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अयोध्या: धन्नीपुर में मस्जिद के लिए आवंटित जमीन को लेकर याचिका खारिज, याची महिलाओं ने खुद वापस ली याचिका
Mon, 08 Feb 2021 08:52 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 08 Feb 2021 08:52 PM IST
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धन्नीपुर में बनने वाली मस्जिद का डिजाइन।
- फोटो : amar ujala
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अयोध्या के धन्नीपुर गांव में मस्जिद बनाने के लिए यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को आवंटित कुल जमीन में से पांच एकड़ के विवाद को लेकर दायर याचिका को याची महिलाओं ने सोमवार को वापस ले लिया। इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने याचिका खारिज कर दी। साथ ही याचियों को मामले में नई याचिका दायर करने की छूट भी दी है।
न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति मनीष कुमार की खंडपीठ ने यह आदेश रानी कपूर पंजाबी व रमा रानी पंजाबी की याचिका पर शुरुआती सुनवाई के बाद दिया। याचिका में दिल्ली निवासी दोनों महिलाओं ने आवंटित जमीन में से पांच एकड़ पर अपना हक होने का दावा किया था। साथ ही यह भी कहा था कि इस पांच एकड़ की जमीन के संबंध में बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी के समक्ष एक मुकदमा भी विचाराधीन है।
याचियों के वरिष्ठ अधिवक्ता एचजीएस परिहार के मुताबिक बंटवारे के समय उनके माता-पिता पाकिस्तान के पंजाब से आए थे। वे फैजाबाद (अब अयोध्या) जनपद में ही बस गए। बाद में उन्हें नजूल विभाग में नौकरी भी मिल गई। उनके पिता ज्ञान चंद्र पंजाबी को 1560 रुपये में पांच साल के लिए ग्राम धन्नीपुर परगना मगलसी, तहसील सोहावल, जनपद फैजाबाद में जमीन का पट्टा दिया गया।
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पांच साल के बाद भी यह जमीन याचियों के परिवार के उपयोग में रही व याचियों के पिता का नाम आसामी के तौर पर राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज हो गया। वर्ष 1998 में सोहावल एसडीएम द्वारा उनके पिता का नाम संबंधित रिकॉर्ड से हटा दिया गया, जिसके खिलाफ याचियों की माता ने अपर आयुक्त के यहां लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और फैसला उनके पक्ष में आया।
याचियों का कहना है कि अपर आयुक्त के आदेश के बाद भी चकबंदी के दौरान पुन: इस जमीन के राजस्व रिकॉर्ड को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। तब चकबंदी अधिकारी के आदेश के विरुद्ध बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी के समक्ष मुकदमा दाखिल किया गया जो अब तक विचाराधीन है। इसके बावजूद प्रदेश सरकार ने इसी जमीन में से पांच एकड़ सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को आवंटित कर दी है। याचियों ने इस जमीन के आवंटन व उसके पूर्व की संपूर्ण प्रक्रिया को चुनौती दी थी।
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न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति मनीष कुमार की खंडपीठ ने यह आदेश रानी कपूर पंजाबी व रमा रानी पंजाबी की याचिका पर शुरुआती सुनवाई के बाद दिया। याचिका में दिल्ली निवासी दोनों महिलाओं ने आवंटित जमीन में से पांच एकड़ पर अपना हक होने का दावा किया था। साथ ही यह भी कहा था कि इस पांच एकड़ की जमीन के संबंध में बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी के समक्ष एक मुकदमा भी विचाराधीन है।
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याचियों के वरिष्ठ अधिवक्ता एचजीएस परिहार के मुताबिक बंटवारे के समय उनके माता-पिता पाकिस्तान के पंजाब से आए थे। वे फैजाबाद (अब अयोध्या) जनपद में ही बस गए। बाद में उन्हें नजूल विभाग में नौकरी भी मिल गई। उनके पिता ज्ञान चंद्र पंजाबी को 1560 रुपये में पांच साल के लिए ग्राम धन्नीपुर परगना मगलसी, तहसील सोहावल, जनपद फैजाबाद में जमीन का पट्टा दिया गया।
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पांच साल के बाद भी यह जमीन याचियों के परिवार के उपयोग में रही व याचियों के पिता का नाम आसामी के तौर पर राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज हो गया। वर्ष 1998 में सोहावल एसडीएम द्वारा उनके पिता का नाम संबंधित रिकॉर्ड से हटा दिया गया, जिसके खिलाफ याचियों की माता ने अपर आयुक्त के यहां लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और फैसला उनके पक्ष में आया।
याचियों का कहना है कि अपर आयुक्त के आदेश के बाद भी चकबंदी के दौरान पुन: इस जमीन के राजस्व रिकॉर्ड को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। तब चकबंदी अधिकारी के आदेश के विरुद्ध बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी के समक्ष मुकदमा दाखिल किया गया जो अब तक विचाराधीन है। इसके बावजूद प्रदेश सरकार ने इसी जमीन में से पांच एकड़ सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को आवंटित कर दी है। याचियों ने इस जमीन के आवंटन व उसके पूर्व की संपूर्ण प्रक्रिया को चुनौती दी थी।