यूपी: अब विजिलेंस को सौंपी गई सुपरटेक घपले की जांच, तीन और निलंबित, मामले में 26 अधिकारी दोषी
सुपरटेक मामले में योगी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मामले में अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। जांच समिति ने शासन को सौंपी रिपोर्ट।
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शासन ने नोएडा के सुपरटेक-एमरॉल्ड कोर्ट घपले की जांच विजिलेंस को सौंपते हुए तीन और अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इनमें तत्कालीन सहयुक्त नगर नियोजक रितुराज व्यास, तत्कालीन नियोजन सहायक (प्लानिंग असिस्टेंट) अनीता और तत्कालीन सहयुक्त नगर नियोजक विमला सिंह शामिल हैं।
यह कार्रवाई अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त (आईआईडीसी) संजीव मित्तल समिति की रिपोर्ट के आधार पर की गई है। रिपोर्ट में कुल 26 अधिकारी दोषी ठहराए गए हैं। इनमें 4 आईएएस समेत 20 अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। जबकि, दो की मौत हो चुकी है। शासन ने विजिलेंस में पूरे मामले की एफआईआर भी दर्ज करा दी है। जबकि तत्कालीन प्रबंधक, नियोजन मुकेश गोयल को पहले ही सस्पेंड किया जा चुका है।
रिटायर अधिकारियों पर भी कार्रवाई के आदेश
सुपरटेक-एमरॉल्ड कोर्ट घपले में अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त (आईआईडीसी) संजीव मित्तल समिति की रिपोर्ट में जिन 26 अधिकारियों को दोषी ठहराया गया है उनमें नोेएडा के तत्कालीन सीईओ मोेहिंदर सिंह व एसके द्विवेदी, एडिशनल सीईओ आरपी अरोरा व पीएन बाथम और ओएसडी यशपाल सिंह को भी शामिल हैं। वहीं रिपोर्ट के आधार पर शासन ने सेवानिवृत्त अधिकारियों के विरुद्ध भी कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए हैं।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक लिमिटेड को आवंटित ग्रुप हाउसिंग भूखंड पर बने अवैध टावर संख्या टी-16 तथा टी-17 को ध्वस्त करने के आदेश दिए थे। साथ ही नोएडा के दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए कहा था। प्रकरण में सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आईआईडीसी संजीव मित्तल की अध्यक्षता में उत्तरदायित्व तय करने के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है।
अवैध निर्माण को मिला अधिकारियों का सहयोग
रिपोर्ट में कहा है कि समय-समय पर न केवल मेसर्स सुपरेटक ने नियमों की अनदेखी की, बल्कि नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों ने बिल्डर कंपनी को अनुचित आर्थिक लाभ देने के उद्देश्य से उनके नियम विरुद्ध आपराधिक व अन्य कृत्यों को नजरअंदाज किया। बिल्डर के अवैधानिक निर्माण कार्य को जारी रखने में स्पष्ट रूप से सहयोगात्मक रुख अपनाया।
समिति की संस्तुति पर विजिलेंस जांच
समिति ने कहा है कि पूरे प्रकरण में संबंधित अधिकारियों व अन्य व्यक्तियों को आर्थिक लाभ हुआ। इसमें इनकी मिलीभगत स्पष्ट है। उन्हें हुए आर्थिक लाभ के खुलासे के लिए विशेषज्ञ एजेंसी से जांच कराए जाने की आवश्यकता है। समिति की संस्तुति के आधार पर शासन ने विजिलेंस जांच के निर्देश जारी किए। इस प्रकरण में नोएडा प्राधिकरण के संलिप्त पाए गए अधिकारियों, सुपरटेक लिमिटेड के 4 निदेशकों और दो वास्तुविदों के विरुद्ध सतर्कता अधिष्ठान में एफआईआर दर्ज करा दी गई है।
सक्षम न्यायालय में भी होगा मुकदमा
सुप्रीम कोर्ट की अपेक्षा के अनुसार, उप्र. औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम-1976 और उप्र. अपार्टमेंट (प्रमोशन ऑफ कंस्ट्रक्शन, ओनरशिप एंड मेंटिनेंस) अधिनियम-2010 के प्रावधानों के उल्लंघन के मद्देनजर नोएडा प्राधिकरण और सुपरटेक लिमिटेड के संलिप्त पाए गए अधिकारियों के विरुद्ध सक्षम न्यायालय में मुकदमा दाखिल करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
दोषी वास्तुविदों पर भी कार्रवाई होगी
समिति ने अपनी आख्या में दो वास्तुविद संस्थानों को चिह्नित करते हुए उनके वास्तुविदों की संलिप्तता भी बताई है। इसलिए शासन ने इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर को प्रकरण भेजने के निर्देश दे दिए हैं।
ग्रीन बेल्ट पर अतिक्रमण में 15 दिन के भीतर होगी कार्रवाई
रिपोर्ट ने यह भी कहा है कि सुपरटेक लिमिटेड ने ले-आउट प्लान में आरक्षित ग्रीन बेल्ट को भूखंड में शामिल कर अतिक्रमण कर लिया। इसका कुल क्षेत्रफल सात हजार वर्ग मीटर है। इस संबंध में दोषी अधिकारियों के खिलाफ प्राधिकरण स्तर से भी कार्रवाई चल रही है। शासन ने ग्रीन बेल्ट को अतिक्रमण से मुक्त कराने और चिह्नित अधिकारियों के विरुद्ध अगले 15 दिन में कार्रवाई सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं।