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200 करोड़ की ठगी, लेकिन सबूत हो गए चोरी

Thu, 04 Dec 2014 01:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 04 Dec 2014 01:39 PM IST
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Record of 200 crore rupees fraud are stolon.

वृंदावन योजना-1 स्थित इस्माइलटेक इंफ्रास्ट्रक्चर्स ग्रुप के ऑफिस के ताले तोड़कर 200 करोड़ से अधिक की ठगी के रिकॉर्ड गायब कर दिए। कंपनी का ऑफिस पूर्व महाधिवक्ता वीसी मिश्र के मकान में था।

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बीते माह कंपनी संचालक व ठगी के आरोपी विनोद कुमार चौरसिया की गिरफ्तारी के बाद पीजीआई पुलिस ने मकान की निगरानी का जिम्मा कॉलोनी में ही रहने वाले फौजी रूप कुमार को सौंपा था। मंगलवार को रूप ने कंपनी के लोगों पर शक जताते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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इलाहाबाद निवासी पूर्व महाधिवक्ता ने बताया कि बीती दो नवंबर को विनोद की गिरफ्तारी के बाद से दो मंजिला मकान में ताला लगा था। मंगलवार सुबह मकान के ताले टूटे होने की जानकारी पाकर राजधानी आए। इस्माइलटेक कंपनी के छह कंप्यूटर की हार्ड डिस्क गायब होने के साथ ही आलमारियों में रखा सामान बिखरा मिला।
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उन्होंने निवेशकों से संबंधित महत्वपूर्ण फाइलों और दस्तावेज गायब करने की भी आशंका जताई है। वीसी मिश्र का कहना है कि मकान में टीवी, एसी व अन्य कीमती सामान रखा है। यानि चोर सिर्फ कंप्यूटर की हार्ड डिस्क और दस्तावेज लेने आए थे।

ऐसे घुस गए ये चोर

Record of 200 crore rupees fraud are stolon.

चोर बगल में खाली पड़े मकान की छत से आए और सीढ़ियों का ताला तोड़कर भीतर घुसे। इसके बाद कमरों और आलमारियों में लगे ताले तोड़ने के साथ ही कई दरवाजों के कुंडे भी काट डाले। घटना के चोरी का रूप देने के लिए नल की टोटियां भी निकाल ले गए।

करोड़ों रुपये की ठगी से संबंधित अहम रिकॉर्ड के चोरी होने से पीजीआई पुलिस की भूमिका भी कठघरे में है। पूर्व महाधिवक्ता का कहना है कि कंप्यूटर और फाइलों में निवेशकों से संबंधित तमाम सूचनाएं थीं।

रिकॉर्ड विनोद के खिलाफ कोर्ट में महत्वपूर्ण साक्ष्य थे, जिन्हें पुलिस को विशेष निगरानी में रखना चाहिए था। साथ ही पीजीआई पुलिस पर भी मिलीभगत की आशंका जताई।

इस्माइलटेक ग्रुप के संचालक विनोद को गिरफ्तार करके जेल भेजने के बाद पीजीआई पुलिस हाथ पर हाथ रखकर बैठ गई थी। पूर्व महाधिवक्ता ने बताया कि ठगी के खुलासे के बाद 50 से ज्यादा लोगों ने पीजीआई थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

इसमें विनोद के साथ ही उसके भाई राकेश, साले सूर्यकेश, एके राय, बृजेश तिवारी को नामजद किया था। इसके बावजूद पुलिस ने किसी को ढूंढ़ने और ऑफिस में रखे साक्ष्यों की सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं किया। आशंका है कि आरोपियों ने ही वारदात अंजाम दी होगी।

किराये पर मकान देकर फंस गया

Record of 200 crore rupees fraud are stolon.

पूर्व महाधिवक्ता वीसी मिश्रा ने कहा कि ठग को मकान किराये पर देकर फंस गए। ठग ने मकान की दुर्दशा कर दी है। टाइल्स टूटे हुए हैं। बिजली फिटिंग खराब हो चुकी है। कई पंखे, फर्नीचर और परदे गायब हैं। उन्होंने विनोद के खिलाफ पांच अक्तूबर को सामान गायब करने की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। इसके बाद विनोद गायब हो गया। पूर्व महाधिवक्ता ने कहा कि पुलिस से मकान खाली कराने को कहा लेकिन सुनवाई नहीं हुई।

ऐसे करता था ठगी
वर्ष 2012 में इस्माइलटेक कंपनी बनाकर विनोद ने रियल एस्टेट, प्लाटिंग, फिल्म और विज्ञापन का काम शुरू किया। हर्बल दवाएं भी बनाता था। कंपनी में निवेश कर बिना कुछ किए 13 महीने में रकम तीन गुना करने का झांसा देता था।

ऑनलाइन नेटवर्किंग के जरिए भी कई लोगों से रुपये जमा कराए थे। शातिर विनोद कंपनी की वेबसाइट खोलकर एक घंटे तक इश्तहार पढ़ने वालों को भी डेढ़ सौ रुपये तक देता था। इश्तहार पढ़ने वाले व्यक्ति से बैंक खाते दर्ज कराता था और तत्काल रुपये भेजकर अपनी कंपनी से जोड़ना शुरू करता था।

उसने राजधानी के अलावा आसपास के जनपदों और पूर्वांचल के कई जिले के लोगों से ठगी की। इसके साथ ही ऑप्टिमम ट्रेडिंग यूएस और रिचमैन इंडिया नाम से कंपनी बनाकर लोगों से करोड़ों रुपये निवेश कराए।

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