सिगरेट और ताश के साथ मिला महिला का नग्न शव
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इंदिरा नगर के सेक्टर 11 में घर पर अकेली बबिता उर्फ गुडिय़ा (32) की धारदार हथियार से ताबड़तोड़ वार कर हत्या कर दी गई। सोमवार सुबह करीब साढ़े दस बजे मकान का मेन गेट व अन्य दरवाजे खुले देख पड़ोसियों ने मकान मालिक को सूचना दी।
गाजीपुर पुलिस मौके पर पहुंची तो महिला का शव बेडरूम में नग्न अवस्था में पड़ा मिला। उसके गले व चेहरे पर कई घाव थे। आसपास फैला खून सूख चुका था। शव दो से तीन दिन पुराना होने की आशंका जताई जा रही है।
शव के पास सिगरेट और ताश भी मिली है। थाना प्रभारी गाजीपुर देवेंद्र दुबे ने बताया कि गुडिय़ा मूल रूप से हरदोई की रहने वाली थी और बीते तीन साल से यहां कैंट के तोपखाना निवासी रिटायर्ड अफसर जयचंद के मकान में 3000 रुपये प्रतिमाह किराये पर रह रही थी।
आचरण था संदिग्ध
दुबे ने बताया कि गुडिय़ा के पति प्रियंक अग्रवाल अमीनाबाद में दवा का कारोबार करते थे और करीब ढाई साल पहले उनकी सड़क हादसे में मौत हो गई थी। उसके बाद से गुडिय़ा यहां अकेले रह रही थी। मुहल्ले के लोगों का कहना है कि गुडिय़ा का आचरण संदिग्ध था। घर पर अक्सर बाहरी लोगों का आना-जाना था जिसमें अधिकतर लड़के-लड़कियां होते थे।
मोबाइल फोन और कागज पर मिले नंबरों की पड़तालपुलिस को मौके से गुडिय़ा का मोबाइल फोन मिला है। एक कागज भी मिला है जिसमें कई फोन नंबर लिखे हैं। यह नंबर किसके हैं? पुलिस पता लगा रही है।
थाना प्रभारी ने कहा कि गुडिय़ा के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल भी देखी जा रही है। वह जिन नंबरों पर बात करती थी? उनका ब्यौरा जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। गुडिय़ा ने आखिरी बार फोन पर किससे बात की? उसे किसी ने फोन किया था या किसी का फोन आया था? इसकी भी पड़ताल की जा रही है। उसके मोबाइल फोन के एसएमएस और व्हाट्सएप की डिटेल भी खंगाली जा रही है।
पूछताछ करने पर करती थी झगड़ा
मकान मालिक जयचंद ने बताया कि कभी-कभी वह अपने घर का जायजा लेने आते थे तो मुहल्ले के लोग गुडिय़ा की शिकायतें करते थे। लोगों ने उसे मकान से हटाने के लिए भी कहा था।
चूंकि, गुडिय़ा विधवा थी और उसके ससुर ही उसका किराया देते थे इसलिए उन्होंने मानवीय आधार पर उसे मकान से नहीं हटाया। मुहल्ले के लोग बताते थे कि घर पर संदिग्ध लोगों का आना-जाना है। कुछ लोगों ने गुडिय़ा से इसका विरोध भी किया तो वह झगड़ा करने लगती थी।
जयचंद का कहना है कि उन्हें वक्त पर किराया मिल जाता था इसलिए कभी मुहल्लेवालों की शिकायत पर गौर नहीं किया। उन्होंने बताया कि बीते एक महीने से गुडिय़ा के ससुर ने किराया नहीं भेजा था।
रविवार दोपहर करीब १२ बजे उन्होंने बेटे हिमांशु और भतीजे आदित्य व बृजेंद्र को किराया लेने के लिए भेजा। तीनों घर पहुंचे तो दरवाजे की कुंडी बाहर से लगी पाई। गुडिय़ा का काफी देर इंतजार किया लेकिन वह नजर नहीं आई तो तीनों लौट आए।