{"_id":"5d0d39dc8ebc3e7a1b4b6c22","slug":"fir-of-fraud-against-three-person","type":"story","status":"publish","title_hn":"एलडीए के तत्कालीन संपत्ति अधिकारी व बर्खास्त बाबू समेत तीन पर धोखाधड़ी का केस","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम","slug":"crime"}}
एलडीए के तत्कालीन संपत्ति अधिकारी व बर्खास्त बाबू समेत तीन पर धोखाधड़ी का केस
Sat, 22 Jun 2019 01:41 AM IST
सौरभ दिक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: सौरभ दिक्षित
Updated Sat, 22 Jun 2019 01:41 AM IST
विज्ञापन
डेमो इमेज
मड़ियांव कोतवाली में लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के तत्कालीन संपत्ति अधिकारी केके सिंह, फर्जीवाड़े के आरोप में बर्खास्त बाबू मुक्तेश्वर नाथ ओझा और वर्ग सहायक मो. आरिफ अनवर के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज कराया गया है।
इंस्पेक्टर संतोष सिंह ने बताया कि डालीगंज निवासी दाल मिल कंपनी के मालिक रवि कुमार ने तीनों पर अपने नाम आवंटित प्लॉट दूसरे को बेचने का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। घटना के वक्त संपत्ति अधिकारी रहे केके सिंह फिलवक्त कानपुर विकास प्राधिकरण में संयुक्त सचिव हैं जबकि बाबू मुक्तेश्वर नाथ बर्खास्त हो चुका है।
तीसरा आरोपी मो. आरिफ अभी एलडीए में ही है। रवि कुमार ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2007 में मड़ियांव की प्रियदर्शिनी कॉलोनी सेक्टर-बी में 1100 वर्ग फुट का एक प्लॉट खरीदा था। प्लॉट की कीमत 719925 रुपये थी जिसे उन्होंने किस्तों में चुका दिया। इसके बाद बैनामा के लिए उन्होंने एलडीए के अधिकारियों से संपर्क किया।
विज्ञापन
योजना सहायक मुक्तेश्वर नाथ ओझा ने उन्हें स्टांप खरीदवाए और संपत्ति अधिकारी केके सिंह ने विक्रय विलेख तैयार कराया। रवि का कहना है कि मुक्तेश्वर नाथ ओझा ने रजिस्ट्रार ऑफिस चलकर पंजीकृत बैनामा कराने की बात कहते हुए विक्रय विलेख अपने पास रख लिया। रवि उस पर भरोसा करके घर चले गए।
कुछ दिन बाद पता चला कि मुक्तेश्वर नाथ ओझा ने प्लॉट के नाम पर बड़ी गड़बड़ियां की हैं और कई लोगों का रुपया हड़पा है। वीसी के निर्देश पर मुक्तेश्वर नाथ ओझा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने उसे जेल भेज दिया है। रवि कुमार एलडीए ऑफिस पहुंचे और बैनामे के लिए केके सिंह से संपर्क किया।
हालांकि, उन्होंने बैनामा की फाइल मुक्तेश्वर नाथ ओझा के पास होने और उसके जेल से बाहर आने पर ही बैनामा करने की बात कहकर टरका दिया। इस बीच रवि कुमार को पता चला कि उनके प्लॉट पर कोई निर्माण कार्य करा रहा है। वह मौके पर पहुंचे तो राज कुमार गुप्ता नाम का व्यक्ति मिला।
पूछताछ में राज कुमार ने उन्हें जौनपुर निवासी मो. शाहबाज अनवर के नाम पर 16 दिसंबर 2018 का प्लॉट का बैनामा दिखाया। रवि कुमार ने उप रजिस्ट्रार ऑफिस जाकर छानबीन कराई तो पता चला कि मुक्तेश्वर नाथ ओझा ने उनके विक्रय विलेख पर किसी दूसरे व्यक्ति की फोटो लगाकर मो. शाहबाज अनवर के नाम प्लॉट का बैनामा करा दिया है।
उक्त बैनामे में मो. आसिफ अनवर गवाह हैं। बैनामे के बाद उक्त प्लॉट को मो. शाहबाज अनवर को बेच दिया गया, जिसमें अलीगंज के सेक्टर क्यू निवासी सिराज अहमद व धर्मेश शर्मा गवाह हैं। मो. शाहबाज अनवर ने वही प्लॉट 16 नवंबर 2018 को कुशीनगर के पडरौना स्थित सेन बाजार दक्षिणी सब्जी मंडी निवासी राज कुमार गुप्ता व उनके भाई मनोज कुमार गुप्ता को बेच दिया।
रवि का कहना है कि एलडीए के तत्कालीन संपत्ति अधिकारी केके सिंह, योजना सहायक मुक्तेश्वर नाथ ओझा, मो. आरिफ समेत अन्य लोगों ने धोखाधड़ी व फर्जीवाड़ा करके उनका प्लॉट हड़प लिया। उन्होंने 21 अप्रैल 2019 को एलडीए में शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस पर उन्होंने एफआईआर दर्ज कराई है।
विज्ञापन
इंस्पेक्टर संतोष सिंह ने बताया कि डालीगंज निवासी दाल मिल कंपनी के मालिक रवि कुमार ने तीनों पर अपने नाम आवंटित प्लॉट दूसरे को बेचने का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। घटना के वक्त संपत्ति अधिकारी रहे केके सिंह फिलवक्त कानपुर विकास प्राधिकरण में संयुक्त सचिव हैं जबकि बाबू मुक्तेश्वर नाथ बर्खास्त हो चुका है।
विज्ञापन
तीसरा आरोपी मो. आरिफ अभी एलडीए में ही है। रवि कुमार ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2007 में मड़ियांव की प्रियदर्शिनी कॉलोनी सेक्टर-बी में 1100 वर्ग फुट का एक प्लॉट खरीदा था। प्लॉट की कीमत 719925 रुपये थी जिसे उन्होंने किस्तों में चुका दिया। इसके बाद बैनामा के लिए उन्होंने एलडीए के अधिकारियों से संपर्क किया।
विज्ञापन
योजना सहायक मुक्तेश्वर नाथ ओझा ने उन्हें स्टांप खरीदवाए और संपत्ति अधिकारी केके सिंह ने विक्रय विलेख तैयार कराया। रवि का कहना है कि मुक्तेश्वर नाथ ओझा ने रजिस्ट्रार ऑफिस चलकर पंजीकृत बैनामा कराने की बात कहते हुए विक्रय विलेख अपने पास रख लिया। रवि उस पर भरोसा करके घर चले गए।
कुछ दिन बाद पता चला कि मुक्तेश्वर नाथ ओझा ने प्लॉट के नाम पर बड़ी गड़बड़ियां की हैं और कई लोगों का रुपया हड़पा है। वीसी के निर्देश पर मुक्तेश्वर नाथ ओझा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने उसे जेल भेज दिया है। रवि कुमार एलडीए ऑफिस पहुंचे और बैनामे के लिए केके सिंह से संपर्क किया।
हालांकि, उन्होंने बैनामा की फाइल मुक्तेश्वर नाथ ओझा के पास होने और उसके जेल से बाहर आने पर ही बैनामा करने की बात कहकर टरका दिया। इस बीच रवि कुमार को पता चला कि उनके प्लॉट पर कोई निर्माण कार्य करा रहा है। वह मौके पर पहुंचे तो राज कुमार गुप्ता नाम का व्यक्ति मिला।
पूछताछ में राज कुमार ने उन्हें जौनपुर निवासी मो. शाहबाज अनवर के नाम पर 16 दिसंबर 2018 का प्लॉट का बैनामा दिखाया। रवि कुमार ने उप रजिस्ट्रार ऑफिस जाकर छानबीन कराई तो पता चला कि मुक्तेश्वर नाथ ओझा ने उनके विक्रय विलेख पर किसी दूसरे व्यक्ति की फोटो लगाकर मो. शाहबाज अनवर के नाम प्लॉट का बैनामा करा दिया है।
उक्त बैनामे में मो. आसिफ अनवर गवाह हैं। बैनामे के बाद उक्त प्लॉट को मो. शाहबाज अनवर को बेच दिया गया, जिसमें अलीगंज के सेक्टर क्यू निवासी सिराज अहमद व धर्मेश शर्मा गवाह हैं। मो. शाहबाज अनवर ने वही प्लॉट 16 नवंबर 2018 को कुशीनगर के पडरौना स्थित सेन बाजार दक्षिणी सब्जी मंडी निवासी राज कुमार गुप्ता व उनके भाई मनोज कुमार गुप्ता को बेच दिया।
रवि का कहना है कि एलडीए के तत्कालीन संपत्ति अधिकारी केके सिंह, योजना सहायक मुक्तेश्वर नाथ ओझा, मो. आरिफ समेत अन्य लोगों ने धोखाधड़ी व फर्जीवाड़ा करके उनका प्लॉट हड़प लिया। उन्होंने 21 अप्रैल 2019 को एलडीए में शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस पर उन्होंने एफआईआर दर्ज कराई है।