लखनऊ से अगवा युवक की हापुड़ में हत्या
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखनऊ के कृष्णानगर इलाके के जिस युवक को 28 फरवरी की रात उसके चचेरे मामा ने कॉल करके बुलाया और साथ बैठकर दावत उड़ाई थी उसकी हापुड़ में हत्या कर शव जला दिया गया। हापुड़ में लावारिस शव मिलने की जानकारी पर कृष्णानगर पुलिस अगवा आशीष गौड़ (33) के पिता व बहनोई को लेकर को हापुड़ पहुंची।
उन्होंने सोने की तीन अंगूठी, अधजले कपडे़ और फोटो में नजर आ रही फ्रेंचकट दाढ़ी को पहचाना लेकिन, पुख्ता शिनाख्त के लिए डीएनए टेस्ट की कार्रवाई की जा रही है। इधर, अपहरण की पड़ताल में जुटी पुलिस ने मुख्य आरोपी की पत्नी व समेत तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है।
एसओ कृष्णानगर विजय कुमार यादव ने बताया कि 28 फरवरी की रात संदिग्ध हालात में लापता हुए मोहल्ला नारायणपुरी निवासी आशीष गौड़ (33) की इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस से तलाश चल रही थी। आशीष गौड़ के साथ अपहरण के आरोपी उसके चचेरे मामा संदीप के मोबाइल का लोकेशन हापुड़-गाजियाबाद की तरफ पाया गया था।
राजधानी व आसपास के जिलों के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लावारिस मिले युवकों के शवों का ब्यौरा जुटाया जा रहा था। हापुड़ के आनंद विहार में निर्माणाधीन आवासीय कॉलोनी में 29 फरवरी को युवक का जला शव मिलने की जानकारी हुई।
शिनाख्त के लिए होगा डीएनए टेस्ट
उसकी तीन अंगुलियों में सोने की अंगूठी, कपड़े, उम्र व हुलिया के आधार पर संदेह हुआ। पुलिस की टीम को आशीष के पिता कृष्णकुमार गौड़ व बहनोई के साथ हापुड़ भेजा गया।
उन्होंने अंगूठी, कपड़े व फोटो में नजर आई फ्रेंचकट दाढ़ी देखकर शव की शिनाख्त अपने बेटे आशीष गौड़ के रूप में की। चेहरा जला होने की वजह से अच्छी तरह पहचानना मुश्किल था। ऐसे में पुख्ता शिनाख्त के लिए डीएनए टेस्ट कराया जाएगा।
इधर, कृष्णानगर पुलिस ने अपहरण के नामजद आरोपी संदीप की पत्नी समेत तीन लोगों को हिरासत में लिया। उनसे पूछताछ करके संदीप व उसके दो साथियों की तलाश शुरू की है। एसओ का कहना है कि प्रतापगढ़ के मूल निवासी संदीप का आखिरी लोकेशन गाजियाबाद में मिला था।
उसके दोनों साथियों का कोई सुराग नहीं लगा है, जबकि 28 फरवरी को दावत में साथ रहे इंदिरानगर के सेक्टर-11 निवासी आशीष ने पूछताछ में अहम जानकारी दी थी।
अवैध संबंधों में हत्या का शक
एसओ का कहना है कि एक पब्लिकेशन कंपनी में कार्यरत आशीष गौड़ की अपनी पत्नी नेहा से मुकदमेबाजी चल रही थी। पिता कृष्णकुमार व मां शीला के साथ रह रहे आशीष का इंदिरानगर इलाके में आवागमन था।
वहां अक्सर दावत व मौजमस्ती की जानकारी मिली है। इसमें चचेरा मामा संदीप गौड़ व उसके मौसेरे भाई आशीष के साथ अन्य युवक शामिल होते थे। परिवारीजनों का कहना है कि कई साल पहले प्रतापगढ़ में अपहरण के एक मुकदमे में संदीप के साथ आशीष का भी नाम आया था। नाबालिग होने की वजह से आशीष छूट गया था। इसकी रंजिश थी।
पड़ताल में जुटी पुलिस का मानना है कि संदीप गौड़ ने साथियों की मदद से साजिश रचकर वारदात अंजाम दी। उसने 20 फरवरी को श्रावस्ती के राजेंद्र के नाम से सिम खरीदा और उसका सिर्फ आशीष से बातचीत में इस्तेमाल करता था।
आशीष की अंगुलियों में मिली सोने की तीन अंगूठी से जाहिर है कि फिरौती या संपत्ति के लालच में अपहरण नहीं किया गया। वारदात की असल वजह संदीप के हत्थे चढ़ने पर स्पष्ट हो सकेगी।