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पीएम मोदी की सुकन्या समृद्धि योजना से मुंह मोड़ रहे हैं ग्राहक, जानें क्या है वजह..
amarujala.com, written by नीरज ‘अम्बुज’
Updated Fri, 14 Jul 2017 03:15 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बेटियों के लिए महत्वाकांक्षा सुकन्या समृद्धि योजना में दिनोंदिन ग्राहकों का मोह भंग हो रहा है। इसके कारण लखनऊ के जीपीओ में प्रतिमाह ढाई सौ से तीन सौ खाते खोलने वाले डाककर्मियों को अब 60 खाते प्रतिमाह खोलने में छींके आ रही हैं।
इसके पीछे लगातार ब्याज दरों का घटना बताया जा रहा है। क्योंकि शुरुआत में मिलने वाला 9.2 प्रतिशत ब्याज घटते हुए 8.3 परसेंट पहुंच गया है। यही हाल अन्य योजनाओं की भी है।
जीपीओ के अधिकारी के मुताबिक डाकघर की मासिक निवेश योजना, फिक्स डिपॉजिट, आरडी, किसान विकास पत्र समेत सभी योजनाओं में ग्राहकों की संख्या पांच गुना तक घट गई है।
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मसलन, 70 प्रतिशत तक उपभोक्ता डाकघरों की निवेश स्कीमों में पैसा लगाने से कतरा रहे हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि केंद्र सरकार एक ओर डाकघरों को बैंकों के समानांतर खड़ा करने के दावे कर रही है वहीं, डाकघरों में ब्याज दरें कम कर ग्राहकों को नाराज भी कर रही है।
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इसके पीछे लगातार ब्याज दरों का घटना बताया जा रहा है। क्योंकि शुरुआत में मिलने वाला 9.2 प्रतिशत ब्याज घटते हुए 8.3 परसेंट पहुंच गया है। यही हाल अन्य योजनाओं की भी है।
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जीपीओ के अधिकारी के मुताबिक डाकघर की मासिक निवेश योजना, फिक्स डिपॉजिट, आरडी, किसान विकास पत्र समेत सभी योजनाओं में ग्राहकों की संख्या पांच गुना तक घट गई है।
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मसलन, 70 प्रतिशत तक उपभोक्ता डाकघरों की निवेश स्कीमों में पैसा लगाने से कतरा रहे हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि केंद्र सरकार एक ओर डाकघरों को बैंकों के समानांतर खड़ा करने के दावे कर रही है वहीं, डाकघरों में ब्याज दरें कम कर ग्राहकों को नाराज भी कर रही है।
जीएसटी के बाद भी घटी ब्याज दरें
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निवेश की स्कीमों में एक से डेढ़ प्रतिशत तक की कटौती हुई है। इससे स्कीमों में ग्राहकों की संख्या कम हो रही है। बता दें कि उत्तर प्रदेश परिमंडल के लखनऊ सर्किल में कुल 127 डाकघर हैं।
जिसमें जीपीओ व चौक दो प्रमुख डाकघर हैं और कमोबेश हर डाकघर में उपभोक्ता ऐसे ही घट रहे हैं। जीपीओ के चीफ पोस्टमास्टर आरके प्रसाद बताते हैं कि डाकघरों में जो भी धनराशि उपभोक्ता निवेश करते हैं, उसका 80 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकारों को विकास की योजनाओं के लिए ऋण के तौर पर दिया जाता है।
ब्याज दरें केंद्र सरकार तय करती है, इसलिए जो भी वर्तमान दरें हैं, उसके तहत अधिक से अधिक ग्राहकों को जीपीओ से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
अधिकारी बताते हैं कि गत वर्ष की स्कीमों में ब्याज दरें जहां 7.4 से 8.6 प्रतिशत तक थीं। वहीं इस समय दरें 6.8 से 7.1 प्रतिशत तक हैं। कई योजनाओं में डेढ़ प्रतिशत तक ब्याज घटा है।
जिसमें जीपीओ व चौक दो प्रमुख डाकघर हैं और कमोबेश हर डाकघर में उपभोक्ता ऐसे ही घट रहे हैं। जीपीओ के चीफ पोस्टमास्टर आरके प्रसाद बताते हैं कि डाकघरों में जो भी धनराशि उपभोक्ता निवेश करते हैं, उसका 80 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकारों को विकास की योजनाओं के लिए ऋण के तौर पर दिया जाता है।
ब्याज दरें केंद्र सरकार तय करती है, इसलिए जो भी वर्तमान दरें हैं, उसके तहत अधिक से अधिक ग्राहकों को जीपीओ से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
अधिकारी बताते हैं कि गत वर्ष की स्कीमों में ब्याज दरें जहां 7.4 से 8.6 प्रतिशत तक थीं। वहीं इस समय दरें 6.8 से 7.1 प्रतिशत तक हैं। कई योजनाओं में डेढ़ प्रतिशत तक ब्याज घटा है।
एमआईएस की हालत बदतर
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- फोटो : demo pic
पहली जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद दरों में दशमलव एक प्रतिशत कमी आई है। हालांकि, यह मामूली कमी है, लेकिन उपभोक्ताओं को डर है कि अभी यह दरें और कम होंगी।
मंथली इनवेंस्टमेंट स्कीम यानी एमआईएस की हालत डाकघरों में सबसे बदतर है। मसलन, जीपीओ के अधिकारियों ने बताया कि एमआईएस में रोज 30 एकाउंट बंद हो रहे हैं, जबकि नए खाते सिर्फ पांच ही खुलते हैं। ऐसे में जीपीओ के एमआईएस के दस हजार खातों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
‘ब्याज दरें कम हो रही हैं लेकिन, ग्राहकों की संख्या पर कोई खास असर नहीं है। बैंकों की तुलना में अभी भी डाकघरों पर लोगों का सर्वाधिक भरोसा है। लोग पोस्ट ऑफिस में खाते खुलवाने से लेकर स्कीमों में निवेश कर रहे हैं।’ - राजीव उमराव, निदेशक, डाक सेवाएं(मुख्यालय)
मंथली इनवेंस्टमेंट स्कीम यानी एमआईएस की हालत डाकघरों में सबसे बदतर है। मसलन, जीपीओ के अधिकारियों ने बताया कि एमआईएस में रोज 30 एकाउंट बंद हो रहे हैं, जबकि नए खाते सिर्फ पांच ही खुलते हैं। ऐसे में जीपीओ के एमआईएस के दस हजार खातों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
‘ब्याज दरें कम हो रही हैं लेकिन, ग्राहकों की संख्या पर कोई खास असर नहीं है। बैंकों की तुलना में अभी भी डाकघरों पर लोगों का सर्वाधिक भरोसा है। लोग पोस्ट ऑफिस में खाते खुलवाने से लेकर स्कीमों में निवेश कर रहे हैं।’ - राजीव उमराव, निदेशक, डाक सेवाएं(मुख्यालय)