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मुख्तार पर दर्ज हो चुके हैं हत्या, हत्या की कोशिश व अपहरण के 44 केस

Sat, 28 Jan 2017 02:51 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Sat, 28 Jan 2017 02:51 PM IST
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criminal case against mukhtar ansari
मुख्तार अंसारी

पूर्वांचल के माफियाओं में मुख्तार अंसारी चर्चित नाम है। उस पर हत्या, हत्या की कोशिश और अपहरण के 44 केस दर्ज हुए। उस पर टाडा, मकोका और पोटा भी लगा, लेकिन वह सबसे बच निकला।

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हत्या के ज्यादातर मामलों में वह आईपीसी की धारा 302 के साथ 120-बी (आपराधिक षडयंत्र) का मुजरिम रहा, लेकिन कहीं सुबूतों के अभाव में तो कहीं गवाहों के मुकरने के बाद मामले बंद होते रहे।
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वाराणसी में कोयला कारोबारी नंद किशोर रुंगटा के अपहरण व हत्या में मुख्तार का नाम आया। हालांकि सीबीआई जांच में वह सुबूतों के अभाव में बरी हुआ। रुंगटा विहिप के कोषाअध्यक्ष थे। मुख्तार का नाम 1988 में पहली बार हत्या के मामले में सामने आया।
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इस बीच, मुख्तार ने सरकारी ठेकों पर कब्जा करना शुरू कर दिया। 1996 में पहली बार विधायक बना तो बृजेश गैंग से आमने-सामने मुठभेड़ होने लगी।
गाजीपुर के उसरी चट्टी में हुए गैंगवार में मुख्तार के तीन लोग मारे गए और बृजेश घायल हो गया।

दोनों गैंग को 2002 तक पूर्वांचल का सबसे खूंखार गैंग कहा जाने लगा। आरोप है कि 13 जनवरी 2004 को लखनऊ के दिलकुशा में बृजेश ने मुख्तार के काफिले पर हमला बोल दिया।

हालांकि मुख्तार बच निकला। इस मामले में बृजेश सिंह, कृष्णानंद राय, मुन्ना सिंह, अजय सिंह समेत कई को नामजद किया गया। एक साल बाद 2005 में इलाहाबाद के पास एके 47 से कृष्णानंद राय समेत आधा दर्जन से अधिक लोगों को भून दिया गया। आरोप मुख्तार पर लगा। मामला दिल्ली की सीबीआई कोर्ट में चल रहा है। 

मुख्तार 2005 से सलाखों के पीछे

criminal case against mukhtar ansari
मुख्तार अंसारी - फोटो : अमर उजाला
इस मामले के गवाह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। सूत्रों का कहना है कि मुख्तार पर इस समय सिर्फ तीन केस पेंडिंग हैं। इनमें कृष्णानंद राय के अलावा मऊ की दो हत्याओं के मामले हैं।

2014 में बृजेश सिंह पर मुख्तार की हत्या के लिए छह करोड़ रुपये की सुपारी देने का आरोप लगा था। इसके बाद जेल में मुख्तार की सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। 
अक्तूबर 2005 में मऊ में भड़की हिंसा के बाद मुख्तार पर आरोप लगे।

उसने गाजीपुर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था। हालांकि वह बरी हो गया, लेकिन कृष्णानंद राय केस में तभी से जेल में बंद है। पहले वह गाजीपुर जेल में था, बाद में मथुरा जेल भेजा गया। वहां से आगरा और अब लखनऊ जेल में है। 
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