इंजीनियर की हत्या कर बाराबंकी में फेंका शव
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गाजीपुर थानाक्षेत्र के एक कंप्यूटर इंजीनियर का कत्ल करने के बाद हत्यारे शव को बाराबंकी में फेंककर फरार हो गए। गुमशुदगी दर्ज करने के बाद जांच पड़ताल में जुटी पुलिस टीम ने बुधवार देर शाम शव बरामद किया है।
हत्या के पीछे लेनदेन का विवाद बताया जा रहा है। पुलिस आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। कानपुर के चौबेपुर में तीरथपुर निवासी राम नारायण वर्मा उर्फ जयकरन (35) विकासदीप में कंप्यूटर प्रोग्रामर (इंजीनियर) के रूप में कार्यरत था।
गाजीपुर थानाक्षेत्र के लक्ष्मणपुरी ब्रह्मपुरी नगर में रिटायर्ड डिप्टी एसपी प्रेमचंद के घर में परिवार के साथ किराए पर रहने वाले राम नारायण सोमवार सुबह बाराबंकी जाने की बात कहकर निकला था। देर रात तक न लौटने पर 12 वर्षीय बेटे रितिक ने रिश्तेदारों व परिचितों को फोन किया। हालांकि रिपोर्ट दर्ज कराने गाजीपुर थाने पहुंचने पर पुलिस ने टरका दिया।
गाड़ी के ड्राइवर ने बताया कातिल का नाम
अगले दिन मंगलवार को दिन भी कुछ पता नहीं चलने पर हत्या की आशंका जाहिर करते हुये गुमशुदगी दर्ज कराई गई। इसके बाद पुलिस उस गाड़ी को ट्रेस किया, जिससे कंप्यूटर इंजीनियर बाराबंकी के लिये निकला था।
सख्ती से पूछताछ में चालक ने कातिलों के नाम बताये। साथ ही शव बाराबंकी में फेंकने की जानकारी दी। सीओ गाजीपुर, एसओ गाजीपुर ने देर शाम राम नारायण वर्मा उर्फ जयकरन के शव को बरामद कर लिया।
इसके साथ ही पुलिस टीम ने कत्ल के आरोप में कार के चालक सिरथू समेत तीन संदिग्धों को पकड़ लिया। मुख्य आरोपी बाराबंकी के सतरिख निवासी हरीश चंद यादव की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। पुलिस जल्द ही उसे भी गिरफ्तार करने का दावा किया है।
बच्चे की समझदारी से पकड़े गये कातिल
राम नारायण वर्मा के मोबाइल नंबर पर सोमवार सुबह बाराबंकी के सतरिख निवासी हरीश चंद्र की कॉल आई थी। इसके बाद राम नारायण परेशान हो गया था। शायद उसे अनहोनी का अहसास हो गया था।
रितिक ने पिता से परेशानी का कारण पूछा। उस व्यक्ति का नाम व पता जाना, जिसने उन्हें फोन किया। इसके बाद जब राम नारायण बाराबंकी जाने के लिए निकले तो वह पीछे-पीछे घर से कुछ दूर खड़ी स्विफ्ट डिजायर कार तक गया।
इस पर राम नारायण ने उसे बताया कि हरीश चंद ने ही उसे बुलाने के लिये कार भेजी है, जिसमें सिरथू बैठा है। इसके बाद बेटे से कहा कि गाड़ी का नंबर नोट कर लो। लौट कर न आऊं तो समझो कुछ हो गया। इसी नंबर को ट्रेस करने के बाद पुलिस ने अलीगंज से कार बरामद की। चालक सिरथू को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो कातिलों के नाम भी सामने आ गये।
जमीन की खरीद-फरोख्त से शुरू हुआ विवाद
राम नारायण वर्मा उर्फ जयकरन ने दो वर्ष पहले इंदिरानगर स्थित अपना मकान 45 लाख रुपये में बेचा था। इसके बाद बाराबंकी के सतरिख निवासी हरीश चंद्र यादव के साथ मिलकर बाराबंकी में एक प्लॉट खरीदने की बात चल रही थी।
इसके अलावा वृंदावन योजना में 25 लाख रुपये का मकान खरीदने की तैयारी में था। बुधवार को ही मकान की रजिस्ट्री करानी थी। इसी के चलते हरीशचंद्र पर रुपये लौटाने का दबाव बना रहा था। माना जा रहा है कि इसी के चलते हरीश चंद्र ने उसका कत्ल करा दिया।
बराबंकी के सतरिख का निवासी हरीशचंद पेशेवर अपराधी है। उस पर बाराबंकी और लखनऊ के कई थानों में मुकदमे दर्ज हैं और कई बार जेल भी जा चुका है। गोमतीनगर में एक व्यक्ति की हत्या करने की सुपारी लेने के मामले में भी पुलिस उसे गिरफ्तार कर चुकी है। उसके पकड़े जाने के बाद पुलिस को इस घटना के अलावा भी कई महत्वपूर्ण खुलासे होने की उम्मीद है।