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ऑन डिमांड उड़ाते कार, लैपटॉप से खोलते सिंक्रोनाइज्ड लॉक

Sun, 06 Mar 2016 09:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 06 Mar 2016 09:30 PM IST
सार

  • 200 से अधिक कारें लखनऊ से ही उड़ाईं
  • फास्ट एंड फ्यूरियस फिल्म की तरह करते थे ड्राइविंग
  • चोरी के लिए एक शहर से दूसरे शहर फ्लाइट से रवानगी
  • कई कंपनियों के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम हासिल किए

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 Luxury car theft gang arrests in lucknow
- फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एसटीएफ ने लखनऊ विकासनगर से अंतराज्यीय वाहन चोर गिरोह के सरगना आगरा के सदर गोपाल विहार निवासी प्रदीप भदौरिया और उसके साथी एटा के जैथरा में रहने वाले दीपक सिंह उर्फ बल्ले को दबोच लिया है। दोनों ने बीते कुछ वर्षों में हजारों लग्जरी कारें चोरी करने की बात कुबूल की है। गिरोह ने अकेले लखनऊ से ही 200 से अधिक कारें उड़ाई हैं। पूछताछ में सामने आया कि ये गिरोह ऑन डिमांड कारें चोरी करने फ्लाइट से जाता था और महज आठ मिनट में ही कार के सिंक्रोनाइज्ड लॉक को खोल लेते थे। इसी गिरोह ने बीते दो महीने में राजधानी से छह कारें चोरी कीं।
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इसमें अलीगंज और विकासनगर से दो स्विफ्ट डिजायर, गाजीपुर और अलीगंज से दो सफारी और पारा व विकासनगर से दो बोलेरो कार शामिल हैं। विकासनगर से बीते वर्ष मई में एक बोलेरो चोरी की गई थी। इनके पास से चोरी की एक स्विफ्ट कार, तीन मोबाइल फोन, विभिन्न कारों के सात इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, एक ड्रिल मशीन बरामद हुई है। एसएसपी एसटीएफ अमित पाठक ने बताया कि प्रदीप और बल्ले के गैंग का नेटवर्क यूपी के अलावा बिहार, एमपी, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों के अलावा नेपाल तक फैला हुआ है। नेपाल में गैंग का सदस्य बॉबी है। वह जेल में बंद है। कार को खरीदने के बाद वह फर्जी कागजात तैयार करके बेच देता था।
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चोरी के लिए एक शहर से दूसरे शहर फ्लाइट से रवानगी

 Luxury car theft gang arrests in lucknow
क्राइम - फोटो : अमर उजाला
प्रदीप ने बताया कि कई बार उससे बड़े लोग अपने मन की कारें मंगाते थे। पसंद की कार चोरी करने के लिए प्रदीप और बल्ले फ्लाइट से एक शहर से दूसरे शहर जाते थे। उन्होंने सबसे ज्यादा लग्जरी कारें मुंबई से चोरी करने की बात कुबूली है।

फास्ट एंड फ्यूरियस फिल्म की तरह करते थे ड्राइविंग
प्रदीप और बल्ले को कार से पकड़ना असंभव जैसा था। एएसपी डॉ. अरविंद चतुर्वेदी ने बताया कि बीते वर्ष अक्तूबर में इंदिरानगर में उन्होंने प्रदीप को घेर लिया था। उस वक्त वह हांडा अमेज कार चोरी करके भाग रहा था। एसटीएफ को पीछे लगा देख उसने 170 किलोमीटर की स्पीड तक कार दौड़ाई। सीतापुर रोड पर उतरते वक्त उसकी कार के अगले दो पहिया हवा में उठ गए थे। ऐसी खतरनाक स्पीड और ड्राइविंग देखकर उन्होंने पीछा करना बंद कर दिया। एएसपी ने बताया कि पीछा करने पर अन्य राहगीर हादसे का शिकार हो सकते थे।

कई कंपनियों के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम हासिल किए
एएसपी डॉ. अरविंद चतुर्वेदी ने बताया कि वर्ष 2012 के बाद से सभी कंपनियां कारों में इलेक्ट्रॉनिक लॉक सिस्टम लगा रही हैं। कार का दरवाजा खोलने, इंजन लॉक और स्टार्ट करने के सिस्टम को सिंक्रोनाइज्ड करने का एक कोड होता है। इस कोड का सॉफ्टवेयर कंपनी या उसके अधिकृत डीलरों के पास होता है। किसी कार मालिक की चाबी खो जाने पर नई चाबी का कोड सॉफ्टवेयर से ही सिंक्रोनाइज्ड किया जाता है।

चोर मास्टर की से लॉक खोलते तो कार कर अलार्म बजने लगता था। इसका तोड़ निकालते हुए उन्होंने कई कंपनियों के इलेक्ट्रानिक सिस्टम हासिल किए और लैपटॉप की मदद से आठ से दस मिनट में लॉक तोड़कर कारें उड़ाना शुरू कर दिया। इन कारों के फर्जी कागजात बनाकर नॉर्थ-ईस्ट राज्यों में बेचकर चोरों ने करोड़ों रुपये कमाए।
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