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Triple Murder: लखनऊ के ट्रिपल मर्डर का खुलासा, दाल में मिलाईं 90 नींद की गोलियां, बांके से काटा गला

Wed, 19 Jan 2022 07:25 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 19 Jan 2022 07:25 PM IST
सार

पुलिस ने विकास नगर लखनऊ में हुए ट्रिपल मर्डर का खुलासा कर दिया है। परिवार के बड़े बेटे ने ही तीनों की हत्या की थी।

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police exposed triple murder case of Vikas nagar lucknow.
आरोपी के घर के बाहर मौजूद पुलिसकर्मी। - फोटो : amar ujala

विस्तार

विकासनगर सेक्टर-2 निवासी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन से सेवानिवृत्त महमूद अली खां (65), उनकी पत्नी दरख्शा (62) और बेटे शावेज (26) की हत्या उनके बड़े बेटे सरफराज ने की थी। वारदात को अंजाम सरफराज ने अपने एक साथी बैकुंठ धाम में सफाई कर्मचारी अनिल यादव के साथ मिलकर दिया था। उसने पांच जनवरी की रात को दाल में नींद की 90 गोलियां मिलाकर खिला दीं जिससे सभी बेहोश हो गए। इसके बाद उनकी बांके से गला रेतकर हत्या कर दी। आरोपी ने तीनों शव तीन थानाक्षेत्र में अलग-अलग दिन फेंके ताकि किसी को संदेह न हो।

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एसपी ग्रामीण हृदेश कुमार के मुताबिक, तीनों की हत्या के बाद सरफराज कश्मीर निकल गया। वहीं से तीनों के गायब होने की सूचना रिश्तेदारों को दी। पुलिस ने जब पड़ताल शुरू की तो सभी के मोबाइल की लोकेशन लखनऊ में मिली। पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। पूछताछ में दोनों ने जुर्म भी कुबूल कर लिया। वारदात को अंजाम देने के पीछे कारण परिवार में तरजीह न मिलने और संपत्ति का विवाद सामने आया है। एसपी ग्रामीण के मुताबिक, विकासनगर के सेक्टर-2 में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन से सेवानिवृत्त महमूद अली खां परिवार सहित रहते थे। परिवार में उनकी पत्नी दरख्शा और बेटे शावेज और बड़ा बेटा सरफराज है। बेटी की शादी हो चुकी है। बेटी अपने परिवार के साथ नोएडा में रहती है। पांच जनवरी को महमूद अली खां, उनक ी पत्नी दरख्शां और छोटे बेटे शावेज की गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। हत्या घर के अंदर की गई थी। इस हत्याकांड को अंजाम उनके बड़े बेटे सरफराज ने दिया था। पुलिस ने सरफराज को हिरासत में लिया तो हत्याकांड का खुलासा हुआ। इस मामले में लखनऊ ग्रामीण के माल, मलिहाबाद व बीकेटी थाने में हत्या का मुकदमा 6, 8 और 13 जनवरी को दर्ज किया गया था।
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तीन शव, तीन इलाके और तीन दिन
पुलिस के मुताबिक, हत्या के बाद सरफराज ने तीनों शवों को तीन दिन में तीन इलाकों में फेंका ताकि किसी को शक न हो। सरफराज ने 6 जनवरी को इटौंजा में माल रोड के किनारे शावेज का शव चादर में बांधकर फेंका जिसकी शिनाख्त नहीं हो पाई थी। इसके बाद 8 जनवरी को पिता महमूद खां की मलिहाबाद में और 13 जनवरी को मां दरख्शां का शव माल में फेंका। आरोपी सरफराज ने तीनों शव को ठिकाने लगाने केलिए आठ दिन का समय लिया। पुलिस तीनों शवों के मिलने की कड़ी जोड़ ही रही थी कि तभी विकास नगर से एक ही परिवार के तीन लोगों के लापता होने की जानकारी हुई। जम्मू-काश्मीर में परिवारीजनों के खोने और उनकी फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होने पर घटना का खुलासा करने में मदद मिली। जांच में सामने आया कि तीनों शव उन तीनों गुमशुदा लोगों के ही हैं। इसके बाद से ही पुलिस को सरफराज पर शक हो गया था।
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कश्मीर जाने की बात से लोगों को किया गुमराह
कुछ दिन पहले महमूद खां की बेटी अनम व दामाद विकासनगर स्थित आवास पर पहुंचे थे। वहां से सभी के नंबर पर कॉल करना शुरू की तो बंद आ रहे थे। बहन की बात सरफराज से हुई। सरफराज ने बहन को बताया कि पांच जनवरी को तीनों कश्मीर घूमने के लिए ट्रेन से निकले थे। नौ जनवरी को सरफराज ने शावेज के मोबाइल से मेसेज कर बताया कि भूस्खलन के चलते जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर फंसे हैं। पिता की तबीयत खराब है। इसके बाद से उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है।

परिजनों की मर्जी के खिलाफ  की थी लव मैरिज
हरदोई संडीला निवासी साढ़ू सलीम के मुताबिक, सरफराज ने घर वालों के खिलाफ  लव मैरिज कर ली थी जिसका परिजनों ने विरोध किया। उसके चाल-चलन से पूरा परिवार परेशान था। वह यह कदम उठाएगा किसी ने सोचा भी नहीं था। वहीं घटना के बाद उनकी बेटी अनम का रो-रोकर बुरा हाल है। उसकी नवंबर में ही शाहजहांपुर से शादी हुई थी।
 

सात रातों तक खून से सने बिस्तर पर सोता रहा

पुलिस के मुताबिक, सरफराज ने कुबूल किया है कि वह तीनों की हत्या के बाद उनके खून से सने बिस्तर पर सात दिनों तक सोता रहा। वहीं भाई से ज्यादा नफरत करता था जिससे उसके शव को पहले ठिकाने लगाया और उसके बिस्तर को छत पर फेंक दिया। सरफराज ने बताया कि उसने सबसे पहले मां, फिर पिता और सबसे आखिर में भाई की हत्या की। इस दौरान अनिल भी उसका पूरा सहयोग करता रहा। भाई का शव ठिकाने लगाने केबाद उसने रात में बना हुआ मां के हाथ का खाना खाया। इसके बाद घर की सफाई की। जिस बिस्तर पर मां-पिता की हत्या की थी, उस चादर को हटाकर सो गया।

बहन रोती रही, भाई ने देखा तक नहीं
पुलिस के मुताबिक, शुरूआती पूछताछ में सरफराज पूरी बात हंसकर बता रहा था। उसने कहा कि तीनों की हत्या का उसे कोई अफसोस नहीं है। पुलिस ने उसके हत्या में प्रयुक्त बांका और बिस्तर को ठिकाने लगाने से पहले ही पकड़ लिया। वहीं विकासनगर स्थित घर जब बहन अनम पहुंची तो वह फूटकर रोने लगी। लेकिन सरफराज इतना क्रूर निकला कि वह उसका चेहरा तक नहीं देखना चाहता था। पुलिस ने विकासनगर स्थित घर से बांका और खून से सने तीन बिस्तर बरामद किए हैं।

जम्मू-कश्मीर के रामबन पुलिस ने दिया बेटी का नंबर
पुलिस के मुताबिक, आरोपी सरफराज ने मां, पिता व भाई के जम्मू-कश्मीर जाने की बात कही। वहां भूस्खलन में लापता होने की सूचना दी। बहन को बताया कि सभी वहां के रामबन से लापता हो गए हैं। इसकी जानकारी सरफराज ने रामबन पुलिस को दी थी। एसपी रामबन ने मामले की जानकारी बीकेटी पुलिस को दी। वहीं के पुलिस अधिकारी से सरफराज की बहन अनम का नंबर मिला, जिसके बाद बीकेटी पुलिस विकासनगर में पहुंची। तब सरफराज पकड़ में आया।

1.80 लाख में दी थी सुपारी

सीओ बीकेटी नवीना शुक्ला के मुताबिक, सरफराज ने अपनी मां, पिता व भाई की हत्या के लिए बैकुंठधाम के सफाई कर्मचारी अनिल यादव को सुपारी दी थी। इसके लिए एक लाख 80 हजार रुपये दिये थे। दोनों ने मिलकर वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने घर की छत से खून से सने गद्दे व बांका बरामद कर लिया है। बुधवार को पुलिस ने वारदात स्थल विकासनगर स्थित आवास का निरीक्षण किया। वहां पहुंचने के बाद सरफराज रोने लगा। उसने कुबूला कि लोगों को संदेह न हो इसके लिए कश्मीर जाने की झूठी कहानी रची थी।

बहन के निकाह की सूचना के बाद ही रची थी साजिश
सीओ नवीना शुक्ला के मुताबिक, सरफराज ने पुलिस को बताया कि उसका परिवार उसको पसंद नहीं करता था। इसकी वजह से वह चार-पांच सालों से कोलकाता और बंगलूरू में रह रहा था। घर वाले छोटे भाई के आगे उसकी एक भी नहीं चलने देते थे। इसी बीच अगस्त में बहन के निकाह की जानकारी होने पर सरफराज ने परिवारीजनों की हत्या की साजिश रच डाली। इसके बाद उसने ठाकुरगंज के मोहिनीपुरवा निवासी अनिल यादव से संपर्क किया। बहन के निकाह में शामिल होने के लिए 27 नवंबर 2021 को लखनऊ पहुंचा। इसके बाद घर पर ही रुक गया। मौका मिलते ही पांच जनवरी को वारदात को अंजाम दे दिया।

घर पर नहीं के बराबर था आना-जाना
सरफराज के मौसा सलीम के मुताबिक, सरफराज शुरू से ही पढ़ाई में ठीक था। अच्छे नंबरों से पास होता था। उसकी पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय अलीगंज में हुई थी। इसके बाद उसने लखनऊ विश्वविद्यालय से एमकॉम किया। फिर विधि से स्नातक की डिग्री हासिल की। साथ ही सीए न कर पाने पर आईसीडब्ल्यूए का कोर्स किया। वह न्यायिक सेवा में जाने की तैयारी कर रहा था। इसी दौरान एक लड़की के संपर्क में आकर घर से दूर हो गया। कोलकाता जाने के बाद से ही वह पूरे परिवार को ही खुद के खिलाफ  समझने लगा। परिवारीजन ने उसे बेटी अनम के निकाह में बुलाया था।

कोविड संक्रमित होने की बात कह रिश्तेदारों को किया दूर
सरफराज ने हत्या की कहानी पूरी तरह से फिल्मी अंदाज में लिखी थी। उसे पता था कि वह पकड़ा नहीं जाएगा। लोग उस पर संदेह न करें, इसके लिए परिवारीजनों के कश्मीर जाने की कहानी बनाई। साथ ही लोग घर न आएं इसके लिए खुद को कोविड संक्रमित बताया। उसने खुद 13 जनवरी को जम्मू की फ्लाइट पकड़ी। वहीं से बहन अनम को छोटे भाई शावेज के मोबाइल से कश्मीर में फंसे होने की सूचना दी, ताकि लोगों को यकीन हो जाए कि पूरा परिवार कश्मीर में है।

 
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