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'तंग' प्रेमिका ने की थी जिला पंचायत सदस्य की हत्या
अनिल त्रिपाठी/लखनऊ
Updated Sun, 17 Nov 2013 09:02 PM IST
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उन्नाव में औरास के जिला पंचायत सदस्य उमेश कनौजिया की हत्या प्रेमिका ने अपने साथियों के साथ मिलकर की थी। इसके बाद टैंपो में शव लादकर महदोइया के पास नहर में फेंक दिया।
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मलिहाबाद पुलिस ने रविवार को हत्याकांड का खुलासा कर प्रेमिका व उसके एक साथी दबोच लिया। जबकि, दो अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। पुलिस ने शव ले जाने में इस्तेमाल टैंपो भी बरामद कर लिया गया है।
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इंस्पेक्टर मलिहाबाद जेपी सिंह के मुताबिक 14 नवंबर को मलिहाबाद के मदहोइया गांव के पास नहर से उन्नाव में औरास के गागन बछौली के जिला पंचायत सदस्य उमेश कनौजिया का शव पाया गया था।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की थी। सेलफोन की कॉल डिटेल के आधार पर मलिहाबाद के सिधंरवा की आशा कनौजिया को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।
सख्ती पर आशा ने सच उगल दिया। उसने बताया कि उमेश से दो वर्ष से संबंध थे। पहले तो सब ठीक रहा लेकिन धीरे-धीरे उमेश उसके निजी जीवन में हस्तक्षेप करने लगा।
आने-जाने से लेकर दूसरे लोगों से बातचीत तक पर पाबंदी लगा दी। इसे लेकर दोनों में कई बार कहासुनी भी हुई थी। वारदात की रात भी कहासुनी के बाद उमेश ने उस पर हाथ उठा दिया।
इससे झल्लाकर आशा ने उसे ठिकाने लगाने की ठान ली। इसके लिए उसने अपने परिचित शाहपुर तौंदा गांव निवासी रामनरेश उर्फ नरेश के साथ ही शकील व सिधंरवा हरौनी के छोटे उर्फ पुत्तन को बुलाया।
देर रात उमेश के सोने के बाद चारों ने मिलकर गला दबाकर उसकी हत्या कर दी और शव टैंपो में लादकर महदोइया के पास नहर में फेंक दिया। पुलिस ने आशा के साथ ही रामनरेश को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि शकील व छोटे की तलाश जारी है।
मां-बाप की भूमिका की भी जांच
जिला पंचायत सदस्य उमेश की हत्या में प्रेमिका के मां-बाप के भूमिका की भी जांच होगी। क्योंकि, वारदात की रात मां-बाप घर में ही थे।
आशा ने अपने घर में ही साथियों के साथ बला दबाकर मारा था और फिर शव फेंकने गई थी। इससे पुलिस को शक है कि हत्या की साजिश की जानकारी उसके मां-बाप को भी रही होगी।
हालांकि, अभी तक उनसे पूछताछ नहीं की गई। सीओ मलिहाबाद का कहना है कि, जांच के बाद ही उनकी भूमिका की स्थिति साफ होगी।
चुनाव प्रचार के दौरान हुई थी मुलाकात
पुलिस के अनुसार दो वर्ष पूर्व विधान सभा के चुनाव प्रचार के दौरान उमेश की मुलाकात आशा से हुई थी। मुलाकात दोस्ती में बदली और फिर दोनों में प्यार हो गया। धीरे-धीरे गहरे रिश्ते बने और घर आने जाने का सिलसिला शुरू हो गया।
दरअसल, उमेश अपनी बिरादरी का नेता माना जाता था। और उधर आशा की मां ग्राम प्रधान थी, लेकिन काम पिता ही देखते थे।
आशा के पिता और उमेश में खासी छनती थी। उन्हीं के चलते उमेश का घर में आना-जाना शुरू हुआ था।