{"_id":"124-64469","slug":"Lucknow-64469-124","type":"story","status":"publish","title_hn":"36 घंटे जांच, 24 घंटे नोटों की गिनती, 25 करोड़ बरामद","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
36 घंटे जांच, 24 घंटे नोटों की गिनती, 25 करोड़ बरामद
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
Updated Fri, 02 Aug 2013 01:12 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शेखर अस्पताल और इंफ्रास्क्ट्रचर कंपनी एप्को के यहां जांच में आयकर विभाग को करोड़ों की अघोषित सम्पत्ति के बारे में पता चला है।
विज्ञापन
एक ओर जहां एप्को ने 36 घंटे की जांच के बाद 25 करोड़ रुपये की सम्पत्ति और निवेश सरेंडर कर दिए वहीं शेखर अस्पताल में जांच के साथ ही नकदी के नए-नए जखीरे मिल रहे हैं।
आलम यह है कि यहां मिले नोटों की गिनती 24 घंटे बाद भी जारी थी। आयकर अधिकारियों का कहना है कि अभी पूरी सम्पत्ति के बारे में जांच पूरी होने पर ही कुछ कहा जा सकेगा।
विज्ञापन
गौरतलब है कि आयकर टीम ने बुधवार सुबह 8 बजे ठेकेदार अनिल सिंह की कंपनी एप्को इंफ्रास्ट्रक्चर के लखनऊ, कोलकाता एवं गुड़गांव के सात ठिकानों पर एक साथ छापामारी की थी।
विज्ञापन
इस छापामारी की जद में बृहस्पतिवार रात 8 बजे तक कंपनी का लखनऊ के गोमतीनगर स्थित विभूति खंड में स्थित मुख्यालय और अनिल सिंह का आवास एवं कंपनी का गुड़गांव स्थित कॉर्पोरेट दफ्तर रहा।
अफसरों के हत्थे जांच के दौरान जमीनी निवेश के अभिलेख, नगदी, गहने, करोड़ों रुपए के आय के दस्तावेज एवं चार लॉकर्स लगे। इसके बाद खुद ही कंपनी के मुखिया ने 25 करोड़ रुपए की आमदनी पर आयकर की अदायगी न किया जाना स्वीकार किया और इस संबंध में अघोषित संपत्ति संबंधी दस्तावेज सरेंडर कर दिया।
इस संबंध में आयकर विभाग की संयुक्त निदेशक (जांच) निमिशा सिंह ने बताया कि अनिल सिंह को इस अघोषित संपत्ति पर 30 फीसदी के हिसाब से 7.50 करोड़ रुपए आयकर के रूप में चुकाने थे। अब आयकर को जुर्माना सहित चुकाना होगा जो करीब नौ करोड़ रुपए तक हो सकता है। उन्होंने बताया कि अनिल सिंह के चार लॉकर्स को भी खोलकर जांच की जाएगी।
कोलकाता में खुला काला चिट्ठा
एप्को कंपनी की कारस्तानी का काला चिट्ठा कोलकाता में छानबीन के दौरान खुला। आयकर अधिकारियों के अनुसार कोलकाता की इन बोगस कंपनियों के खर्च को दर्शाकर करोड़ों रुपए की आय पर आयकर की अदायगी नहीं की गई। छापामारी में इन कंपनियों को सिर्फ कागजों पर संचालित पाया गया। कंपनी के कोलकाता स्थित ठिकानों पर शेयर के दस्तावेज भी पाए गए हैं।
डायरी में मिले लेनदेन के सुबूत
हिंद चैरिटेबल ट्रस्ट मेडिकल कॉलेज में छापामारी के दौरान इतने नोट मिले हैं कि उनकी गिनती में 24 घंटे लगे हैं। जबकि डॉ. एके सचान के आवास से सोने के कीमती गहने भी पाए गए।
ट्रस्ट के पांच ठिकानों में से चार पर बृहस्पतिवार रात 8 बजे तक जांच का सिलसिला जारी रहा। यानी 36 घंटे तक चली जांच में डॉ. सचान के इंदिरानगर स्थित आवास से गहने एवं निवेश के साक्ष्य पाए गए। वहीं बाराबंकी के सफेदाबाद स्थित हिंद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइसेंस (मेडिकल कॉलेज) के दफ्तरों से बड़े पैमाने पर नगदी बरामद हुई है।
इसके अलावा पैसे के लेन-देन संबंधी एक डायरी पाई गई है। जिसमें लखनऊ सहित अन्य शहरों के कई लोगों के विवरण का उल्लेख है। मेडिकल कॉलेज में बुधवार दोपहर बाद ही लाखों रुपए के नोटों के बरामद होने का सिलसिला शुरू हुआ था।
इन नोटों की गिनती बृहस्पतिवार शाम 7 बजे यानी 24 घंटे तक होती रही। इसके अलावा इंदिरानगर स्थित शेखर अस्पताल के प्रबंध निदेशक एवं निदेशक के कक्ष को भी खोलकर खंगाला गया, जिसमें से कोई साक्ष्य हासिल नहीं हो सके। संयुक्त निदेशक ने बताया कि मेडिकल कॉलेज से बरामद रुपए की गिनती की जा रही है।