भ्रष्टाचार के 35 वर्ष पुराने मामले में डीजीपी कोर्ट में तलब
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भ्रष्टाचार के 35 वर्ष पुराने मामले में डीजीपी को पत्र लिखने के बावजूद पुलिस गवाह को कोर्ट में पेश करने में नाकाम रही। इस पर भ्रष्टाचार निवारण के विशेष न्यायाधीश संदीप गुप्ता ने डीजीपी को 23 नवंबर को कोर्ट में तलब किया है।
साथ ही कहा है कि खुद उपस्थित न होने पर मामले की जानकारी रखने वाले वरिष्ठ अधिकारी को कोर्ट में भेजकर स्पष्टीकरण दें कि वारंट तामील क्यों नहीं हुआ और की गई कार्रवाई से कोर्ट को अवगत क्यों नहीं कराया गया? मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।
वर्ष 1984 में सचिवालयकर्मी आरपी सिंह के खिलाफ कूटरचित दस्तावेज बनाने और भ्रष्टाचार करने का मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में लालजी सहाय और कृष्ण स्वरूप को गवाह बनाया गया था, लेकिन दोनों हाजिर नहीं हो रहे हैं। इसके चलते सुनवाई आगे नहीं बढ़ रही है।
इस पर कोर्ट ने दोनों के खिलाफ वारंट जारी करते हुए पेश करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने पुलिस की लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए कहा कि भ्रष्टाचार का यह मामला वर्ष 1984 में दर्ज किया गया और 1998 से सुनवाई चल रही है।
डीजीपी कार्यालय ने नहीं भेजी कोई रिपोर्ट
इस मामले में लालजी सहाय और कृष्ण स्वरूप गौड़ की गवाही होनी है, लेकिन दोनों हाजिर नहीं हो रहे हैं। इस पर कोर्ट ने दोनों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखा था जो डीजीपी कार्यालय में पांच नवंबर को प्राप्त हो चुका है।
इसके बावजूद कोई गवाह कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ, न ही डीजीपी कार्यालय ने कोई रिपोर्ट कोर्ट में भेजी। वहीं, सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि गवाह लालजी सहाय की मृत्यु हो चुकी है।
ऐसा लचर रवैया आरोपी के हित को दर्शाता है
अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के मामले में ऐसा लचर रवैया आरोपी के हित को दर्शाता है। पुलिस महानिदेशक राज्य का सर्वोच्च पुलिस अधिकारी होता है और उनकी ओर से कोई कड़ा कदम नहीं उठाया जा रहा है।
इससे ऐसा लगता है कि डीजीपी या तो गवाह को पेश करने में रुचि नहीं रखते या वह कोर्ट के आदेशों की ओर ध्यान नहीं देना चाहते। ऐसी स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।