{"_id":"0c2e7c01f8d157e8084a4f6db0285449","slug":"gang-rape-82","type":"story","status":"publish","title_hn":"9 साल बाद कोर्ट में होगी गैंग रेप की सुनवाई","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
9 साल बाद कोर्ट में होगी गैंग रेप की सुनवाई
अभिषेक यादव/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Wed, 26 Mar 2014 08:54 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आशियाना सामूहिक दुराचार कांड की सुनवाई बुधवार से एसीजेएम कोर्ट में होगी। इस मामले की फाइल जुविनाइल जस्टिस (जेजे) बोर्ड ने कोर्ट को सौंप दी है।
विज्ञापन
करीब नौ साल पुराने इस मामले में बोर्ड ने मुख्य आरोपी गौरव शुक्ला को शुक्रवार को बालिग करार दिया था।
साथ ही उसे 26 मार्च को सेशन कोर्ट में रिपोर्ट करने को कहा गया था। इसके बाद भी पुलिस गौरव को गिरफ्तार नहीं कर सकी है।
इस बीच पीड़ित पक्ष ने आरोपी की गिरफ्तारी की मांग को पुरजोर तरीके से उठाने के लिए सामाजिक आंदोलन छेड़ने का मन बनाया है।
इस अपराध के बाद करीब एक दशक का लंबा समय सिर्फ आरोपी की उम्र तय करने में बीत गया।
मामला सेशन कोर्ट में पहुंचने के बाद उम्मीद है कि न्यायपालिका सक्रिय रुख दिखाते हुए इसकी त्वरित सुनवाई करेगी।
मामले के अन्य पांच आरोपियों को निचली अदालतें और बोर्ड पहले ही दोषी करार दे चुका हैं।
इस वजह से भी अंतिम और मुख्य आरोपी के मामले की सुनवाई जल्द पूरा होने की संभावना जताई जा रही है। दूसरी ओर पीड़ित पक्ष ने जेजे बोर्ड के निर्णय की नकल प्राप्त कर ली है और अब पुलिस को आरोपी गौरव शुक्ला की गिरफ्तारी के लिए घेरने की तैयारी में जुटा है।
विज्ञापन
स्कूलों पर भी नकेल को कहा
जेजे बोर्ड ने सिटी मॉन्टेसरी स्कूल महानगर,हेराल्ड पब्लिक इंटर कॉलेज रामनगर,क्रांति विद्यामंदिर किला मोहम्मदीनगर बंगला बाजार जैसे स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई के लिए संबंधित शिक्षा बोर्डों को निर्देश दिया था।
विज्ञापन
इन स्कूलों में गौरव शुक्ला ने पढ़ाई की थी,लेकिन लापरवाही बरतते हुए स्कूलों ने उसे प्रवेश देते समय कई महत्वपूर्ण जानकारियां या तो लिखी नहीं थीं,या बिना जांच किए गलत लिखी थी। इसमें गौरव शुक्ला की जन्मतिथि को लेकर कई घालमेल सामने आए थे।
9 साल के बजाये 1 महीने में हो सकता था निर्णय
बोर्ड के अनुसार स्कूलों की वजह से ही गौरव शुक्ला की जन्मतिथि में विसंगतियां थीं। इसी का फायदा उठाते हुए आरोपी और उसके वकीलों ने बोर्ड को कई साल तक उलझाए रखा।
बोर्ड के अनुसार अगर स्कूलों ने जन्मतिथियां लिखने में गड़बड़ी नहीं की होती तो मामला एक महीने में ही सुलझाया जा सकता था।