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सीआरपीएफ ने नहीं माना कोर्ट का आदेश
टीम डिजिटल/अमर उजाला,लखनऊ
Updated Sat, 19 Apr 2014 03:16 AM IST
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अदालत का आदेश लागू करवाने में असमर्थता जताने पर जिला न्यायाधीश केके शर्मा ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने सीआरपीएफ को आदेश दिया है कि वह कोर्ट को बताए कि कौन से नियम और प्राविधान उन्हें कोर्ट के आदेश का पालन करने से रोकते हैं।
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मामले की अगली सुनवाई 19अप्रैल को होगी। जिला न्यायाधीश ने यह आदेश नक्खास स्थित अवध प्वाइंट पर कब्जा दिलाने के मामले में सीआरपीएफ द्वारा असमर्थता जताने पर दिया है। कोर्ट ने कहा कि सीआरपीएफ के वकील अलोक माथुर कोर्ट में उपस्थित हैं।
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सीआरपीएफ के डिप्टी कमान्डेंट ने शपथ पत्र देकर बताया है कि सीआरपीएफ पुलिस की तरह काम नहीं करती है। उन्हें पुलिस की तरह अधिकार भी प्राप्त नहीं हैं। सीआरपीएफ केंद्र सरकार द्वारा गठित अतिरिक्त बल है जो स्थानीय पुलिस की मदद के रूप में काम करता है।
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इसके साथ आम चुनाव के चलते भी ज्यादातर फोर्स ड्यूटी पर लगी है। ऐसे में कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि सीआरपीएफ की ओर से ऐसे कोई नियम या प्राविधान नहीं प्रस्तुत किए गए जो उन्हें कोर्ट के आदेश का पालन करने से रोकता हो।
कोर्ट ने सीआरपीएफ को ऐसा कोई प्राविधान पेश करने का आदेश देते हुए स्पष्ट किया कि कोर्ट ने सीआरपीएफ को पुलिस बल कार्य का आदेश नहंी दिया था। कोर्ट की ओर से सिर्फ एसएसपी की मदद करने का आदेश पारित किया गया था।
गौरतलब है कि अवध प्वाइंट पर कब्जा करने के आदेश देते हुए जिला न्यायाधीश ने गत 10 अप्रैल को कहा था कि स्थानीय पुलिस के साथ ही सीआरपीएफ कोर्ट के अमीन की मदद करे। जिस पर सीआरपीएफ ने कोर्ट में अर्जी देकर मांग की थी कि अदालत अपना आदेश संशोधित करे या वापस ले।