मंत्री बनकर बांट रहा था जॉब, धरा गया शातिर ठग!
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रेलवे और एनटीपीसी में नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगारों को ठगने वाले गिरोह के चार गुर्गे बृहस्पतिवार दोपहर आलमबाग पुलिस के हत्थे चढ़ गए। गिरोह से जुड़े लोग खुद को मंत्री और एनटीपीसी का जीएम बताकर शिकार को फांसते और नौकरी के नाम पर ढाई लाख रुपये से लेकर आठ लाख रुपये तक ऐंठ लेते।
इनके पास सांसदों और जनप्रतिनिधियों के कई फर्जी लेटरपैड बरामद हुए हैं। एक लेटरपैड मोतीलाल बोरा का है। इन्हीं लेटरपैड पर ये नौकरी दिलाने की संस्तुति करते थे। कई फर्जी नियुक्ति पत्र, झांसे में फंसे दो दर्जन युवकों के शैक्षिक प्रमाणपत्र व अन्य दस्तावेज बरामद हुए हैं।
सीओ आलमबाग प्रताप गोपेंद्र यादव ने बताया कि मथुरा के मगोर्रा नैनू पट्टी निवासी विक्रम सिंह बृहस्पतिवार दोपहर आलमबाग कोतवाली पहुंचा और ठगी की जानकारी दी।
विक्रम को एनटीपीसी में नौकरी का झांसा देकर 2 लाख तीस हजार रुपये वसूले थे। उसने बताया कि एनटीपीसी में नौकरी के लिए ठगों ने 24 नवंबर को उसे व गांव के 15 अन्य युवकों को इलाहाबाद बुलाया था। इलाहाबाद पहुंचे तो पहले उन्हें एनटीपीसी बारा भेजा गया फिर एनटीपीसी ऊंचाहार बुलाया गया।
परेशान युवक उनका पीछा करते हुए राजधानी आ गया। विक्रम ने पुलिस को ठगों के आलमबाग बस अड्डे पर मौजूद होने की जानकारी दी। इसके बाद चारों को पकड़ा जा सका। पकड़े गए जालसाजों की पहचान मथुरा के मगोर्रा नगला भाऊ निवासी मुरारी व उसके भाई सुशील और लोकेंद्र के साथ ही आजमगढ़ के फूलपुर के लालता सिंह के रूप में हुई।
नेताओं का करीबी बताने के लिए फर्जी लेटरपैड
इंस्पेक्टर आलमबाग विमल कुमार सिंह ने बताया कि ठगों के पास से सांसदों और जनप्रतिनिधियों के कई फर्जी लेटरपैड मिले हैं। एक लेटरपैड मोतीलाल बोरा का है। इंस्पेक्टर का कहना है कि यह लेटरपैड वर्ष 2011 का है। लेटरपैड पर बेरोजगारों को नौकरी देने की संस्तुति की गई है।
पुलिस का कहना है कि बदमाश बेरोजगारों से कहते थे कि उनके कई सांसदों और जनप्रतिनिधियों से संबंध हैं। इनके लेटरपैड पर संस्तुति करके वह नौकरी दिलाते हैं। पुलिस यह पता करने की कोशिश कर रही है कि लेटरपैड कहां से और कैसे बनवाए गए।
सीओ आलमबाग ने बताया कि गैंग में हैं दस बदमाश हैं। पकड़े गए ठगों के अलावा अन्य बदमाशों के नाम गोरखपुर के पीपीगंज तिघरा का गोपाल यादव, आजमगढ़ महराजगंज के सरेचा परशुरामपुर व यहां कृष्णानगर के सरदारीखेड़ा में रहने वाला रामनाथ, गोरखपुर के बड़हलगंज मंगलपुर निवासी सुरेंद्र प्रताप पांडे, दिल्ली का असरार, जम्मू कश्मीर श्रीनगर का राकेश व रायबरेली के डलमऊ का धर्मेंद्र हैं।
सीओ ने बताया कि रामनाथ मंत्री और मुरारी एनटीपीसी का जीएम बनकर ठगों से मिलते थे। ठग फर्जी नीली और लाल बत्ती लगी कारों से चलते थे। सुरेश प्रताप ड्राइवर बनता था। सीओ ने बताया कि मुरारी, सुशील और लोकेंद्र पीड़ित विक्रम के बगल के गांव में रहते थे।
आपस में मुलाकात के दौरान उन्होंने विक्रम को एनटीपीसी में नौकरी का झांसा दिया था। विक्रम के ही कहने पर उसके कई साथियों ने भी ठगों को नौकरी के लिए रुपया दे दिया। कई युवकों से ठगों ने रेलवे में नौकरी के नाम पर भी रुपये ऐंठे थे।