{"_id":"62f1725a63eacf133908c368","slug":"court-news-lucknow-news-lko643292723","type":"story","status":"publish","title_hn":"डीसीपी पूर्वी, एसएचओ गुडंबा समेत पूरी टीम तलब, अरेस्ट स्टे के बावजूद अभियुक्तों को उठाने पर कोर्ट ने जताई नाराजगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डीसीपी पूर्वी, एसएचओ गुडंबा समेत पूरी टीम तलब, अरेस्ट स्टे के बावजूद अभियुक्तों को उठाने पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
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Court News
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लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनऊ खंडपीठ द्वारा आरोप पत्र पर रोक का आदेश दिए जाने के बावजूद लखनऊ पुलिस ने अभियुक्तों को हाईकोर्ट के गेट से ही उठा लिया। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और इस कृत्य को अनुचित बताते हुए कहा कि इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को सुबह साढे़ दस बजे की जाएगी। इस दौरान न्यायालय ने डीसीपी पूर्वी व एसएचओ गुडंबा समेत अभियुक्तों को उठाने वाली पूरी पुलिस टीम को तलब किया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह की एकल पीठ ने सुरेश कुमार तंवर व बलबीर सिंह की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। दोनों याचियों के विरुद्ध डॉ. श्वेता सिंह ने गाजीपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि उत्तराखंड सरकार द्वारा बलबीर सिंह को खनन पट्टे का आवंटन किया गया था। खनन कार्य के लिए याचियों ने वादिनी के साथ करार किया, जिसके अनुसार खनन कार्य वादिनी की फर्म को करना था। आरोप है कि 42 लाख रुपये का भुगतान प्राप्त करने के बाद याचियों ने खनन कार्य स्वयं शुरू कर दिया और वादिनी के पैसे हड़प लिए। मामले में याचियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की व वादिनी की रजामंदी से एक महीने में उसे 35 लाख रुपये और दिसंबर 2022 तक 15 लाख रुपये वापस करने की बात कही। शेष राशि के लिए न्यायालय ने मामले को हाईकोर्ट के मध्यस्थता व सुलह केंद्र को भेज दिया। साथ ही मामले में याचियों के विरुद्ध दाखिल आरोप पत्र पर रोक लगा दी।
सोमवार को सुनवाई के बाद जैसे ही दोनों याची हाईकोर्ट परिसर के बाहर निकले, वहां पहले से मौजूद पुलिस टीम ने गेट नं. 6 से दोनों को उठा लिया। याचियों के अधिवक्ता ने तत्काल न्यायालय को इससे अवगत कराया। न्यायालय ने सीनियर रजिस्ट्रार व रजिस्ट्रार, सिक्योरिटी को याचियों की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए कहा और पुलिसकर्मियों को तलब किया। तलब हुई पुलिस टीम के अगुआ दरोगा नितिन कुमार ने कोर्ट को बताया कि एसएचओ गुडंबा के आदेश पर गैंगस्टर एक्ट के तहत यह कार्रवाई की गई। इस पर न्यायालय ने सख्त नाराजगी जताई।
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यह आदेश न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह की एकल पीठ ने सुरेश कुमार तंवर व बलबीर सिंह की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। दोनों याचियों के विरुद्ध डॉ. श्वेता सिंह ने गाजीपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि उत्तराखंड सरकार द्वारा बलबीर सिंह को खनन पट्टे का आवंटन किया गया था। खनन कार्य के लिए याचियों ने वादिनी के साथ करार किया, जिसके अनुसार खनन कार्य वादिनी की फर्म को करना था। आरोप है कि 42 लाख रुपये का भुगतान प्राप्त करने के बाद याचियों ने खनन कार्य स्वयं शुरू कर दिया और वादिनी के पैसे हड़प लिए। मामले में याचियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की व वादिनी की रजामंदी से एक महीने में उसे 35 लाख रुपये और दिसंबर 2022 तक 15 लाख रुपये वापस करने की बात कही। शेष राशि के लिए न्यायालय ने मामले को हाईकोर्ट के मध्यस्थता व सुलह केंद्र को भेज दिया। साथ ही मामले में याचियों के विरुद्ध दाखिल आरोप पत्र पर रोक लगा दी।
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सोमवार को सुनवाई के बाद जैसे ही दोनों याची हाईकोर्ट परिसर के बाहर निकले, वहां पहले से मौजूद पुलिस टीम ने गेट नं. 6 से दोनों को उठा लिया। याचियों के अधिवक्ता ने तत्काल न्यायालय को इससे अवगत कराया। न्यायालय ने सीनियर रजिस्ट्रार व रजिस्ट्रार, सिक्योरिटी को याचियों की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए कहा और पुलिसकर्मियों को तलब किया। तलब हुई पुलिस टीम के अगुआ दरोगा नितिन कुमार ने कोर्ट को बताया कि एसएचओ गुडंबा के आदेश पर गैंगस्टर एक्ट के तहत यह कार्रवाई की गई। इस पर न्यायालय ने सख्त नाराजगी जताई।
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