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मालिक को सबक सिखाने के लिए नौकर ने की थी लाखों की लूट

Sat, 09 Jul 2016 10:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 09 Jul 2016 10:39 PM IST
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Five lakh loot case of Lucknow solved.
लूट के रुपयों के साथ पकड़े गए आरोपी - फोटो : amar ujala

राजधानी लखनऊ के नाका इलाके में गल्ला व्यवसायी के मुनीम से दिनदहाड़े पांच लाख की लूट का मास्टर माइंड उनका नौकर था जिसे तीन दिन पहले हटाया गया था।

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पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस व बाइक के नंबर से कड़ी जोड़कर मास्टर माइंड के साथ तीन छात्रों को वारदात के 13 घंटे में लूटे पांच लाख के साथ दबोच लिया। वारदात में इस्तेमाल बाइक, तमंचा-कारतूस व आठ मोबाइल बरामद हुए हैं।
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एसएसपी मंजिल सैनी ने बताया कि दुगावां स्थित दीपक ट्रेडिंग कंपनी के मुनीम रजनीश पांडेय को शुक्रवार दोपहर राजेंद्रनगर में स्कूटी से गिराकर पांच लाख रुपयों से भरा बैग लूटने के मामले में पुलिस व क्राइम ब्रांच की टीम ने गोंडा के थाना उमरी बेगमगंज के गांव उमरी निवासी शुभम सिंह, प्रदीप सिंह, शैलेंद्र सिंह व गांव इस्माइलपुर निवासी धनंजय सिंह को देर रात त्रिवेणीनगर-द्वितीय स्थित उनके किराए के मकान से पकड़ा गया।
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उनके कब्जे से वारदात में इस्तेमाल दोनों बाइक, तमंचा-कारतूस व आठ मोबाइल मिले। कमरे की तलाशी में मुनीम से लूटे पांच लाख रुपये बरामद हुए। हत्थे चढ़े बदमाशों में शुभम सिंह को दीपक अग्रवाल ने मंगलवार को नौकरी से निकाला था।

इस तरह जुड़ती गईं कड़ियां और सच सामने आया

Five lakh loot case of Lucknow solved.
एसएसपी मंजिल सैनी के साथ आरोपी व अन्य पुलिसकर्मी - फोटो : amar ujala

नौकरों के बारे में तहकीकात पर दीपक अग्रवाल ने एसएसपी को शुभम सिंह को नौकरी से निकाले जाने की जानकारी दी थी। इसके साथ एक राहगीर ने वारदात अंजाम देकर भागे बदमाशों की एक बाइक का नंबर बताया था। नंबर फर्जी था लेकिन, सिरीज गोंडा जिले की थी। शुभम भी गोंडा का रहने वाला था।

कड़ियां जुड़ती देख एसएसपी ने एएसपी क्राइम डॉ. संजय कुमार को कार्रवाई के निर्देश दिए। सर्विलांस सेल के इंस्पेक्टर आलोक सिंह, एसआई अक्षय कुमार, अनुराग मिश्रा, अखिलेश पांडेय, रमेश रावत व जेबी पांडेय की टीम ने शुभम व अन्य नौकरों के मोबाइल का कॉल डिटेल खंगाला।

एचसीपी भृगुनाथ ओझा, योगेंद्र सिंह, कांस्टेबल लवकुश मिश्रा, कृष्ण गिरि, मोहित ने कॉल डिटेल खंगालना शुरू किए। पता चला कि वारदात के दौरान शुभम का लोकेशन राजेंद्र नगर में था।

इतना ही नहीं दो और ऐसे नंबर चिह्नित किए जो शुभम के साथ थे। संदेह गहराते ही एएसपी क्राइम ने कांस्टेबल रामनरेश कनौजिया, सुनील यादव, देवेश यादव, बृजेश सिंह की टीम को तीनों नंबरों का मौजूदा लोकेशन ट्रेस करने पर लगाया।

...और इस तरह रुपये भी किए बरामद

Five lakh loot case of Lucknow solved.

लोकेशन ट्रेस करके क्राइम ब्रांच ने एसओ नाका धीरेंद्र यादव की टीम को साथ लेकर त्रिवेणीनगर-2 में धनंजय सिंह के किराए के मकान पर दबिश दी। वहां वारदात में इस्तेमाल हुई धनंजय की बाइक खड़ी थी। उस पर नंबर तो फर्जी थे लेकिन सिरीज गोंडा की थी।

धनंजय के साथ दो अन्य युवकों को हिरासत में लेने के साथ पुलिस ने कुछ दूर स्थित दूसरे मकान पर दबिश देकर शुभम, प्रदीप व शैलेंद्र को पकड़ने के साथ लूट में इस्तेमाल शुभम की बाइक बरामद की। धनंजय के कमरे की तलाशी में टांड़ पर छिपाकर रखे पांच लाख रुपये बरामद हो गए।

नौकरी से निकाले जाने के गुस्से में लूटा
हत्थे चढ़े शुभम ने खुलासा किया कि वह तीन साल से दीपक ट्रेडिंग कंपनी पर नौकरी कर रहा था। परिवारी कारणों से लंबी छुट्टी लेनी पड़ी और तीन जुलाई को लौटा। नाराज दीपक ने नौकरी से हटाने और मंगलवार को हिसाब करने को कहकर भगा दिया था।

इस पर शुभम ने रकम लूटने की साजिश रची और अपने गांव के तीन छात्रों की मदद से वारदात अंजाम दे डाली। खुद भी मौके पर मौजूद था लेकिन चेहरे पर गमछा लपेट रखा था। सीसीटीवी फुटेज देखने पर दीपक ने बाइक सवार दो बदमाशों के पास गमछा लपेटे खड़े शुभम की हुलिये के आधार पर पहचान की थी।

लुटेरों में एक रिटायर्ड पुलिसकर्मी का बेटा भी

Five lakh loot case of Lucknow solved.

एएसपी सिटी पश्चिम सर्वेश कुमार मिश्रा ने बताया कि हत्थे चढ़े बदमाशों में प्रदीप सिंह लखनऊ विश्वविद्यालय में भाषा विज्ञान से एमए कर रहा है। उसका पिता राजेंद्र बहादुर सिंह पंजाब पुलिस में सिपाही था। सेवानिवृत्त होने पर गांव में रह रहे राजेंद्र ने बेटे को पढ़ाई के लिए लखनऊ भेजा था।

लखनऊ विवि से ही बीए तृतीय वर्ष के छात्र शैलेंद्र सिंह के पिता गांव में खेती करते हैं। धनंजय सिंह ट्रांसगोमती क्षेत्र में परफेक्ट कोचिंग से एसएससी की की तैयारी कर रहा था। उमरी बेगमगंज थाने की पुलिस उसे कातिलाना हमले के मामले में जेल भेज चुकी है। तीनों छात्रों को शुभम सिंह ने आसानी से पांच लाख लूटने की बात कहकर उकसाया था।

एक बार में पांच लाख ही जमा कराता था व्यापारी
शुभम सिंह ने बताया कि गल्ला व्यवसायी दीपक अग्रवाल तीन साल पहले नौ लाख की लूट से सबक लेकर तीन मुनीम रखे और एक बार में पांच लाख रुपये ही जमा कराते थे।

शुभम ने अपने तीनों साथियों को मुनीम द्वारा बैंक आवागमन में इस्तेमाल की जाने वाली स्कूटी का नंबर बता दिया था। पांच लाख रुपये लेकर बैंक ऑफ इंडिया की ऐशबाग शाखा जा रहे मुनीम रजनीश पांडेय को राजेंद्रनगर में बाइक लेकर खड़े प्रदीप ने स्कूटी का नंबर देखकर टक्कर मारी थी।

संगीन वारदात के 12 घंटे में खुलासे पर इनाम

Five lakh loot case of Lucknow solved.

लूट के 12 घंटे में खुलासे के साथ बदमाशों की गिरफ्तारी व पूरी रकम की बरामदगी पर डीआईजी रेंज आरकेएस राठौर ने दस हजार नकद इनाम की घोषणा की है।

टीम में क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर आलोक सिंह, एसआई अक्षय कुमार, जेबी पांडेय, रमेश सिंह रावत, अखिलेश चंद्र पांडेय, अनुराग मिश्रा, एचसीपी भृगुनाथ ओझा, योगेंद्र कुमार, कांस्टेबल कृष्ण गिरि, लवकुश मिश्रा, मोहित कुमार, हिमांशु सिंह, देवेश यादव, बृजेश सिंह, रामनरेश कनौजिया, सुनील यादव, आनंद सिरोही, एसओ नाका धीरेंद्र यादव, एसाई आदर्श कुमार सिंह, पवन पांडेय, गोपालजी कुशवाहा, कांस्टेबल हरिशंकर यादव, दीनानाथ यादव, शादाब व सरजू प्रसाद तिवारी शामिल थे।

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