लटकाना नहीं चाहिए, इसलिए कोर्ट तारीख देने के बजाय नियमित सुनवाई शुरू कर मामले का जल्द समाधान करे। वहीं संतों का भी कहना है कि अब तारीख नहीं बल्कि रामलला को न्याय चाहिए उन्हें उम्मीद है कि दो अगस्त से नियमित सुनवाई का क्रम शुरू हो जाएगा।
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सुलह-समझौते से हल हो मामला तो बेहतर : धर्मदास

हिंदू पक्षकार महंत धर्मदास ने कहा कि नियमित सुनवाई को प्रमुखता देनी चाहिए हालांकि उन्हें सुलह-समझौते से भी मामले के समाधान की उम्मीद है। वे कहते हैं कि पैनल अपना काम ठीक ढंग से कर रहा है सुलह-समझौते से मामला हल हो जाए तो बेहतर है। उन्होंने कहा कि अब इस मामले में और देरी न की जाए।

हमें तारीख नहीं परिणाम चाहिए: आचार्य सत्येंद्र दास
रामजन्मभूमि के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि हमें तारीख नहीं परिणाम चाहिए। तारीख पर तारीख कब तक पड़ती रहेगी। प्रतिदिन सुनवाई की घोषणाएं तो कई बार हुईं लेकिन ऐसा हुआ नहीं, जिससे हमें निराशा हैं। रामलला को अब न्याय की दरकार है, सुप्रीम कोर्ट को इस दिशा में ही कदम बढ़ाना चाहिए।

कोर्ट पर लगी हैं हिंदू समाज की निगाहें : विहिप
विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा का कहना है कि अदालत द्वारा मामले में तारीख पर तारीख देने से विरोधी षडयंत्र करने में सक्रिय हो जाते हैं। हिंदू समाज की निगाहें कोर्ट के हर डेट पर लगी हुई हैं। ऐसे में अदालत को तारीख देने के बजाय शीघ्र इस मामले पर कोई न कोई निर्णय करना चाहिए।

सुबूतों के आधार पर हो निर्णय : इकबाल

मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी का कहना है कि मामले में 25 पक्षकार हैं, इसलिए लंबा समय लग रहा है। पैनल का काम अभी पूरा नहीं हुआ, लोगों ने आपत्ति शुरू कर दी, आपत्ति करने वाले मामले में पक्षकार भी नहीं हैं। कहा कि यह हिंदुस्तान का अहम फैसला है, सुबूतों के आधार पर जो भी निर्णय होगा उसे मानेंगे।

मामले का जल्द होना चाहिए समाधान: हाजी महबूब
मुस्लिम पक्षकार हाजी महबूब ने कहा कि मामले की लड़ाई लड़ते हुए लंबा अरसा बीत गया है, हम चाहते हैं कि अब शीघ्र ही मामले का जल्द समाधान हो जाए। उन्होंने कहा कि कोर्ट का ताजा रुख सराहनीय है पूरी उम्मीद है कि आगामी दो अगस्त से नियमित सुनवाई शुरू होगी और जल्द निर्णय भी आएगा।

मामले की प्रोसीडिंग में लगेगा वक्त

हेलाल कमेटी के संयोजक व पक्षकार मोहम्मद खालिक अहमद का कहना है कि मामले चूंकि कई पेचिदगियां हैं इसलिए इसकी प्रोसीडिंग में अभी समय लग सकता है। कहा कि अगर दो अगस्त से प्रतिदिन सुनवाई शुरू हो जाती है तो इससे अच्छा क्या है। उन्होंने कहा कि अब यह तो दो अगस्त को ही पता चल पाएगा।

नियमित सुनवाई कर जल्द निर्णय दे सुप्रीम कोर्ट
सुलह समझौते से यदि मामला हल हो जाए तो अच्छा है क्योंकि, कोर्ट से किसी एक के पक्ष में निर्णय आएगा जिससे नफरत की दीवार खड़ी होगी। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट को नियमित सुनवाई की प्रक्रिया जल्द शुरू कर मामले का अतिशीघ्र समाधान करना चाहिए हम सभी अब न्याय चाहते हैं।
दिनेंद्र दास, निर्मोही अखाड़ा के महंत व पक्षकार 
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