युवक ने माता-पिता व भाई समेत परिवार के छह सदस्यों को मौत के घाट उतारा, खुद पहुंचा थाने
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लखनऊ के बंथरा में संपत्ति के लालच में रिश्तों को खून से लथपथ करने की सनसनीखेज वारदात ने सबके दिल दहला दिए। गोदौली गांव के अजय सिंह ने अपने बेटे अंकित के साथ मिलकर खेत में काम कर रहे पिता को मार डाला। इसके बाद दूसरे खेत में पहुंचकर भाई-भाभी और उनके दो बच्चों की धारदार हथियार से गला काटकर हत्या कर दी। पांच लोगों को मौत के घाट उतारने के बाद घर के दरवाजे पर बैठी मां को भी गला रेतकर मार डाला।
सामूहिक हत्याकांड के बाद खून से लथपथ अजय ने थाने पहुंचकर खुद को पुलिस के हवाले कर दिया। हत्याकांड की जानकारी मिलते ही पुलिस के होश उड़ गए। पुलिस आयुक्त सुजीत पांडेय समेत अन्य आला अफसर घटनास्थल पर पहुंचे। देर रात अंकित ने भी खुद को पुलिस के हवाले कर दिया।
पुलिस आयुक्त सुजीत पांडेय ने बताया कि वारदात शाम करीब साढ़े पांच बजे हुई। अजय का पिता अमर सिंह (60) से संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था। अमर सिंह शाम को बंथरा की सीमा से सटे उन्नाव के विष्णुखेड़ा गांव में स्थित खेत में काम कर रहे थे। उसी वक्त अजय व अंकित वहां पहुंचे और बांके से पिता का गला काट दिया। पिता-पुत्र वहां से गोदौली गांव के पास स्थित खेत पहुंचे जहां छोटा भाई अरुण (40), उसकी पत्नी रामसखी फसल काट रहे थे। वहीं उनका नौ साल का बेटा सौरभ व दो साल की बेटी सारिका भी थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अजय व अंकित ने हमला कर दिया तो वे जान बचाने के लिए पास ही प्रताप सिंह की बाग में पहुंचे लेकिन दोनों ने बांके से सभी की गर्दन काटकर मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद दोनों पिता के घर पहुंचे और दरवाजे पर बैठी मां राम दुलारी (58) की गर्दन रेत दी। राम दुलारी ने भी मौके पर ही दम तोड़ दिया। ग्रामीणों का कहना है कि अंकित मौके से भाग गया, जबकि अजय खून से सने कपड़ों में थाने पहुंचा और खुद को पुलिस के हवाले कर दिया।
बेची गई जमीन की रकम को लेकर चल रहा था झगड़ा
पुलिस आयुक्त ने बताया कि अमर सिंह के पास 12 बीघा जमीन थी। उसने बंटवारे में 6 बीघा जमीन बड़े बेटे अजय को दे दी थी और छोटे भाई को अपने साथ रखा। तीन साल पहले अमर सिंह ने 10 बिस्वा जमीन बेच दी थी। अलग रह रहे अजय ने इसमें हिस्सा मांगा तो पिता ने इनकार कर दिया था। इस बात को लेकर दोनों में कई बार झगड़ा भी हो चुका था।
परिवार के कत्ल की पूरी तैयारी से आए थे पिता-पुत्र
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि अजय सिंह व उसका बेटा अंकित पूरी तैयारी से आए थे। उनके पास बांका के अलावा तमंचे भी थे। ग्रामीणों ने प्रताप सिंह की बाग से गोलियां चलने की आवाजें भी सुनी थीं। हालांकि, देर रात तक मृतकों में से किसी को भी गोली लगने की बात सामने नहीं आई थी।
जब अजय ने पुलिस को माता-पिता समेत छह लोगों की हत्या की जानकारी दी तो पुलिसकर्मियों के होश उड़ गए। उसे तुरंत हिरासत में लेकर इंस्पेक्टर ने आला अधिकारियों को वारदात की सूचना दी। पुलिस आयुक्त, संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था नवीन अरोड़ा समेत अन्य अफसरों ने मौके पर पहुंचकर अजय से पूछताछ की।
पुलिस ने अंकित तक पहुंचने के लिए उसकी मां व अन्य परिजनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। हालांकि, देर रात अंकित ने भी थाना पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया। वहीं, आरोपी अजय का अपने पिता व परिवार के अन्य सदस्यों से रिश्ता काफी खराब था। ग्रामीणों ने बताया कि वह लगभग 20 साल से माता-पिता से अलग रह रहा था।
भाई को ज्यादा चाहते थे पिता, इसलिए थी नफरत
पुलिस उपायुक्त मध्य दिनेश सिंह ने बताया कि आरोपी अजय विकृत मानसिकता का है। उसे लगता था कि पिता छोटे भाई को ज्यादा चाहते हैं। पिता ने पूरी संपत्ति भी छोटे बेटे को ही दे दी थी। पूछताछ में अजय ने बताया कि पिता उसे पसंद नहीं करते थे। इसलिए वह उनसे नफरत करता था।