कच्छा-बनियान गिरोह का धावा, 10 लाख के जेवर लूटे
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बंथरा के आदर्श गांव बेती में बुधवार देर रात कच्छा-बनियान गिरोह के डकैतों ने एलडीए के बाबू यशोदा नंद मिश्रा और किसान रामलाल धोबी के घर पर धावा बोलकर 10 लाख रुपये के सोने-चांदी के जेवर और 50 हजार नकद लूट लिए।
डकैतों ने किसान को बंधक बनाकर पीटा। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वारदात में छह डकैत शामिल थे।
रामलाल ने बताया कि रात करीब सवा बजे उसकी आंख खुली थी। मकान के पिछले दरवाजे पर टॉर्च की रोशनी डाली तो वह खुला दिखा। दरवाजे के बाहर उसकी भैंस बंधी रहती है।
गड़बड़ी की आशंका पर उसने दरवाजे के पास जाकर दूसरी तरफ झांका तो भैंस बंधी नजर आई। इस बीच रामलाल को कुछ आहट सुनाई पड़ी। उसने टॉर्च की रोशनी में इधर-उधर देखना शुरू किया तो पीछे से किसी ने सिर पर डंडा मार दिया।
इससे पहले रामलाल चीख-पुकार मचाता, डकैत उसे दबोचकर भीतर लाए और बंधक बनाकर आलमारी की चाबियां मांगी। विरोध पर उसे लाठी-डंडे से जमकर पीटा। किसान से चाबियां लेकर बदमाशों ने आलमारी और बक्से खंगाल डाले।
आलमारी में रखे करीब पांच लाख रुपये के सोने-चांदी के जेवर और 40 हजार नकद निकाल लिए। रामलाल का कहना है कि अंधेरे में उसने पांच से छह डकैतों को देखा था।
इलाके के कई मकानों का किया था चिह्नित
इस बीच किसान की चीखें सुनकर परिवारीजनों की नींद खुल गई। बेटे नीरज और धीरज ने कमरे से बाहर निकलने की कोशिश की तो पता चला कि डकैतों ने दरवाजे की कुंडी बंद कर रखी है।
बेटों ने शोर मचाया तो पड़ोस में रहने वाले रामलाल के भाई धुन्नीलाल और जगदीश सहित अन्य ग्रामीण दौड़े। धुन्नीलाल ने एक डकैत को दबोच भी लिया। हालांकि, धक्का-मुक्की करते हुए सभी भाग निकले।
सुबह पुलिस गांव पहुंची तो पता चला कि डकैतों ने एलडीए के बाबू यशोदा नंद मिश्रा को भी निशाना बनाया था। डकैत उनके मकान का पिछला दरवाजा खोलकर भीतर घुसे थे।
परिवार के सभी सदस्य सो रहे थे इसलिए डकैतों को मारपीट की जरूरत नहीं पड़ी। सुबह करीब पांच बजे यशोदा नंद की पत्नी कांति की नींद खुली तब वारदात का पता चला। यशोदा नंद ने बताया कि उनके पांच लाख रुपये के सोने-चांदी के जेवर और 10 हजार रुपये चोरी हुए हैं।
रामलाल ने बताया कि डकैत छत फांदकर भीतर घुसे थे। उन्होंने सभी कमरों के दरवाजे की बाहर से कुंडी लगा दी। चूंकि, रामलाल की नींद खुल गई थी। इसलिए डकैतों ने उसे दबोचकर बंधक बना लिया। डकैत कच्छा-बनियान पहने थे और हाथों में डंडे लिए थे।
डकैतों ने वारदात के लिए इलाके के कई मकानों का चिह्नित किया था। सुबह जब पुलिस ने इलाके का मुआयना किया तो रामलाल के पड़ोस में रहने वाले चचेरे भाई जगदीश और भतीजे दिलीप के मकान के बाहर इंटरलॉकिंग की दो-दो टाइल्स रखी मिलीं।
पुलिस के उड़ गए होश
रामलाल और यशोदा नंद के मकान के बाहर भी दो-दो टाइल्स रखी थीं। ग्रामीणों का मानना है कि डकैत मकान चिह्नित करके वारदात करने आए थे। डकैती की वारदात की सूचना पाकर पुलिस के होश उड़ गए।
मौके पर पहुंची पुलिस इसे चोरी बताकर मामला हलका करने में जुट गई। रामलाल और उसके परिवारीजनों को समझाकर मनचाही तहरीर भी लिखवा ली। रामलाल इतनी दहशत में था कि जैसा पुलिस कहती रही, वैसा ही किया।
ग्रामीणों का कहना है कि डकैत शंभू रावत गैंग के गुर्गें हैं। शंभू और उसके दो बेटों को पुलिस ने 19 अक्तूबर को गिरफ्तार किया था। इस गिरोह के सात बदमाश अब भी फरार हैं।
इससे पहले 20 अक्तूबर को काकोरी के दशहरी गांव में किसान राजाराम को बंधक बनाकर डकैती की वारदात में भी इसी गिरोह के फरार डकैतों का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है।