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हाई सिक्योरिटी जोन बना मजाक, हो रही वारदात पे वारदात

Sun, 29 May 2016 04:05 PM IST
Updated Sun, 29 May 2016 04:05 PM IST
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crime in high security zone in Lucknow.

केस 1, विधानसभा मार्ग पर एक करोड़ 33 लाख उड़ाए

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राजधानी के अति व्यस्त विधानसभा मार्ग पर बेखौफ बदमाशों ने 17 जनवरी 2015 को सरेराह एक करोड़ 33 लाख रुपये ले उड़े।

वारदात कैसरबाग थाना क्षेत्र के महाराणा प्रताप से बर्लिंग्टन चौराहा के बीच स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा के एटीएम बूथ के बाहर दोपहर करीब ढाई बजे हुई।

बदमाशों ने एटीएम बूथ में कैश भरने आई निजी कंपनी रायटर सेफगार्ड की वैन को निशाना बनाया और उसमें रखा रुपयों से भरा बक्सा उड़ा दिया।

पुलिस ने एक टप्पेबाज को पकड़कर चार लाख रुपये बरामद दिखाकर खुलासा तो कर दिया लेकिन अब तक असली बदमाश पकड़े नहीं जा सके हैं।

केस 2, राजभवन के पास बार-बार होती है लूट

crime in high security zone in Lucknow.

वीवीआईपी और अति सुरक्षित माने जाने वाले राजभवन के पास दिसंबर 2014 में एक्सिस बैंक के बाहर बदमाशों ने निजी कंपनी के मुनीम से भरी दोपहरी 19 लाख रुपये लूट लिए थे।

पुलिस ने बाराबंकी के शमशेर उर्फ राहुल को लखीमपुर से गिरफ्तार कर वारदात के खुलासे का दावा किया। दो लाख रुपये भी बरामद दिखाए। बाकी रकम और शमशेर के साथी सोनू कंजड़ का पुलिस डेढ़ साल बाद भी सुराग नहीं लगा सकी।

सूत्रों के मुताबिक पुलिस ने फर्जी खुलासा करके अपनी बला टाली थी। यही वजह से लूट की रकम बरामद नहीं हो सकी। वहीं, गत 12 मई को राजभवन के सामने रमन सिक्योरिटी के कर्मचारी से 20 लाख रुपये लूटकर बदमाशों ने पुरानी वारदात की याद तो तरोताजा कर दिया।

सीसीटीवी फुटेज में बदमाशों की स्पष्ट तस्वीर होने के बाद भी पुलिस किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकी।

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केस-3, डीजीपी आवास के पास छात्रा से दरिंदगी के बाद हत्या

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डीजीपी आवास के पास लोहिया पथ से नीचे स्थित जंगल में जानकीपुरम की छात्रा से दरिंदगी के बाद हत्या कर दी गई। छात्रा 10 फरवरी 2016 को साइकिल से स्कूल के लिए निकली थी।

15 फरवरी को छात्रा के मोबाइल फोन के आधार पर पुलिस ने बाराबंकी हैदरगढ़ के रिक्शा चालक सदगुरु और दीपक उर्फ दीपू को पकड़ा। इनसे पूछताछ के बाद गोल्फ क्लब के कैडी माइकल और नसीर पकड़े गए। सभी ने छात्रा से दरिंदगी की बात कुबूल की लेकिन कत्ल करने वाले अब तक पकड़े नहीं जा सके हैं।

हाई सिक्योरिटी जोन में अपराधियों की धमक का सिलसिला जारी है। बीते शुक्रवार को जस्टिस की कार पर फायर की घटना ने पुलिस की व्यवस्थाओं पर सवालिया निशान लगा दिया है। इससे पहले भी हाई सिक्योरिटी जोन में बलात्कार, हत्या और लूट की वारदातें कर पुलिस को चुनौती दे चुके हैं। यह दीगर है कि कई वारदातें अनसुलझी हैं तो कई का खुलासा कठघरे में है।

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सेफ जोन पहले से थी, अब शुरू हुई घुसपैठ

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राजधानी अपराधियों के लिये सेफ जोन तो पहले ही थी लेकिन अब हाई सिक्योरिटी जोन में भी अपराधियों ने अपनी घुसपैठ शुरू कर दी है। बीते करीब एक साल के दौरान अति सुरक्षित इलाकों में ताबड़तोड़ वारदातें इसी तरफ इशारा कर रही हैं। अपराधियों को पुलिस का खौफ और पकड़े जाने का डर नहीं रहा।

सनसनीखेज वारदातें कर अपराधियों ने पुलिस को चुनौती दी। जवाब में पुलिस शायद ही किसी वारदात का पूरी तरह से खुलासा कर सकी हो। किसी वारदात का खुलासा कर भी दिया तो बरामदगी और सभी बदमाशों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई।

यही वजह है कि हाई सिक्योरिटी जोन में वारदातों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा। बदमाश वारदात करके फरार हो जाते हैं और पुलिस हाथ मलती रह जाती है।

एक के बाद एक संगीन वारदातें हो रही हैं और अपराधियों को पकड़ने में चौराहों पर लगे मॉडर्न कंट्रोल रूम के सीसीटीवी कैमरे काम आ रहे हैं न ही फॉरेंसिक टीम व सर्विलांस सेल मददगार साबित हो रही है।

बिगड़ी कानून व्यवस्था के लिए यह भी जिम्मेदार

crime in high security zone in Lucknow.

- परंपरागत पुलिसिंग के दम तोड़ने से अपराधियों का प्रभाव बढ़ रहा है। मुखबिर तंत्र ध्वस्त हो चुका है। गली-मोहल्लों की गश्त और बीट पुलिसिंग भी बंद हो गई है। मोहल्लों में गणमान्य नागरिकों के साथ होने वाली बैठकों और समारोह को फालतू समझा जाता है। पुलिस जनता से दूर होती जा रही है।

- योग्यता और मानकों के आधार पर किसी दरोगा की तैनाती नही हो रही है। अधिकतर थानों में सिफारिशी या पहुंच वाले पुलिसकर्मी ही कुर्सी पर बैठे हैं। कई थानेदार और सिपाही तो ऐसे हैं जो अफसरों पर भारी पड़ते हैं। राजधानी में तैनात थानेदारों की सरकार और उनके नुमाइंदों से नजदीकियां सभी जानते हैं। कुछ थानेदार तो खुद को सरकार बताने का मौका नहीं चूकते। एक सीओ की सीएम से नजदीकियां भी चर्चा में है। सीओ खुद को स्कूल में सीएम का सीनियर बताते हैं।

- पुलिस का फोकस क्राइम कंट्रोल से ज्यादा वीवीआईपी पर है। पूरे तंत्र को सिर्फ लाल-नीली बत्ती वालों की चिंता रहती है। उन्हें परेशानी न हो इसके लिए आम जनता की सुविधाओं को दरकिनार कर दिया जाता है। वीवीआईपी ड्यूटी का हवाला देते हुए पुलिस अधिकारी अनसुलझी वारदातों से पल्ला झाड़ लेते हैं। दबिश, विवेचना और कार्रवाई, सब वीवीआईपी ड्यूटी की भेंट चढ़ जाती हैं।

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