टेरर फंडिंग: फेलोशिप के लिए खुले खातों के जरिए आ रहा था आतंकियों का पैसा, यूं हुआ खुलासा
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टेरर फंडिंग मामले में मध्य प्रदेश के रीवा से गिरफ्तार आतंकियों का मददगार उमा प्रताप सिंह सोमवार को ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ लाया गया। यूपी एटीएस मंगलवार को उसे न्यायालय में पेश करेगी।
शुरुआती पूछताछ में उमा प्रताप उर्फ सौरभ ने कुबूल किया है कि वह पाकिस्तान में बैठे आतंकियों के संपर्क में था और उनके इशारे पर न सिर्फ खाते में पैसे डलवाता था, बल्कि फर्जी दस्तावेज के आधार पर खाते भी खुलवाता था।
उमा ने रीवा और उसके आसपास के जिलों के स्कूली बच्चों के खाते वजीफा दिलाने के नाम पर खुलवाता था। फिर इन खातों में पाकिस्तान से पैसे मंगाए जाते थे। उमा प्रताप पूर्व में भी जेल जा चुका है।
पिछले साल जेल से छूटने के बाद वह इस गोरखधंधे में शामिल हुआ। एटीएस सूत्रों का दावा है कि वह 2016 में कश्मीर में आतंकियों को मदद करने के आरोप में पकड़े गए मध्य प्रदेश के बलराम से भी उसके संबंध थे।
सूत्रों का कहना है कि उमा फिलहाल सहयोग नहीं कर रहा है। मंगलवार को कोर्ट में उसे पेश करने के बाद गिरोह के सभी सदस्यों रिमांड मांगी जाएगी।
लश्कर हैंडलर को थी भारतीय बैंकिंग की जानकारी
एटीएस सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान से चार अलग-अलग हैंडलर यूपी और मध्य प्रदेश के लोगों के संपर्क में थे। हैंडलर को भारत में बैंकिंग में हो रहे बदलाव, आधार से जुड़ रहे खातों और खुफिया एजेंसियों की निगरानी की पूरी जानकारी थी।
हैंडलर यूपी में उसके लिए काम कर रहे प्रतापगढ़ के संजय सरोज और गोरखपुर में बैठे नसीम व अरशद से न सिर्फ ज्यादा फर्जी खातों को खोलने के लिए कहता था, बल्कि बताता था कि आधार कार्ड और फर्जी आईडी तुम लोग मैनेज करो। उमा प्रताप के तीन खातों के बारे में भी जानकारी हुई है। जिनकी डिटेल बैंकों से मांगी गई है।
बैंकों की ली जा रही है मदद
आईजी एटीएस असीम अरुण ने बताया कि पूरे घटना क्रम में सैकड़ों बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया है। इन खातों की डिटेल जानकारी के लिए बैंकों की मदद ली जा रही है। पूरी जानकारी पता करने के लिए बैंक के विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।