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यूपी में सब बेकार, जेलों में चलती है 'माफिया सरकार'

Mon, 17 Nov 2014 07:54 PM IST
विवेक त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ
विवेक त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 17 Nov 2014 07:54 PM IST
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criminals spent comfortable life in Jail.

गवाहों को धमकाकर मामला मैनेज करने के आरोप में गोरखपुर जेल से हटाए गए पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी बीमारी का बहाना बनाकर लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहे। पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा भी गाजियाबाद जेल से लखनऊ पीजीआई आ गए जबकि उन्हें अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं थी।

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इसी तरह पूर्व मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी पर हमले के आरोपी बाहुबली विधायक विजय मिश्र बीमारी का बहाना बनाकर नैनी जेल से राजधानी के बलरामपुर अस्पताल में भर्ती रहे थे।
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अंडरवर्ल्ड डॉन बबलू श्रीवास्तव बरेली जेल से गैंग ऑपरेट कर रहा है। कुछ महीने पहले ही उसने दस लाख रुपये में सूरत निवासी एक रियल एस्टेट कारोबारी की हत्या की सुपारी ली। सूरत की क्राइम ब्रांच ने बीते महीने लखनऊ से तीन और फैजाबाद से एक शूटर को गिरफ्तार कर इसका खुलासा किया।
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विरोध किया तो जेलर की हत्या करवा दी
वाराणसी जेल के डिप्टी जेलर अनिल कुमार त्यागी और मेरठ के जेलर नरेंद्र द्विवेदी की जेल में बंद बदमाशों ने ही हत्या करा दी। इन अफसरों ने बदमाशों को जेल के नियम-कानून का पाठ पढ़ाने के साथ ही उन पर सामान्य बंदियों की तरह रहने का दबाव डाला और उनका दबदबा मानने से इन्कार कर दिया। जेल के कानून का पालन कराने की कोशिश में ये अफसर बदमाशों के निशाने पर आ गए थे।

जेल में रहकर देते हैं गिरोह को दिशा-निर्देश

criminals spent comfortable life in Jail.

जेल जिसका नाम सुनकर कभी अपराधी खौफ खाते थे आज वह अपराधियों का आरामगाह बनते जा रहे हैं। जेलों की चारदीवारी के पीछे माफिया और रसूखदारों की ‘सरकार’ चलती है। सारा जेल मैन्युअल रसूख और पैसे के बल पर फेल हो जाता है। एक-दो नहीं, सैकड़ों उदाहरण हैं जो बताते हैं कि अपराधियों का तंत्र जेल में हावी है। यही नहीं जेल से ही गैंग भी ऑपरेट हो रहे हैं। बालू-मौरंग के ठेके, वसूली, फिरौती सब कुछ जेलों से चल रहा है।

कोर्ट के साफ आदेशों के बावजूद अगर वाराणसी सेंट्रल जेल से माफिया ब्रजेश सिंह और पीलीभीत जेल से त्रिभुवन सिंह को कोर्ट के साफ आदेशों के बावजूद पेश नहीं किया जाता तो समझा जा सकता है कि अपराधियों ने किस कदर जेल में अपना नेटवर्क बना लिया है।

जेलों में अपराधी कैसे अपना संगठित गिरोह चला रहे हैं उसका उदाहरण है बरेली जेल में बंद माफिया डॉन बबलू श्रीवास्तव का सूरत के रियल एस्टेट कारोबारी की हत्या की दस लाख रुपये की सुपारी लेना। संगठित अपराध का यह कोई पहला मामला नहीं। ऐसे ढेरों उदाहरण हैं। मैन्युअल कहता है कि जेलों में फोन का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

पर, सितंबर में एसटीएफ ने फर्रुखाबाद से आलू किसान नारद सिंह कश्यप का अपहरण कर एक करोड़ रुपये फिरौती मांगने वाले बदमाशों के मोबाइल फोन से होने वाली बातचीत सुनी तो पता चला कि वे पूर्वांचल की जेल में बंद एक अपराधी से दिशा-निर्देश लेते थे। बिना जेल प्रशासन की मदद के तो यह सब कैसे संभव है?

पैसा फेंकने पर जेल अफसर करते हैं इंतजाम

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जेल में बंद सियासी रसूख रखने वालों के सामने तो सारे नियम-कानून बौने हो जाते हैं। अमरमणि लंबे समय तक बीमारी के बहाने अस्पताल में पडे़ रहे तो बाबू सिंह कुशवाहा भी जेल अफसरों से साठगांठ करके पेशी से बचते रहे। इनको लेकर कोर्ट को फटकार लगानी पड़ी। मुख्तार अंसारी हमेशा से मनचाही जेल में रहा।

जेल में रसूखदार और प्रभावशाली बंदियों को मनमानी के लिए पैसा खर्च करना पड़ता है। जितनी रकम खर्च करो, वैसी सुविधा मिल जाती है। कानपुर के चर्चित ज्योति हत्याकांड में जेल में बंद उसके पति पीयूष व पति की प्रेमिका मनीषा मखीजा के लिए जेल प्रशासन ने तो पलक-पांवड़े बिछा दिए। ऐसे प्रभावशाली बंदियों को जेल प्रशासन जरूरत का हर ऐसा सामान मुहैया कराता है जिसकी जेल मैन्युअल में सख्त मनाही है।

अस्पताल के बेड पर फरमाते हैं आराम
धन-बल के बूते रसूखदार जेल के भीतर कदम रखते ही अस्पताल में दाखिल हो जाते हैं। यहां उपचार के नाम पर इनका दरबार सजता है। न कोई ड्यूटी न सूरज ढलने के पहले बैरकों में बंद होने का डर।

सख्त फर्श की जगह अस्पताल के आरामदायक बेड पर सोते हैं। स्पेशल खाना खाते हैं। रसूखदारों के लिए जेल का अस्पताल सबसे आरामदायक जगह है इसलिए यहां आने के लिए सामान्य बंदी भी मोटी रकम खर्च करने को तैयार रहता है।

कोर्ट की सख्ती पर अपराधी नहीं अफसर परेशान

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बाहुबली मुख्तार अंसारी पर जानलेवा हमला करने के मामले में माफिया सरगना ब्रजेश सिंह और त्रिभुवन सिंह के पेश न होने पर कोर्ट की नाराजगी के बाद एडीजी जेल आरआर भटनागर ने वाराणसी और पीलीभीत जेल प्रशासन से रिपोर्ट तलब की है। दोनों जेल प्रशासन से पूछा गया है कि  इन अपराधियों की कब-कब पेशी थी?

कितनी पेशी पर दोनों को कोर्ट भेजा गया और कितनी में वे नहीं गए? पेशी पर न जाने की वजह क्या बताई गई? वजह के लिए क्या आधार बनाए गए? इन सवालों के अलावा अन्य कई बिंदुओं पर संबंधित जेल के अफसरों से रिपोर्ट मांगी गई है।

एडीजी ने कहा कि रविवार तक वाराणसी और पीलीभीत के जेल अफसर रिपोर्ट सौंप देंगे। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। बाहुबली मुख्तार अंसारी पर जानलेवा हमला करने के मामले में दोनों की विशेष न्यायाधीश (गिरोहबंद अधिनियम) लल्लू सिंह की कोर्ट में शुक्रवार को पेशी थी।

वाराणसी जेल प्रशासन ने ब्रजेश की तो पीलीभीत जेल प्रशासन ने त्रिभुवन की तबीयत खराब होने का मेडिकल सर्टिफिकेट भेज दिया था। कोर्ट ने संबंधित जेल के अधीक्षकों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए महानिदेशक कारागार और प्रमुख सचिव गृह को जांच कराने का आदेश दिया है।

कारागारों के हालात पर एडीजी जेल आरआर भटनागर से बात

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प्रश्न- जेलों में समानांतर व्यवस्था चल रही है?
जवाब- जेल की व्यवस्था मैन्युअल के मुताबिक चलती है। अगर किसी को विशेष सुविधा या ढील दी जा रही है तो उसके वाजिब कारण भी होते हैं। कोई कोर्ट की परमिशन ले आता है तो कोई अस्पताल की रिपोर्ट। बिना कारण किसी बंदी या कैदी से विशेष व्यवहार नहीं किया जाता।

प्रश्न- प्रभावशाली कैदी मनचाही जेल में कैसे रहते हैं?
जवाब- बंदियों-कैदियों की शिफ्टिंग सिर्फ कोर्ट की इजाजत के बाद ही की जाती है। बीते दिनों कुछ ऐसे मामले सामने आए थे जिन पर कार्रवाई की गई है। अन्य मामलों को भी देखा जा रहा है। बिना आधार के शिफ्टिंग करने वालों के बारे में जानकारी की जा रही है।

प्रश्न- जेल में हर सुविधा कैसे मिल जाती है?
जवाब- स्थानीय स्तर पर लोग अपने लिए सुविधाएं हासिल कर लेते होंगे लेकिन ऐसा कोई मामला अगर मेरी जानकारी में आता है तो जांच और कार्रवाई की जाएगी।

प्रश्न- कैसे सुधरेगी व्यवस्था?
जवाब- हम गोपनीय सूचनाओं पर छापे मार रहे हैं। कुछ गड़बड़ मिलता है तो संबंधित अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। इसके साथ ही जेलों में तकनीकी का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। सीसीटीवी कैमरे लगने के बाद व्यवस्था में काफी सुधार आएगा।

पूरा सरकारी तंत्र इनके आगे मजबूर

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बदमाशों की आरामगाह बन चुकी यूपी की जेलों में जेल अफसरों की कम बदमाशों की ज्यादा चलती है। ब्रजेश सिंह, मुख्तार अंसारी, त्रिभुवन सिंह, मुन्ना बजरंगी, उदयभान सिंह, रमेश काका जैसे बदमाश मुकदमे से बरी होने की स्थिति में ही वह पेशी पर पहुंचते हैं।

इन पर न तो जेल और न ही पुलिस प्रशासन की चलती है। मुकदमे में अगर सजा होनी है या फिर फिर प्रतिद्वंद्वी गवाह देने को तैयार है तो बदमाश पेशी पर नहीं आते। पूरा सरकारी तंत्र इन बदमाशों के आगे मजबूर है।

सेंट्रल जेल वाराणसी में बंद बृजेश सिंह का करोड़ों रुपये का काला कारोबार है। जेल में रहते वह कारोबार और गैंग चला रहा है। उसे जेल में बाहर का खाना से लेकर तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती है। कारोबारी और सफेदपोश पूरे दिन उससे मिलने पहुंचते हैं। उसका दाहिना हाथ माने जाने वाला गाजीपुर निवासी त्रिभुवन सिंह पीलीभीत जेल में बंद है।

वाराणसी में पेशी के दौरान अक्सर दोनों मिलते हैं। सूबे में फतेहगढ़ और सुल्तानपुर जेल अपराधियों की आरामगाह मानी जाती है। वाराणसी के रहने वाले सुभाष ठाकुर भदोही के उदयभान सिंह उर्फ डाक्टर फ तेहगढ़ जेल में बंद हैं।

पेशी के पहले अस्पताल में हो जाते हैं भर्ती

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अमूमन देखा जाता है कि वाराणसी में पेशी के दो दिन पहले यह बीएचयू अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती हो जाते हैं। अस्पताल में पंचायत के बाद दोनों फतेहगढ़ चले जाते हैं। जौनपुर निवासी मुन्ना बजरंगी सुल्तानपुर जेल में बंद  है।

पुलिस सूत्रों की मानें तो पूर्वांचल में सबसे ज्यादा शूटर बजरंगी के ही पास है। बजरंगी जेल से ही गैंग चलाता है। मुख्तार अंसारी का करीबी माने जाने वाला हनुमान पांडेय भी सुल्तानपुर जेल में बंद है। गाजीपुर निवासी मुख्तार अंसारी आगरा जेल में बंद हैं। वाराणसी और गाजीपुर में पेशी के  लिए वह अक्सर वातानुकूलित एंबुलेंस में ही आते हैं। सरकार चाहे जिसकी हो मुख्तार का सिक्का हमेशा चलता है।

वाराणसी जिला जेल के डिप्टी जेलर अनिल त्यागी की हत्या का आरोपी रमेश काका बलिया जेल में बंद है। पेशी के दौरान वह पुलिस अफसरों को भी धमकी दे चुका है। आरोप है काका ने जेल में रहते जेलर की हत्या कराई थी। आजमगढ़ के पूर्व विधायक सर्वेश सिंह सीपू का हत्यारोपी कुंटू सिंह वाराणसी सेंट्रल जेल में बंद है। वह जेल से ही आजमगढ़, मऊ और बलिया में गैंग चला रहा है। पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी बीमारी का बहाना बनाकर लंबे समय तक बीएचयू और गोरखपुर के अस्पताल में भर्ती रहे।

इस पर आईजी जोन वाराणसी अमरेंद्र कुमार सेंगर का कहना है कि जेल में बंद शातिर बदमाशों के बारे में जिला पुलिस के अलावा एसटीएफ भी सूचनाएं जुटा रही है। सूचनाओं के आधार पर समय-समय पर जेलों में छापेमारी भी की जाती है। वाराणसी समेत कई जेलों में जैमर भी लगाए जाने हैं। बदमाशों की पेशी भी सुनिश्चित कराई जाएगी।

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